पहले सीजन की दस गोष्ठियों में अजमेर के तीस कवियों ने दी अपनी श्रेष्ठ काव्य प्रस्तुति
कला एवं साहित्य के संवर्द्धन व प्रोत्साहन के लिए विगत 36 वर्ष से कार्यरत पंजीकृत संस्था ‘नाट्यवृृंद‘ द्वारा शुरू की गयी साप्ताहिक ‘काव्य सरिता‘ की इस श्रृंखला की अंतिम दसवीं कड़ी में प्रस्तुत काव्य रचनाओं में मातृत्व भाव, अध्यात्म, व्यंग्य और प्रकृति के रंग उभरे। आयोजक कंवल प्रकाश किशनानी ने बताया कि आभासी पटल पर 22 अक्टूबर से प्रत्येक शुक्रवार को शाम 7 से 8 बजे तक प्रसारित हुई इन काव्यगोष्ठियों में अजमेर के कवियों को देश विदेश के लगभग 25 हजार दर्शकों ने सुना और सराहा। संयोजक उमेश कुमार चौरसिया ने बताया कि आज की गोष्ठी में कवयित्री डॉ शमा खान ने मेरी मां की धड़कने तरन्नुम सी बजती है मुझमें, वो आया सड़कों पर, हुँकार भरता एक स्वर में और ए खुदा जज्ब कर लिया तुझे यूं रचनाओं में विविध भाव अभिव्यक्त किए वहीं ई संदीप पांडे ‘शिष्य’ ने हे कोरोना तेरा शुक्रिया, रात हुई फुर्र, भोर नवेली हुर्र और मन को भावे, रंगीली पेड पत्तीया रचनाएँ सुनाईं।
रोचक संचालन कर रहे व्यंग्यकार प्रदीप गुप्ता ने मैं तो भूख हूं साहब हर रोज लगती हूं, बच्चे अब बच्चे नही रहे मगर पिता अब भी एक पिता है, इवेंट मैनेजमेंट और मेडिकल कैम्प आदि रचनाओं में गहरी संवेदना और व्यंग्य ने प्रभावित किया। अंत में नाट्यवृन्द के निदेशक उमेश चौरसिया ने बताया कि काव्य सरिता के प्रथम सीजन के इन दस एपिसोड में कुल 15 कवि और 15 कवयित्रियों ने काव्य पाठ किया, शीघ्र ही दूसरा सीजन नए अंदाज में शुरू किया जाएगा।