केकड़ी 18 फरवरी(पवन राठी)
परम पूज्य आचार्य शांतिसागर महाराज की परंपरा के षष्ठम पट्टाचार्य अभिनंदन सागर महाराज के परम प्रभावक शिष्य, प्रखर वक्ता आचार्य श्री अनुभव सागर महाराज ने श्री नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर,बोहरा कॉलोनी में धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जहां पर विश्वास पक्का होता है वहां विश्वास के परिणति स्वरूप आचरण भी दिखाई देता है ,अगर हमारा विश्वास आचरण के रूप में नहीं बदलता तो विश्वास ऐसा ही है जैसे किसी डॉक्टर पर भरोसा तो हो परंतु उसकी दी हुई दवाई का सेवन ही ना किया जाए, दवाई पर विश्वास मात्र निरोग नहीं कर सकता बल्कि दवाई का सेवन ही विश्वास को उन्नत कर सकता है ।
उन्होंने कहा कि हमारे गुरुदेव ने उपदेश देने कहा था आदेश नहीं , अतः हम किसी को किसी भी त्याग या नियम के लिए बाध्य नहीं करते, जैसे अंडे को फोड़ दिया जाए तो उसके अंदर के जीव का मरण निश्चित है जबकि अगर अंडा वक्त पर स्वयं टूटता है तो जीवन का प्रारंभ होता है ,उपदेश उसके फूटने का निमित्त बन सकता है परंतु आदेश तो ऐसे समय में उसे नष्ट ही कर देता है ।
धर्म वस्तुतः खींचने का नहीं खींचे चले आने का उपक्रम है, परंतु सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा सद्गुरु के माध्यम से ही प्राप्त हो सकती है अतः उपदेशों को अवश्य सुनना, भले ही परिवर्तन हो या ना हो ,क्या पता कब कौन सी बात हमारे हृदय और जीवन के परिवर्तन का कारण बन जाए । अध्यक्ष अमरचंद चौरुका व मंत्री भागचंद जैन ने समस्त धर्म प्रेमियों को नियमित प्रवचन में आकर धर्म लाभ लेने की अपील की ।