अजमेर, 8 सितम्बर, 2022 / पर्युषण पर्व की दस दिवसीय श्रृंखला में 9वें दिन आज सर्वोदय कॉलोनी स्थित श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन जिनालय में उत्तम अकिंचन धर्म की विशेष पूजा हुई। इसके अलावा नित्यनियम की पूजा के साथ नव देवता की पूजा हुई तथा 16 भावनाओं के अर्ध्य भी चढ़ाऐ गऐ। अकिंचन धर्म से तात्पर्य अपरिग्रह से है। परिग्रह का त्याग होने पर पूर्ण अकिंचन्य धर्म प्रकट होता है।
पूजा से पूर्व श्री शांतिनाथ भगवान के प्रथम कलशाभिषेक व शांतिधारा का सौभाग्य श्राविका शांता बाई, अशोक-शशि, अक्षय बड़जात्या परिवार को मिला। अन्य शांतिधारा कर्ता राजकुमार-राजमति बड़जात्या, पारस-शांता पाटनी परिवार रहे। श्री सम्मेद शिखरजी में विराजमान आचार्य अंतर्मना श्री प्रसन्न सागरजी महाराज का आज उपवासों के श्रृंखला के बाद पारणा होने की वजह से ताराचंद सेठी, प्रेम पाटनी व राजकुमार बिलाला ने निर्विघ्न आहार होने की कामना से विशेष शांतिधारा करवाई।
जिनालय समिति के मंत्री विनय गदिया ने बताया कि जिनालय में धार्मिक क्रियाऐं – तन शुद्धि, जल शुद्धि, सामग्री शुद्धि, कलश, शांतिधारा, छत्र स्थापना, चॅंवर ढोलना, अर्घ्य चढ़ाना, मार्जन, पूजा, विधान, विसर्जन, सामायिक, सांध्यकालीन आरती, प्रतिक्रमण आदि सभी क्रियाऐं बड़े विनय पूर्वक व भक्तिभाव से होते हैं। साज-बाज व नृत्य के तड़के से हर चीज जीवंत हो उठती है। मंत्रोच्चारण, भजनों व दोहे गाने में धनकुमार लुहाड़िया, सुभाष पाटनी, कमल कासलीवाल, दीपक पाटनी, सुयोग गंगवाल, भागचंदजी, सुभाष गंगवाल, अनिल गंगवाल, निलिमा पाटनी, अंजु पाटनी, बीना गदिया, शांता पाटनी, साधना पाटनी, चिंता गोधा, निशा बाकलीवाल आदि का विशेष योगदान रहता है।
मंगलचंदजी पाटनी बताते हैं कि आज भाद्रपद की इस तेरस को ‘गटका तेरस’ भी कहते हैं। इस दिन घरों में पकवान बनाऐ जाते हैं। इस पर एक पुरानी कहावत है – ‘तेरस का गटका, चवदस का भटका’ यानी तेरस को घरों में माल बनते हैं तो इसके अगले दिन पड़ने वाली अनन्त चतुर्दर्शी को अधिकांश साधर्मियों का व्रत, उपवास रहता है।
(अनिल कुमार जैन)
श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन जिनालय,
सर्वोदय कॉलोनी, अजमेर
फोन 9829215242