आत्मा में रमना ही उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म : विक्रांत शास्त्री

दशलक्षण पर्व के अंतिम दिन वासुपूज्य भगवान का मोक्ष कल्याणक और अनंत चतुर्दशी पर्व पर विशेष पूजन विधान का आयोजन
अजमेर। जैन धर्म के प्रमुख पर्व दशलक्षण महापर्व के अंतिम दिन शुक्रवार को उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म, वासुपूज्य भगवान के मोक्ष कल्याणक एवं अनंत चतुर्दशी का पर्व ऋषभायतन अध्यात्मधाम सहित शहर के विभिन्न जिनालयों में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। श्रावक-श्राविकाओं ने पूजा-अर्चना, विधान, उपवास एवं व्रत के माध्यम से धर्म आराधना की।
ऋषभायतन अध्यात्मधाम के अध्यक्ष नरेश लुहाड़िया ने बताया कि सुबह जिनालय परिसर स्थित मानस्तंभ की प्रतिमाओं का विशेष जिनेंद्र अभिषेक किया गया। इसके बाद दोनों  मंजिल पर जिनालय में करीब 150 श्रावकों ने जिनेंद्र अभिषेक किया। सामूहिक रूप से नित्य-नियम पूजन, देव-शास्त्र-गुरु पूजन, सोलह कारण पूजन एवं रत्नत्रय पूजन किया गया। वासुपूज्य भगवान के मोक्ष कल्याणक के अवसर पर विशेष पूजन कर मंडल पर अर्घ्य समर्पित किए गए।
दशलक्षण धर्म विधान के तहत उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की विशेष पूजा, अर्घ्य समर्पण एवं विश्व शांति पाठ का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में करीब 500 श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लिया। ट्रस्टी विनय चंद एवं श्रेणिक लुहाड़िया ने बताया कि पूजन कार्यक्रम पंडित सुनील धवल भोपाल, मेघा लुहाड़िया एवं अल्का पाटनी के मधुर स्वरों में सम्पन्न हुआ।
विषयों से विरक्ति, आत्मा में अनुरक्ति ही ब्रह्मचर्य
प्रवक्ता विजय पांडया ने बताया कि पूजन के बाद शोलापुर से आए पंडित विक्रांत शास्त्री ने उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि “पर से मन हटाकर निज आत्मा में रमना ही ब्रह्मचर्य है।” उन्होंने कहा कि ब्रह्मचर्य केवल इंद्रियों पर नियंत्रण का नाम नहीं, बल्कि मन, वचन और शरीर को विषय-वासनाओं से हटाकर आत्मचिंतन में लगाने का नाम है।
उन्होंने कहा कि संसार के विषयों में सुख तलाशने वाला मन बाहरी आकर्षणों में भटकता रहता है। जब वही मन आत्मा के स्वरूप को जानने और उसमें रमने लगता है, तभी ब्रह्मचर्य धर्म का वास्तविक पालन होता है। विषयों का सुख क्षणिक है, जबकि आत्मिक सुख शाश्वत है। इंद्रिय-संयम से मन निर्मल होता है और आत्मचिंतन से ब्रह्मचर्य सार्थक होता है।
उन्होंने कहा कि उत्तम ब्रह्मचर्य हमें विषयों से विरक्ति और आत्मा के प्रति अनुरक्ति का संदेश देता है।
27 सितंबर को क्षमावाणी पर्व
मंत्री मनोज कासलीवाल ने बताया कि 27 सितंबर को सुबह 7:30 बजे से क्षमावाणी पर्व मनाया जाएगा। इस अवसर पर जिनेंद्र अभिषेक, नित्य-नियम पूजन, क्षमावाणी पूजन एवं विशेष क्षमावाणी कलशाभिषेक होंगे। इसके बाद सभी श्रावक-श्राविकाएं सामूहिक रूप से क्षमावाणी पर्व मनाएंगे।
विजय जैन पांडया

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