जो शब्दों से सेतु बनाता रहे- प्रो. चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ : एक शांत साधक की उज्ज्वल विरासत
कुछ व्यक्तित्व समय के साथ समाप्त नहीं होते, वे समय का ही हिस्सा बन जाते हैं। उनका जीवन एक तिथि में सिमट सकता है, पर उनकी उपस्थिति नहीं। वे अपनी रचनाओं, अपने विचारों और अपने आदर्शों के रूप में पीढ़ियों तक संवाद करते रहते हैं। प्रो. चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ ऐसे ही साहित्य-मनीषी थे। वे … Read more