कविता में पिरोया गीता का सार-सुरेन्द्र दुबे का कमाल
आमतौर पर कविताओं में तुकबंदी का बोलबाला होता है, जो कवि जितनी तुकबंदी कर देता है, वह उतना ही प्रसिद्ध हो जाता है। वैसे भी अब टीवी संस्कृति के कारण कवि और कविताओं का महत्त्व लगातार घट रहा है। अब पहले की तरह बड़े-बड़े कवि सम्मेलन भी नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में कवि … Read more