अजित पवारः आरोपों से ऊपर उठे राजनीति के ‘दादा-पुरुष’

यह खबर केवल एक व्यक्ति के निधन की नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति के एक पूरे युग के अचानक थम जाने की सूचना है। 28 जनवरी 2026 की सुबह जब बारामती में हुए विमान हादसे में उपमुख्यमंत्री अजित अनंतराव पवार के असामयिक निधन की पुष्टि हुई, तो वह क्षण केवल पवार परिवार के लिए … Read more

भरोसे एवं भारत की आवाज थे विरल पत्रकार मार्क टुली

भारत की समकालीन इतिहास-यात्रा में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जो केवल घटनाओं का वृत्तांत नहीं लिखते, बल्कि समय की चेतना में घुल-मिलकर स्वयं इतिहास का हिस्सा बन जाते हैं। सर विलियम मार्क टुली, जिन्हें दुनिया भर में स्नेह और सम्मान से ‘मार्क टुली’ कहा गया, ऐसे ही विरल पत्रकार थे। उनका निधन केवल एक … Read more

भक्तिकाल के समाज सुधारक परम संत गुरु रविदास

भक्ति काल मे स्वामी  रामानंदाचार्य वैष्णव भक्ति धारा के महान संत थे। संत कबीर, संत पीपा, संत धन्ना और संत रविदास उनके शिष्य थे। संत रविदास तो संत कबीर के समकालीन व गुरु भाई माने जाते हैं।  संत रविदास ने ऐसे समाज की कल्पना क थी  जहां किसी भी प्रकार का लोभ, लालच, दुख, दरिद्रता, … Read more

हैप्पी गणतंत्र दिवस। देश खुशहाल होंगे।

भाईचारे के पौधे दिल में उगाएंगे तब ही यह देश खुशहाल होंगे, जब हिन्दू, मुसलमान एक होंगे तब ही यह देश खुशहाल होंगे। गिले-शिकवे सभी भुलाकर एक दूसरे से गले मिलाकर जब धर्म-मजहब का सम्मान करेंगे, तब ही यह देश खुशहाल होंगे। मंदिर के ढ़हाया जाने पर मुसलमान मस्जिद के ढ़हाया जाने पर हिन्दू जब … Read more

गणतंत्र का गौरव और राष्ट्र निर्माण की चुनौतियाँ (77 वें गणतंत्र दिवस पर विशेष आलेख)

जब किसी देश की पहचान उसके शासकों से नहीं, बल्कि उसके नागरिकों के अधिकारों, कर्तव्यों और संविधान से होने लगे, तब वह देश गणतांत्रिक देश की श्रेणी में आ जाता है। एक ऐसा राष्ट्र जहां पर कानून व्यक्ति से ऊपर हो, और व्यवस्था जनता की इच्छा से संचालित हो, वहीं सच्चे लोकतंत्र और गणतंत्र की … Read more

26 जनवरी गणतंत्र दिवस : संवैधानिक मूल्य: गणतंत्र की आत्मा और नागरिक दायित्व

-बाबूलाल नागा    भारतीय संविधान केवल शासन चलाने का दस्तावेज नहीं, बल्कि एक जीवंत दर्शन है, जो देश की आत्मा, उसकी चेतना और दिशा—तीनों को परिभाषित करता है। संविधान की उद्देशिका में निहित स्वतंत्रता, समता, समानता, बंधुता, संप्रभुता, समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र जैसे मूल्य पूरे संविधान की वैचारिक रीढ़ हैं। ये मूल्य “हम भारत के लोग” द्वारा स्वयं को दी गई वह सामूहिक प्रतिबद्धता हैं, जो प्रत्येक … Read more

प्रजातंत्र (लोकतंत्र) और गणतन्त्र एवं भारतीय संविधान

क्या गणतन्त्र और प्रजातंत्र एक ही है या उनमें अंतर है ? यदि अंतर है तो गणतन्त्र और प्रजातंत्र में अंतर और क्या अंतर है ? वास्तविकता में जहाँ गणतंत्र में संविधान सर्वोच्च होता है वहीं प्रजातंत्र में जनता सर्वोच्च होती है । गणतंत्र में विधि का विधान यानि कानून काराज्य होता है तो प्रजातंत्र … Read more

25 जनवरी राष्ट्रीय मतदाता दिवस : लोकतंत्र की असली ताकत: जागरूक मतदाता

-बाबूलाल नागा भारत में राष्ट्रीय मतदाता दिवस प्रत्येक वर्ष 25 जनवरी को मनाया जाता है। विश्व में भारत जैसे सबसे बड़े लोकतंत्र में मतदान को लेकर कम होते रुझान को देखते हुए राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाने लगा था। पहली बार इसे वर्ष 2011 में मनाया गया। मतदान दिवस मनाने का मुख्य कारण है कि लोगो को मतदान का … Read more

राष्ट्रीय मतदाता दिवस: लोकतंत्र की शक्ति और मताधिकार का महत्व

(‘राष्ट्रीय मतदाता दिवस’, 25 जनवरी 2026 पर विशेष आलेख) भारत में राष्ट्रीय मतदाता दिवस प्रत्येक वर्ष 25 जनवरी को मनाया जाता है। यह दिवस देश के हर नागरिक के लिए अत्यंत अहम है। यह दिन देशवासियों के लिये केवल एक औपचारिक दिन नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा को स्मरण करने का अवसर है। इस दिन … Read more

दुनिया जल के वैश्विक दिवालियापन की ओर बढ़ रही है

“जल है तो जीवन है”-यह पंक्ति कोई नारा भर नहीं, बल्कि मानव सभ्यता का शाश्वत सत्य है। बिना जल के जीवन की कल्पना भी संभव नहीं। किंतु विडंबना यह है कि जिस जल को हम जीवन का आधार मानते हैं, वही आज सबसे अधिक संकटग्रस्त संसाधन बन चुका है। देश-दुनिया में जल संकट के हालात … Read more

विश्व शिक्षा दिवसः 24 जनवरी 2026 ? शिक्षा रोजगार का टिकट नहीं, जीवन का दर्शन बने

विश्व शिक्षा दिवस कोरा उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर है, यह सोचने का क्षण कि शिक्षा क्या है, किसके लिए है और किस दिशा में समाज को ले जा रही है। भारत इस संदर्भ में केवल एक देश नहीं, बल्कि एक जीवित सभ्यता है, जिसने शिक्षा को कभी भी मात्र रोजगार या सूचना का … Read more

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