ददू हैं ना

एक वाक्या याद आ गया, सोचा रविवार की चर्चा में आपसे कुछ कहूँ। विधानसभा चुनाव का माहौल, क्या होगा पता नहीं, बागीयो के स्वर बुलंद थे, कई दलबदलू और पुराने भाजपा कार्यकर्ताओं ने बगावत का स्वर अपना लिया था । व्यापारी वर्ग हो या कुछ वार्ड के कार्यकर्ता भाईसाहब के खिलाफ थे, बार बार जब … Read more

पिता-पुत्र के संबंधों की संस्कृति को जीवंत बनाएं

किसी के भी जीवन में पिता की क्या भूमिका होती है, इसे शब्दों में बयां करने की भी जरूरत नहीं है। पिता हर संतान के लिए एक प्रेरणा हैं, एक प्रकाश हैं और संवेदनाओं के पुंज हैं। इसके महत्व को दर्शाने और पिता व पिता तुल्य व्यक्तियों के योगदान को सम्मान देने के लिए हर … Read more

*कविता- भूला दिया जाएगा*

वह नाम का ग़ुरूर जो आवाज़ से झलकता था फ़्लैट का नम्बर बनकर लिफ़्ट की सीढ़ियाँ चढ़ते हुए सीढ़ियों का अर्थ भूल चुका है वह नीम का पेड़ जिसे छोड़ आया था अपने पुराने घर के पास खिड़की में झूलती एक गमलेनुमा टोकरी से दीवारों के भीतर झाँकने की कोशिश रहा है वह आँगन की … Read more

संतानों के दुर्व्यवहार एवं उत्पीड़न से जटिल होती वृद्धावस्था

विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस – 15 जून, 2024 देश ही नहीं, दुनिया में वृद्धों के साथ दुर्व्यवहार, प्रताड़ना, हिंसा बढ़ती जा रही है, जो जीवन को नरक बनाये हुए है। बच्चे अपने माता-पिता के साथ बिल्कुल नहीं रहना चाहते। यही पीड़ा वृद्धजन को पल-पल की घुटन, तनाव एवं उपेक्षा से निकलकर वृद्धाश्रम जाने के … Read more

*कविता- बहुत कम-बहुत अधिक*

बहुत कम पढ़े जाते हैं कहानियाँ, कविताएँ और मनिखेज क़िस्से बहुत अधिक पढ़े जाते हैं अख़बार, इश्तहार और धार्मिक किताबें बहुत कम देखे जाते हैं जंगल, पहाड़ और समंदर बहुत अधिक दिखते हैं इमारतें, रास्ते और सिर बहुत कम होती हैं ज़रूरतें, जिजीविषा और जीवन बहुत अधिक होते हैं भूख, उम्मीदें और मृत कामनाएँ बहुत … Read more

*अहसासु* (नंढी कहाणी)

लेखिका : देवी नागरानी अनुवाद : पदमा गोबिंद मोटवानी “मां केटीअ खे वठी वञी थी सघां?” जुरियत भरियो आवाज़ु बु॒धंदे कंधु खणी मथे निहारियमु। डि॒ठो त साम्हूं ११-१२ वरिह्यनि जी तिखन रोशनि वारी सुहिणी नींगरि बीठी हुई। “तव्हांजो नालो?” “मां टीना आहियां, केटीअ जी भेण, हुन खे वठण आई आहियां।” एतिरो नंढो जवाबु डि॒यण खां … Read more

बाल-श्रम की अंधी गलियों में बेहाल बचपन कब तक?

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस- 12 जून, 2024 पूरी दुनिया में बाल श्रम एक ज्वलंत समस्या है, कैसा विरोधाभास है कि हमारा समाज, सरकार और राजनीतिज्ञ बच्चों को देश का भविष्य बताते हुए नहीं थकते लेकिन क्या इस उम्र के लगभग 25 से 30 करोड़ बच्चों से बाल मजदूरी के जरिए उनका बचपन और उनसे … Read more

बतरस-3 राजनीति में वर्ल्ड कप

पहले वाले माननीय आज बहुत खुश है .. हालाँकि उनकी ख़ुशी में वही रौद्रता है जो उनके ग़ुस्से को बिना बोले बयान करती है। कहने का मतलब उनकी ख़ुशी में भी उनसे उलझना अपने आप को नई उलझन में डालना ही है । दूसरी ओर दूसरे क़िस्म के माननीय विचार मग्न किसी उलझन को सुलझाते … Read more

*आरएसएस प्रमुख की नसीहत क्या भाजपा के लिए मायने रखेगी*

*दोनों के बीच दूरियां मोदी सरकार बनने के बाद बढ़ी है,चुनाव में भी जमीन पर सक्रिय नहीं दिखा था संघ* *क्या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ वाकई में अपने अनुशांगिक राजनीतिक संगठन भारतीय जनता पार्टी से नाराज है? क्या वाकई संघ ने लोकसभा चुनाव में हमेशा की तरह भाजपा के लिए जमीन पर खुलकर कार्य नहीं किया … Read more

तू भी सिकंदर बन सकता है

तकदीर को न कोस कुछ करके भी देख प्यारे कल कुछ भी हो सकता है, तू भी सिकंदर बन सकता है रख खुद पर भरोसा निकल चल राहें मंजिल की जानिब चलते चलते ही मंजिल पा सकता है, तू भी सिकंदर बन सकता है कमी नहीं तुझमें ये तू जान ले बुलंदी पा लेने की … Read more

खानदानी पेशो (नंढी कहाणी)

लेखिका : देवी नागरानी अनुवाद: पदमा गोबिन्द मोटवानी कालीदास ग़लतफ़हमीअ जो मारियो हुओ। पंहिंजो पाण खे घटि दर्जे जो समुझण जे करे पंहिंजी नज़रुनि में किरी पियो। हुन जो पेशो डा॒डे॒ परडा॒ड॒नि पारां मिलयलि विरासत हुई-हू कासाई हुओ। ड॒हों पासि करे, अञां अगि॒ते पढ़ाई करे क़ाबिल थियणु चाहींदो हुओ। अबो॒ल जीवनि जे कांधीअ ते कपु … Read more

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