नई दिल्ली। रेलमंत्री पवन कुमार बंसल ने रेल किरायों में निकट भविष्य में और वृद्धि से इंकार किया है। उन्होंने यह भरोसा राज्यसभा में रेल बजट 2013-14 पर चर्चा के जवाब में दिया। इसी के साथ राज्यसभा ने रेल बजट पारित कर दिया। लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है।
रेलमंत्री ने कहा कि रेलवे पर सब्सिडी का बोझ बढ़कर 25 हजार करोड़ रुपये हो गया है। इसीलिए रेल बजट से पहले किराये और बाद में आरक्षण व निरस्तीकरण शुल्क बढ़ाए गए। लेकिन मैं रेल किरायों में और किसी वृद्धि का संकेत नहीं दे रहा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आरक्षण व निरस्तीकरण शुल्क दलालों पर अंकुश लगाने के लिए बढ़ाए गए। विदेश में तो टिकट निरस्त कराने पर तीन गुना तक शुल्क देना पड़ता है। अब भी सेकेंड क्लास में ये शुल्क अपरिवर्तित रखे गए हैं। दलालों पर अंकुश लगाने के लिए और भी प्रयास किए जा रहे हैं। इनमें मोबाइल पर रिजर्वेशन सुविधा देने का प्रयास शामिल है। इस पर भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआइडीएआइ) के अध्यक्ष नंदन नीलेकणि के साथ दो बैठकें हुई हैं। हमारा प्रयास आरक्षण में ‘आधार’ को अनिवार्य करने का है।
बजट पूर्व किराया वृद्धि पर बंसल ने कहा कि कहने को किराये 25 फीसद तक बढ़ गए हैं, यानी आठ की जगह दस रुपये। लेकिन अब भी निचली क्लास के किराये कम हैं। इसलिए यह कहना खेदजनक है कि चोरी से जेब काट दी गई। उन्होंने कहा कि किराये बढ़ाने से 6,600 करोड़ आने का अनुमान था। लेकिन डीजल की थोक कीमतें 10.80 रुपये प्रति लीटर बढ़ने से 3,300 करोड़ उसमें चले गए। बिजली दरों में वृद्धि को मिला दें तो रेलवे के ईधन खर्च में पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसीलिए माल भाड़ों को ईधन की कीमत से जोड़ना पड़ा। सीधे मालभाड़े बढ़ाते तो ट्रकों के मुकाबले पिछड़ने का खतरा और बढ़ता। पहले ही रेलवे की हिस्सेदारी 80 से 36 फीसद पर आ गई है।
उन्होंने कहा कि मैं सदस्यों की इस बात से सहमत हूं कि रेलवे को पूरी तरह वाणिज्यिक प्रतिष्ठान नहीं माना जाना चाहिए। बसों से अभी भी रेलवे बहुत सस्ती है। इस लिहाज से वह सामाजिक दायित्व बखूबी निभा रही है। हमने दस साल बाद किराये बढ़ाए जिस पर ज्यादातर लोगों की सहमति थी। वैसे भी रेलवे का ऑपरेटिंग रेशियो 80 फीसद होना चाहिए। यानी 100 रुपये की कमाई पर 80 रुपये खर्च हों और नई लाइनों, विद्युतीकरण वगैरह के लिए बीस रुपये बचें। मगर वर्ष 2011-12 में ऑपरेटिंग रेशियो 94.7 फीसद पर पहुंच गया था, जिसे इस साल 88.8 फीसद पर लाए हैं। अगले साल 87.8 फीसद पर लाने का इरादा है।
रेलमंत्री का कहना था कि कहने को रेलवे के पास दस लाख एकड़ फालतू जमीन है, लेकिन इसमें आठ लाख एकड़ लाइनों के दोनों ओर है जो भविष्य के विस्तार के लिए जरूरी है। बाकी 1.10 लाख एकड़ में वन हैं। इसके अलावा 2,000 एकड़ भूमि अतिक्रमण का शिकार है। इसे मुक्त कराने के लिए बहुमंजिला मकान बनाने का प्रस्ताव है। जो जमीन वास्तव में खाली है उसके 136 प्लाट आरएलडीए को वाणिज्यिक विकास के लिए दिए गए हैं। प्रस्तावित रेलवे टैरिफ अथॉरिटी के बाबत सदस्यों की चिंता पर बंसल ने कहा कि उसकी सिफारिशें संसद के अनुमोदन के बगैर लागू नहीं होंगी।