अजमेर राजस्थान में स्मार्ट सिटी के साथ-साथ हृदय योजना व अमृत योजना के तहत अनेक कार्य कराए गए है,जो उच्च मापदंडों पर व शहर की आवश्यकता के अनुरूप सौंदर्यकरण पर खरे नहीं उतरते हैं।
शहर की विभिन्न समस्याओं को ध्यान में लाने हेतु समय-समय पर जानकारी दी गई है परन्तु जब तक इन समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं होता है तब तक प्रधानमंत्रीजी के स्मार्ट सिटी के सपने को साकार होना सम्भव नहीं है, इस बार की बारिश में शहर के कई क्षेत्रों को स्मार्ट सिटी में हुए विनाश कार्यों की वजह से नारकीय तकलीफें झेलनी पड़ी है।
अजमेर में जब बाढ़ आती है तभी शहर की व्यवस्था बिगड़ती थी, वह भी सिर्फ निचली कच्ची बस्तियों में । लेकिन स्मार्ट सिटी व अन्य योजनाओ के कार्यों के लागू होने बाद हर बरसात में शहर के सभी नागरिकों का जीना दुभर हो जाता है व अनेकों जगह घरों में 2 से 4 फीट तक पानी भर जाता है ।
अजमेर में स्थित प्राचीन व प्राकृरित आनासागर तालाब का ऐतिहासिक महत्व है । अधिकारियों की सनक के चलते 70 के दशक में उर्स मेले में आने वाली हजारों गाड़ियों के रुकने के स्थान हेतु विश्रामस्थली का निर्माण किया गया ,जिसका पूरा भाग आना सागर के पेटे में से लिया गया ।
इसके कारण जहां आना सागर की चादर 22 फीट पर चलती थी उसे घटाकर 18 फिट कर दिया गया ।
कोढ में खाज का काम राजस्थान हाउसिंग बोर्ड में 70 व 80 के दशक में आनासागर की परिधि में ही सागर विहार व अन्य हाउसिंग कॉलोनीयां बना दी । इन योजनाओं के बाद आनासागर का आकार आधा हो गया ।
6 ~7 वर्षों पूर्व नगर निगम अजमेर के अधिकारियों व निर्वाचित जन नेताओं ने भू माफियाओं से मिलकर आना सागर के पाल के किनारे किनारे लाखो टन शहर का मलबा यहां (धीमा जहर की तरह) डलवाना प्रारंभ किया व स्मार्ट सिटी की घोषणा के बाद आनासागर को 10~10 फूट गहरा करके उसकी वास्तविक गहराई व पुराने क्षेत्रफल में लाने की बजाय ,आना सागर के पानी के फैलाव को रोकने के लिए वहां करोड़ों रुपए की लागत से पाथवे बना दिया व सेवन वंडर्स के नाम से एक विशाल निर्माण करवा दिया गया । इसी के साथ आनासागर के परिधि में से ही नगर निगम ने लव कुश उद्यान को तोड़कर एक बड़ा रेस्टोरेंट बना दिया गया । जिसके बीच में बनाए गए पाथवे पर भी रेस्टोरेंट के लीजधारी ठेकेदार ने कब्जा कर लिया ।
नगर निगम की लापरवाही या मिलीभगत से ही जीमॉल , दुकाने, प्राइवेट कॉलोनी, समारोह स्थल व बड़े-बड़े रेस्टोरेंट आदि वैशाली नगर व पुष्कर रोड पर आना सागर के पेटे में ही बना लिए गए और आनासागर का पेटा पानी के भराव से खाली होता गया और जिला प्रशासन व नगर निगम की मिली भगत से भूमाफियाओं का पेट बढ़ता गया।
भारत सरकार के तालाब ,बगीचे ,बावड़ी,पर्यावरण आदि की सुरक्षा हेतु बनाए गए है कोर्ट के समकक्ष “नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल” ने इन निर्माणों को तोड़ने के स्पष्ट आदेश दिए । जिसके विरुद्ध नगर निगम अजमेर ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की जो खारिज हो गई । उसके बाद भी जिला प्रशासन व नगर निगम ने यहां हुए अतिक्रमण व अवैध निर्माणों को नहीं तुड़वाया, इसके चलते आनासागर का आकार घट कर एक चौथाई हो गया । जिला प्रशासन, जल संसाधन विभाग व सिंचाई विभाग ने आनासागर की चादर चलने का लेवल भी18 फीट से घटा कर 13 फिट कर दिया ताकि आना सागर में ज्यादा पानी ना भरे और उससे भू माफियाओ को फायदा हो सके ।
लेकिन चादर 13 फिट करने के कारण व आना सागर के अंदर करीब 10 ~10 फीट मिट्टी व मलबा भर जाने से उसकी गहराई कम हो गई । जिससे पूरे साल शहर का विभिन्न नालों से गंदा पानी आने से थोड़ी तेज बारिश से ही यह ओवरफ्लो हो जाता है और नीचली व आसपास की बस्तियां जलमग्न हो जाती है ।
इसी के साथ आजाद पार्क व सुभाष उद्यान यह दोनों शहर के बड़े बगीचे रहे हैं, बाद में नगर सुधार न्यास अजमेर ने आना सागर के धोबी घाट की जगह लव कुश गार्डन बनाया ,जहां वरिष्ठ नागरिक व बच्चे सुबह-शाम घूमने जाते थे । इसी के साथ देश-विदेश के पर्यटक भी यहां आते रहे थे ।
लेकिन आजाद पार्क को पार्क के रूप में बिल्कुल समाप्त कर वहां सीमेंट कंक्रीट का जंगल उगा दिया गया है । इसी प्रकार सुभाष उद्यान का आकार घटा कर एक चौथाई कर दिया गया है वह उस पर भी टिकट लगा दिया गया है , इसी प्रकार पटेल मैदान का आकार छोटा कर दिया गया । एक अन्य पार्क लवकुश उद्यान को पूरी तरह समाप्त कर स्मार्ट सिटी की भेंट चढ़ा दिया गया है ।
इसी प्रकार अजमेर के नागरिकों के सुविधा हेतु बनाया गया एलिवेटेड रोड (फ्लाईओवर ब्रिज) बिना किसी उच्च तकनीक विज्ञों की सलाह लिए, ठेके पर कम दर लेकर जानकारी से से पूरी तरह अपरिचित होने वाले ठेकेदारों से तकनीकी हल प्रोजेक्ट बनवाकर निर्माण चालू कर दिया गया व उसके मूल उद्देश्य से लगातार भटकते रहे ,जहां इसे मारटिंडल ब्रिज से प्रारंभ करना चाहिए था ,उसकी जगह बाटा तीराहे से प्रारंभ किया व बजरंगगढ़ पर उतारने की बजाय राजनीतिज्ञ व्यक्तियों एवं मित्तल मॉल जैसे व्यवसाईयों के दबाव में एक भुजा खाईलैंड मार्केट पर उतार दी गई । वैशाली नगर चौरसियावास रोड के शहर में पडने वाले दबाव को काम करने के लिए आनासागर चौपाटी से ऊपर चढ़ने की बजाय इसे नसियां जी के यहां से चढ़ाया गया । जो किसी भी रूप में तकनीकी रूप से सही नहीं है और एलिवेटेड ब्रिज की चौड़ाई भी पर्याप्त नहीं रखी गई । इसका खर्चा भी समय-समय पर मनमाने ढंग से बढ़ाया जाता रहा । एलिवेटेड रोड के नीचे जो बड़े-बड़े खड्डे हो गए थे उनके स्थान पर नई सड़क सीमेंट कंक्रीट /डामर की आज तक नहीं बनवाई गई ।
दरगाह बायपास रोड जो करीब 28 साल पहले बना था वह पूरी तरह नष्ट हो चुका है बड़े-बड़े खड्डे हैं सड़क ढूंढने से भी नहीं मिलती । दो जगह डेड दो फीट ऊंचा स्पीड ब्रेकर है ,जिससे 10~ 12 एक्सीडेंट रोज होते हैं । स्मार्ट सिटी के तहत वह सड़क पहले बनाई जाती तो स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ, क्योंकि दिल्लीगेट से होकर, ख्वाजा साहब की दरगाह के लिए चार पहिए वाहनों को आना-जाना बंद है वह दरगाह बायपास रोड नई सड़क होते हुए चार पहिया वाहन जाते हैं ,उनके वाहन वहां प्रतिदिन दुर्घटनाग्रस्त होते हैं वह खराब हो जाते हैं।
इस हेतु तीन वर्ष पूर्व पीडब्ल्यूडी व ADA ने अलग अलग एक करोड़ 80 लाख रुपए का सीमेंट कंक्रीट की डेढ़ दो किलोमीटर सड़क बनाने के लिए तकमीना भी बनाया गया था ,ADA द्वारा उसके टेंडर भी किए गए थे । लेकिन उसका कार्यादेश नहीं दिया गया ।
प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री कार्यालय व जिला प्रशासन को इस पर मंथन कर यहां कार्य प्रारंभ कराया जाना चाहिए ।
इसी के साथ आना सागर के पानी के निकास के लिए जो पुराना एस्केप चैनल है अनेक स्थानों पर उसपर कब्जा करके उसे सकरा बना दिया गया है व पेंदे में हुए खड्डों पर बिना खुदाई किए सीमेंट कंक्रीट डालकर उसे ऊंचा कर दिया गया है । इसलिए उसमें ज्यादा पानी का बहाव नहीं हो पाता है व उनका पेंदा मकान की नालियों से ऊंचा हो जाने से नालियों का पानी उसमें नहीं जा पाता ,इसकी करीब 3 करोड रुपए की योजना बनाई थी जो अधर में लटकी हुई है । नाले के दोनों तरफ की दीवारों को ऊंची बनाई जानी थी जिससे की बाढ़ आने के अवसर पर ,पानी बाहर आकर बस्तियों में अपना भयानक रूप ना दिखा सके । लेकिन ऐसा नहीं किया गया ।
इसी के साथ करीब 100 साल पुराना ड्रेनेज सिस्टम जो सही व्यवस्थित रूप से बना हुआ था ,उसकी देखभाल नहीं की गई वह उसमें से कचरा मलवा डाला जाता रहा,उसे खाली नहीं कराया गया । इससे वह सभी बड़े-बड़े नाले बंद हो गए वह उनके ऊपर जगह-जगह अतिक्रमण हो गए । स्मार्ट सिटी योजना के तहत इन सब पुराने (जो अजमेर के आकार को देखकर बहुत ही व्यवस्थित रूप से बनाए गए थे) उनका पुनरुद्धार कराया जाना चाहिए था तो आज यह हालत नहीं होते । लौंगिया बाबूगढ़, लाखन कोटडी आदि स्थानों का पानी करीब 15 फीट चौड़े नाले के माध्यम से पानी का निकास होता था , उन्हें डेढ़ दो फीट चौड़ा बना दिया गया वह उनका मूल आकार समाप्त कर दिया गया व उनके ऊपर कब्जा हो गया ।
फाई सागर से चलने वाली चादर का पानी बाड़ी नदी के करीब 7 किलोमीटर रास्ते से जाकर आना सागर में मिलता था बाड़ी नदी को मलबे से भराव करके छोटा कर दिया वह प्रशासन की मिली भगत से भूमाफियाओं ने यहां पर कॉलोनी काटकर ,मकान बनवा दिए व वह सभी अवैध निर्माण तोड़ने के योग्य हैं । जिला व नगर निगम प्रशासन उन्हें चिन्हित करके छोड़ देता है वह तोड़ता नहीं ।
चौरसियावास तालाब से काजी का नाला व अन्य नालों के माध्यम से जो पानी आना सागर में आकर मिलता था उन सभी नालों को छोटा करके उन पर कब्जा करवा दिया गया ।
जिला प्रशासन, अजमेर विकास प्राधिकरण व नगर निगम, अजमेर की मिली भगत से हुए सभी कार्यों का खामियांना आज अजमेर की पूरी जनता भुगत रही है ।
माननीय आज भी हम जब तक विश्रामस्थली, पाथवे, जी माल, अनेक कांप्लेक्स, समारोह स्थल, रेस्टोरेंट, अनेक फॉर्म हाऊस व दुकान मकान आदि को तोड़कर आना सागर के मूल रूप में शामिल नहीं करेंगे तो बरसात का पानी इसी प्रकार अजमेर के निवासीयो को तबाह करता रहेगा ।
धर्मेश जैन
पूर्व अध्यक्ष,
नगर सुधार न्यास, अजमेर
मो. 9414227510