सांझी केवल कला नहीं, ब्रजभाव की साधना और आराधना की उत्तम पद्धति — उमेश गर्ग

सूखे रंगों और पुष्पों से साकार की भगवान की लीलाएं, पूजन-अर्चन एवं आरती के साथ मनाया सांझी उत्सव

अजमेर, 7 अक्टूबर 2026।
लोक पर्व एवं संस्कृति सागर, गर्ग भवन सुंदर विलास अजमेर द्वारा गत वर्षों की भांति इस वर्ष भी ब्रजभाव एवं कृष्ण प्रेम को समर्पित सांझी उत्सव श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर सूखे रंगों एवं विभिन्न प्रकार के पुष्पों से भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का मनोहारी चित्रण किया गया तथा भगवान की भव्य झांकी सजाकर विधिवत पूजन एवं आरती की गई।

संस्था के अध्यक्ष उमेश गर्ग ने कहा कि “सांझी केवल कला नहीं, बल्कि ब्रजभाव की साधना और आराधना की उत्तम पद्धति है। यह विरह और प्रेम का पर्व है, जिसमें कला के माध्यम से भक्त अपने आराध्य के प्रति प्रेम और समर्पण को अभिव्यक्त करता है।”

उन्होंने कहा कि सांझी में सजे हर फूल के पीछे एक भाव, हर रंग में ब्रज की एक लीला और हर आकृति में श्री राधा-कृष्ण एवं ब्रजभूमि के प्रति प्रेम छिपा होता है। चौदह दिनों तक की जाने वाली यह साधना चौदह लोकों के नायक श्री प्रभु की प्राप्ति के भाव से जुड़ी मानी जाती है।

ब्रज की गोपिकाओं की भक्ति, श्री स्वामिनीजी का प्रेम और यमुनाजी का पावन भाव—सांझी के विभिन्न स्वरूपों में सहज रूप से झलकता है। यही सांझी की विशेषता है कि इसमें कला भक्ति का रूप ले लेती है और सजावट साधना बन जाती है।

उमेश गर्ग ने कहा कि सांझी जैसे लोकपर्व हमारी समृद्ध ब्रज संस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिक भावनाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। ऐसे आयोजनों से कला, संस्कृति और भक्ति के साथ समाज में अपनी परंपराओं के प्रति जुड़ाव भी मजबूत होता है।

उमेश गर्ग
अध्यक्ष
लोक पर्व एवं संस्कृति सागर
गर्ग भवन, सुंदर विलास, अजमेर

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