संगीत है शांति, सुकून एवं आनन्द का सशक्त माध्यम

विश्व संगीत दिवस- 21 जून 2024 संगीत मानव जगत को ईश्वर का एक अनुपम दैवीय वरदान है। यह न सरहदों में कैद होता है और न भाषा में बंधता है। माना हर देश की भाषा, पहनावा और खानपान भले ही अलग हों, लेकिन हर देश के संगीत में सभी सात सुर एक जैसे होते हैं … Read more

योग सशक्त माध्यम है महिला सशक्तीकरण एवं शांति का

अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस, 21 जून, 2024 पर विशेष मनुष्य के सम्मुख युद्ध, महामारी, महंगाई, बेरोजगारी, प्रतिस्पर्धा के कारण जीवन का संकट खड़ा है। मानसिक संतुलन अस्त-व्यस्त हो रहा है। मानसिक संतुलन का अर्थ है विभिन्न परिस्थितियों में तालमेल स्थापित करना, जिसका सशक्त एवं प्रभावी माध्यम योग ही है। योग एक ऐसी तकनीक है, एक विज्ञान … Read more

हिन्दुस्तान के वासी हैं

सीमाओं की रक्षक है दुश्मनों के दुश्मन है, डरते नहीं ये मौत से कभी हिन्दुस्तान की शान हैं गोरखा। अक्सर ज़ंग के मैदान में प्रथम पंक्ति में खड़े रहते है, बेहिसाब दुश्मनों को मारकर अंतिम सांस तक लड़ते हैं गोरखा। ईंट का जवाब पत्थर से देते है ज़ंगी मैदान से भागते नही है, अपने बलिदान … Read more

**योग दिवस**

योग दिवस पर करें योग का हम सब मिल सत्कार। हर आसन ही करे जीवनी शक्ति का संचार। सूरज के संग संग उठ जाएं सूर्य नमन कर लें। प्राणायाम करें प्राणों में नव उमंग भर लें। ताड़ासन से मिले ताड़ सा बढ़ने का संस्कार। योग दिवस पर करें योग का …………… भुजंग आसन की मुद्रा, … Read more

नज़र वो भी नहीं आते जो करीब होते हैं

*वक्त* के सितम भी अजीब होते हैं नजर वो भी नहीं आते जो करीब होते हैं जिंदगी के जो हादसे समझ नहीं आते दरअसल वो हमारे नसीब होते हैं सिर्फ रुपए पैसे से जो अमीर होते हैं हकीकतन उनमें से कई बड़े गरीब होते हैं मतलबी दुनिया में जो वफा तलाशते हैं वो बड़े बदनसीब … Read more

*इंकार और स्वीकार के फेर में भाई-बहन*

*राहुल का लीडर ऑफ अपोजिशन बनने से मना करना और प्रियंका का वायनाड़ से चुनाव लड़ने की हां करने के मायने* *कांग्रेस एक बार फिर मौका चूक रही है। राहुल गांधी के लोकसभा में विपक्ष का नेता बनने से लगभग इंकार करने और प्रियंका गांधी के वायनाड़ से चुनाव लड़ने की मंजूरी,दो ऐसे कारण हैं,जिनसे … Read more

बहारें लौटकर फिर आती है

*कभी* हंसाती है जिंदगी तो कभी रुलाती है न जाने ये कैसे कैसे गुल खिलाती है। पतझड़ का मातम नहीं मनाता गुलशन मत भूल बहारें लौटकर फिर आती है। मंजिल ढूंढने वाले राही याद ये रखना कॉटों भरी डगर मंजिल का पता बताती है। सपने बुनते हैं तो सांसें खिलती हैं जिंदगी में सपनों का … Read more

भारत में लैंगिक असमानता की बढ़ती खाई

विश्व आर्थिक मंच द्वारा हाल में प्रस्तुत किये गए लैंगिक अंतर के आंकड़ों ने एक ज्वलंत प्रश्न खड़ा किया है कि शिक्षा, आय, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में आधी दुनिया को उसका हक क्यों नहीं मिल पा रहा है? निस्संदेह, हमारे सत्ताधीशों को सोचना चाहिए कि लैंगिक अंतर सूचकांक में भारत 146 देशों में 129वें … Read more

फिर आतंकी हमलें, कायम हो शांति का उजाला

यह आशंका सच साबित हो रही है कि भाजपा को पूर्ण बहुमत न मिलने पर कश्मीर में आतंकी घटनाएं बढ़ेंगी एवं पाकिस्तान पोषित आतंकवाद फिर से फन उठाने लगेगा। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद हुए पहले लोकसभा चुनाव में रिकॉर्ड मतदान से पाकिस्तान बौखलाया है। इसी का परिणाम है लगातार हो रहे … Read more

*विधानसभा उपचुनाव तक सलामत रहेंगे मुख्यमंत्री भजनलाल*

*तीसरी चुनावी परीक्षा में भी सफल नहीं हुए तो कुर्सी होगी संकट में,बड़े फैसले लेने में जुटे* *राजस्थान में लोकसभा चुनाव में भाजपा को मिली भारी शिकस्त के बाद भी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के पद को अगले 6 महीने कोई खतरा नजर नहीं आता है। ऐसा इसलिए,क्योंकि इन छह महीनों में राजस्थान में पांच विधानसभा … Read more

पितृ दिवस पर मेरी कविता : पिता तो पिता है

पिता तो पिता है पिता देवता है, संकट हरण करने वाले पालनकर्ता पिता है। पिता परिवार का बहुमूल्य कवच है पिता इज्ज़त को ढांकने वाली चमत्कार है, पिता का कोई विकल्प नहीं पिता तो पिता है। पिता में कड़वापन का औषधि है पिता में अपनापन का खजाना है, पिता जैसा कोई स्तंभ नही पिता तो … Read more

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