*सुख और दुख की परिस्थितियों में समभाव की साधना करें: गुरुदेव श्री सौम्यदर्शन मुनि*
गुरुदेव श्री सौम्यदर्शन मुनि जी महारासा में फरमाया कि 24 तीर्थंकर भगवान में आठवें तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभ जी थे। उनके नाम से ही बड़ी प्यारी प्रेरणा मिलती है कि, जैसे सूर्य की गर्मी कितनी भी तेज क्यों न पड़े चंद्रमा उस गर्मी से तपता नहीं है। वह तो शीतल बना रहता है। इसी प्रकार जीवन … Read more