समर्पण आश्रम अरडका में त्रिदिवसीय गुरुपूर्णिमा महोत्सव

गुरुपूर्णिमा का दिन हरेक व्यक्त्ति के जीवनमें बहुत महत्वपूर्ण होता है। समर्पण ध्यान योग परिवारमें प्रति वर्ष यह उत्सव बहुत भाव और उत्साह से मनाया जाता है।इस वर्ष यह पावन उत्सव समर्पण आश्रम राजस्थान की पावन भूमि में ८००० से भी अधिक साधको के बीचमे मनाया जा रहा है।दिनांक १५ से १६ त्रिदिवसीय उत्सव का प्रारंभ पू.स्वामीजी एवं पू.गुरुमा के सनिध्यमे हजारों साधको की उपस्थिति में विभिन्न धर्मों के अनुयायीओ के कर कमलों से दिप प्रागट्य करके हुआ।

इस उदघाटन समारोह में उदासीन आश्रम पुष्कर के महंत श्री हनुमान रामजी महाराज,नगरा गुरुद्वारा के रागी महेंद्र सिंहजी,सोफ़िया कॉलेज अजमेर के सिस्टर पर्ल,दशनाम सन्यास आश्रम पुष्कर के पू.स्वामी आत्मानंद सरस्वती,निरंजनी आश्रम अरड़का के संत श्री दयारामजी महाराज,रोमन केथलीक चर्च के फादर कॉस्मॉस शेखावतजी,एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस राजस्थान के नरेंद्र सिंह चौधरी,मेम्बर ऑफ पार्लियामेंट डॉ भारती बेन शियाल के द्वारा दिप प्रागट्य करके कार्यक्रम का आरंभ हुआ।विभिन्न धर्मों के धर्म गुरुओं की उपस्थिति से वातावरण बिल्कुल पावन लग रहा था।सभी धर्मों के धर्म गुरुओं का श्री शिवकृपानंद स्वामी आश्रम ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी संदीप शर्माजी तथा योग प्रभा भारती(सेवा संस्था)ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी गिरीश बोरकरजी नेपुष्प गुच्छ और शाल अर्पण कर के सन्मान किया।

प्रत्येक गुरुपूर्णिमा की तरह इस बार भी पू. गुरुमा के कर कमलों से समर्पण साहित्य का विमोचन हुआ।जिसमें पू.गुरुदेव के संदेश का संकलन ‘आत्मा की आवाज़’ग्रंथ,पू. गुरुदेव की आत्म कथा हिमालय का समर्पण योग भाग २(कन्नड़) तथा तमिल और कन्नड़ भाषामे दो डीवीडी का विमोचन हुआ।विमोचन के पश्चात पू. गुरुदेव के ज्येष्ठ पुत्र और श्री शिवकृपानंद आश्रम ट्रस्ट के आजीवन ट्रस्टी श्री अनुरागजी ने समर्पण परिवार की विविध गतिविधियों में टेक्नोलॉजी से आयी सुविधाओ के बारे में अवगत किया।अंत मे समर्पण ध्यान योग की द्विमासिक पत्रिका ‘ मधुचैतन्य’ के बारे में प्रिया पेडमकरने उपयोगी जानकारी दी और मधु चैतन्य के बारे में सम्पूर्ण जानकारी का एक वीडियो भी दिखाया गया।

कार्यकम के दूसरे सेशन में पू.श्री.शिवकृपानंद स्वामीजी का प्रवचन का साधको ने लाभ लिया।पू. स्वामीजी ने योग का महत्व बताते हुए कहा कि योग याने योगासन यह बात सही नही है,नई पीढ़ी को योग का सही मायने में अर्थ समजाना हमारा कर्तव्य है वसुधैव कुटुम्बकम की भावना योग से पूर्ण हो सकती है।वर्तमान समय मे गुरु को पहचानना बहुत आसान है यह बात करते हुए ओरा का महत्व समजाया। सरनेम हटाने का सुजाव देते हुए जाति मुक्त राष्ट्र की कल्पना का सुंदर चित्र प्रस्तुत किया।

गुरु पूर्णिमा के दिन दोपहर 4 बजे से गुरु दर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया है जिसमे उपस्थित रहकर गुरु चैतन्य का लाभ लेने के लिए सभी को आमंत्रण है।

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