युग प्रवर्तक युवा सम्राट स्वामी विवेकानंद part 2

j k garg
अपने अमेरिका प्रवास के समय वे अमेरिका में संगठित कार्य से किये गये कामों के फलस्वरूप चमत्कारिक परिणामों से स्वामी जी अत्यंत प्रभावित हुए थे। उन्होंने ठान लिया था कि उन्हें भारत में भी इस संगठन कौशल को पुनर्जीवित करना है इसलिए विवेकानंद ने रामकृष्ण मिशन की स्थापना कर सन्यासियों तक को संगठित कर उन्हें समायोचित उत्तम कार्य करने का प्रशिक्षण दिया था | अमेरिका से लौटने पर स्वामी जी ने भारतीयों से नये स्फूर्ति पूर्व भारत के निर्माण हेतु आह्वान किया | भारत की जनता भी स्वामीजी के आह्वान पर अपने उत्थान हेतु गर्व के साथ निकल पड़ी। स्वामी के वाक्य”‘उठो, जागो, स्वयं जागकर औरों को जगाओ, अपने मानव जीवन को सफल करो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाये |

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