जो शब्दों से सेतु बनाता रहे- प्रो. चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ : एक शांत साधक की उज्ज्वल विरासत

कुछ व्यक्तित्व समय के साथ समाप्त नहीं होते, वे समय का ही हिस्सा बन जाते हैं। उनका जीवन एक तिथि में सिमट सकता है, पर उनकी उपस्थिति नहीं। वे अपनी रचनाओं, अपने विचारों और अपने आदर्शों के रूप में पीढ़ियों तक संवाद करते रहते हैं। प्रो. चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ ऐसे ही साहित्य-मनीषी थे। वे … Read more

उलटबाँसी काकरोच गंदगी पैदा नहीं करते, वे केवल वहाँ होते हैं जहाँ गंदगी होती है

सुनो साधो! मैंने कहा— “कहो कबीर!” कबीर बोले— “जल्दी कहो। मुझे अपनी सुनाने जंतर-मंतर जाना है।” मैं चौंका— “अपनी सुनाने? तुम तो लोगों की सुनते थे।” कबीर हँसे— “वह पुराना ज़माना था। अब सुनने वाला कौन है? आजकल सब अपनी-अपनी सुनाने में लगे हैं। मैं ही था जो सबकी सुन लेता था। अब सरकार के … Read more

जल संकट का असंतुलित प्रबंधन: अस्तित्व पर मंडराता खतरा

जल केवल प्रकृति का उपहार नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के अस्तित्व का आधार है। पृथ्वी पर जीवन की कल्पना जल के बिना असंभव है, फिर भी विडंबना यह है कि जिस जल को हमारी संस्कृति ने देवत्व प्रदान किया, उसी जल के प्रति हमारा व्यवहार सबसे अधिक लापरवाह रहा है। आज देश और दुनिया की … Read more

स्व-देखभालः स्वस्थ व्यक्ति से विश्वकल्याण की भारतीय दृष्टि

अंतर्राष्ट्रीय स्व-देखभाल दिवस (24 जुलाई) पर विशेष मानव सभ्यता के विकास के इस दौर में जितनी तीव्र गति से विज्ञान, तकनीक और भौतिक संसाधनों का विस्तार हुआ है, उतनी ही तेजी से मनुष्य तनाव, अवसाद, असंतुलित जीवनशैली और अनेक नई बीमारियों के जाल में भी उलझता गया है। विडम्बना यह है कि आज मनुष्य के … Read more

सियासत संवरती है आंदोलनों से और डरती भी उन्हीं से है

देश में आंदोलन है। आंदोलन में छात्र हैं। छात्र एग्जाम देते हैं। एग्जाम में पेपर लीक हो जाते हैं। सो, गुस्सा वाजिब है। सवाल नीट का एग्जाम देने वाले 22 लाख छात्रों की मेहनत का था। भविष्य सवालों में था और व्यवस्था कठघरे में। तो, सरकार ने तत्काल कठघरे से निकलने के लिए अच्छी व्यवस्था … Read more

” हमारी यह पेंशन “

देकर अपनी जवानी के बहुमूल्य वो सारे पल खरीदीं है हमने थोड़ी सी सरकार की पेंशन, वृद्ध अवस्था में अपने चाहे साथ दे या ना दे हमें भूखें रखते नहीं कभी, हमारी यह पेंशन। दुनियां चाहे जो भी कहे पेंशन के बारे में पर पेंशन धारकों के लिए सर का ताज है पेंशन, औरों के … Read more

चातुर्मास द्वार है आत्मोन्नति और जीवन-परिवर्तन का

भारत की आध्यात्मिक परम्पराओं ने मानव जीवन को केवल भौतिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं माना, बल्कि उसे आत्मबोध, चरित्र-निर्माण और चेतना के उत्कर्ष की यात्रा के रूप में देखा है। इसी दृष्टि का एक अद्वितीय और कालजयी उपहार है चातुर्मास। यह केवल चार महीनों का धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मा के परिष्कार, मन के अनुशासन, … Read more

डर का टूटा बाँध

जंतर मंतर पर युवाओं का अहिंसक आक्रोश, आदेशों की अनुपालना में लाठियों का प्रहार, सत्ता का ढहता मद, प्रधान चेहरों की सघन सलवटें, संसद का शोर और सड़क का आह्वान.. महज मंत्री के इस्तीफे की माँग या पेपर लीक की तात्कालिक प्रतीकात्मकता वजह भले ही रही हो, लेकिन इसके मूल में लंबे समय से अनिश्चित … Read more

चातुर्मास 29 जुलाई से, संयम और संस्कारों से जुड़ेगा समाज

चार माह तक एक ही स्थान पर रहकर जनजागरण करेंगे जैन साधु-साध्वी 21 जुलाई 2026 / जैन धर्म का सर्वाधिक महत्वपूर्ण साधना काल चातुर्मास इस वर्ष 29 जुलाई से प्रारंभ होगा। वर्षा ऋतु के चार महीनों में जैन साधु-साध्वियाँ एक ही स्थान पर निवास कर आत्मसाधना, स्वाध्याय, प्रवचन, तप, त्याग एवं धर्मप्रभावना के माध्यम से समाज … Read more

स्मार्ट सिटी की योजना की घोषणा से जितना अजमेर वासी खुशी हुई थे अब उससे कहीं ज्यादा दुखी

शहर में आई बिना उपयोगी सीमेंट कंक्रीट व लोहे से हुए निर्माण की बाढ़,सुविधाओं के नाम पर पहले के मुकाबले दुगनी हुई असुविधा  मुझे याद है जब अमेरिका के राष्ट्रपति ने अजमेर में सीधे #सचिन_पायलट से फोन पर बात की थी वह उसके बाद अजमेर को पूरे भारत में सबसे पहले अमेरिका के सहयोग से … Read more

विक्रम-1ः नए भारत की अंतरिक्ष उड़ान का स्वर्णिम अध्याय

भारत ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया है कि यदि संकल्प, वैज्ञानिक दृष्टि और नवाचार का संगम हो तो आकाश भी सीमा नहीं, बल्कि संभावनाओं का प्रारंभ बन जाता है। भारत के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-1’ का सफल प्रक्षेपण केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत, नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था और विज्ञान-प्रधान भविष्य … Read more

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