सोशल मीडिया- समाज के हाथ में नया हथियार

-अरविन्द विद्रोही- मेरे नजरिए से सोशल मीडिया समाज के लिए एक हथियार व समाज के अधिसंख्य मठाधीशों- प्रभावी लोगों के लिए अभिशाप बनकर उभरा है। सोशल मीडिया के दस्तक काल में स्थापित मीडिया (प्रिंट-इलेक्ट्रॉनिक ) के तमाम स्वनामधन्य सम्पादकों/ पत्रकारों/ मठाधीशों ने इसके महत्व को नाकारा था। सच कहें तो वे समझ ही नहीं पाये … Read more

जनता को ज्यादा दिनों तक बरगलाया नहीं जा सकता

-आलोक कुमार- दिल्ली का विधानसभा चुनाव इस बार पूरी तरह से चौंकाने वाले परिणामों से भरा रहा। यहां दो परम्परागत राजनैतिक दलों को सबसे बड़ी चुनावी चुनौती मिली वो भी एक ऐसी पार्टी से जो मात्र एक वर्ष पुरानी है। जनता ने ‘‘भाजपा’’ और ‘‘आप’’ को मिश्रित समर्थन दिया। भाजपा को 32 सीटें, ‘‘आप’’ को … Read more

भाजपा विधायकों में सत्ता और संगठन के बीच की गहरी खाई

राज्यपाल मार्ग्रेट आल्वा के अधूरा अभिभाषण पढने पर भाजपा विधायकों में ही सत्ता और संगठन के बीच की गहरी खांई नजर आई। विधानसभा चुनावों में भाजपा को मिली भारी सफलता के बाद ऐसा लग रहा था, कि भाजपा सत्ता संगठन की दृष्टि से एकजूट है। लेकिन जैसे ही राज्यपाल को अभिभाषण बगैर पढे उसे पढा … Read more

तुम मुझे वोट दो, मैं तुम्हें गुजरात दूंगा

-संजय तिवारी- अब बात साफ साफ है। सीधे सीधे। लोकतंत्र की मजबूती और आदर्श विचारधारा जैसी कोई बात नहीं। पार्टी भी शायद किनारे कर दी गई है। बात सीधे सीधे जनता और मोदी के बीच है। दिल्ली के रामलीला मैदान से मोदी ने अपना रुख पूरी तरह बदल दिया है। अभी तक पार्टी के नाम पर … Read more

भंग करो अदालतें, फैसला करेंगे केजरीवाल !

-अभिरंजन कुमार- अपने कोढ़ को ही कैसे अपना आभूषण बना लिया जाये- यह कोई केजरी भाई से सीखे। अपने मन्त्री सोमनाथ भारती की नालायकी से ध्यान बँटाने के लिये उन्होंने लोकलुभावन मुद्दों की ऐसी नौटंकी तैयार की है कि हाशिये पर पड़ी जनता, सिस्टम और पुलिस से नाराज़ जनता बिना आगा-पीछा सोचे उन्हें क्रांति का फरिश्ता … Read more

सुनंदा थरूर की जान ट्विटर ने तो नहीं ली ?

-इक़बाल हिंदुस्तानी- सोशल नेटवर्किंग दोधारी तलवार है, सोच-समझकर चलाना होगा! जिस तरह से चाकू बदमाश के हाथ में हो तो वह किसी की जान ले लेता है और वही चाकू डॉक्टर हाथ में आ जाये तो किसी मरीज़ की जान बचा लेता है, वैसे ही इंटरनेट के भी फायदों के साथ दुरुपयोग के नुक़सान मौजूद हैं लेकिन … Read more

‘आप’ अब ‘आम आदमी’ पार्टी नहीं रही

-नीरज वर्मा- कोई इंसान व्यक्तिगत तौर पर ईमानदार है, इस बात का महत्व है ! मगर सार्वजनिक जीवन में निजी  ईमानदारी तभी मायने रखती जब उसका उपयोग सार्वजनिक जीवन में हो ! लेकिन अरविन्द केजरीवाल और उनकी “आप” यहां पर विभाजन रेखा खींच बैठे हैं ! शुरूआत शीला दीक्षित से करते हैं! ये वही शीला जी … Read more

गुरू गोलवलकर को त्याग दिया मोदी ने

-एल.एस. हरदेनिया- पिछले रविवार (12 जनवरी 2014) को गोवा में एक आमसभा को संबोधित करते हुये गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आरोप लगाया कि केन्द्र की वर्तमान सरकार हमारे देश के संघीय ढाँचे को कमजोर कर रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केन्द्र सरकार, राज्य के मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप करती है। उन्होंने यह आश्वासन … Read more

उत्तर प्रदेश में आप के सामने ” झाड़ू” का झगड़ा

दिल्ली में अप्रत्याशित सफलता के बाद देश खासकर यूपी में पार्टी के विस्तार की सम्भावना देख रही आम आदमी पार्टी (आप ) के रास्ते में पहला रोड़ा चुनाव चिन्ह झाड़ू के लिए ही होगा चुनाव तो बाद में।  दरअसल, चुनाव आयोग में सिर्फ पंजीकृत नैतिक पार्टी ने पिछला विधान सभा चुनाव कई सीटों पर लड़ा … Read more

विनोद बिन्नी ने बगावत क्यों की?

–संजय तिवारी– बात तब की है जब जंतर मंतर से राजनीतिक पार्टी लेकर उठे अरविन्द केजरीवाल दिल्ली में जगह जगह बैठकें कर रहे थे। भ्रष्टाचार के खिलाफ राजनीतिक लड़ाई में तब विनोद कुमार बिन्नी ही उनके एकमात्र अनुभवी जमीनी ‘सिपहसालार’ होते थे। उनका अनुभव यह था कि वे 2006 से लगातार निगम पार्षद का चुनाव जीत … Read more

‘आप’ की बढ़ती लोकप्रियता से मोदी के ‘मतवाले’ बेचैन!

दिल्ली की चुनावी जीत से राजनीतिक ऊर्जा लेकर आम आदमी पार्टी (आप) के हौसले एकदम बढ़ गए हैं। इस पार्टी ने लोकसभा चुनाव में कारगर राजनीतिक हस्तक्षेप का लक्ष्य बनाया है। इसी के तहत ये नवोदित पार्टी तेजी से अपना राजनीतिक दायरा बढ़ाने में जुट गई है। उसकी कोशिश है कि विभिन्न क्षेत्रों के तमाम … Read more

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