बालिका विकास के बन्द दरवाजे खोलने का समय

राष्ट्रीय बालिका दिवसः 24 जनवरी 2026 राष्ट्रीय बालिका दिवस बालिकाओं के अधिकारों, शिक्षा, स्वास्थ्य और सशक्तिकरण के लिए जागरूकता बढ़ाने और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने का दिन है, जिसकी शुरुआत 2008 में हुई; जिसके माध्यम से बालिकाओं की तस्वीर बदल रही है, जहाँ अब वे शिक्षा, खेल और नेतृत्व में आगे बढ़ रही हैं, लेकिन … Read more

23 जनवरी : राष्ट्रीय बालिका दिवस सम्मान, सुरक्षा और समानता का सवाल

भारत में विकास और समानता की चर्चा तब तक अधूरी मानी जाती है, जब तक उसमें बालिकाओं की स्थिति का ईमानदार मूल्यांकन न हो। 23 जनवरी को मनाया जाने वाला राष्ट्रीय बालिका दिवस इसी मूल्यांकन और आत्ममंथन का अवसर प्रदान करता है। यह दिन केवल औपचारिक आयोजन या शुभकामनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज, सरकार और परिवार—तीनों की जिम्मेदारियों … Read more

चंद खयालात….

1) जो कतराकर निकल जाते थे कभी मरने पर मेरे वही बेजान शरीर को हिला हिला कर पूछ रहे हैं यार तू बोलता क्यों नहीं अभी… 2) मेहनत और लगन की सीढ़िया चढ़कर जाने वाले को हमने शिखर तक पहुचते देखा लिफ्ट पर जाने वाले कहाँ पहुंचे ये हममे से किसी ने नहीं देखा… 3) … Read more

किसीने इतनी लाजवाब बातें कहीं हैं जो बातें सच थी, सच है और सच ही रहेंगे

सोच, सोचकर सोचिए, साथ क्या ले जाएगा ? अरे देखते ही देखते मर जाओगे सब यहीं रह जाएगा। तेरा खुद का पैदा किया हुआ तुझको जला के आएगा, मगर प्यारे दूसरा कोई हाथ भी नहीं लगायेगा। ये कालचक्र है चलता ही चलता ही जाएगा, फिर कल कोई तेरी सम्पत्ति का मालिक हो जाएगा। इसीलिए कुछ … Read more

ऋतुओं के राजा बसंत का पर्व बसंत

पंचमी धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक बसंत पंचमी को ही  विद्या एवं बुद्धि की देवी माता सरस्वती का जन्म हुआ था। पौराणिक कथाओं के अनुसारऋतुराज बसंत के साथ धरती पर कामदेव और उनकी पत्नी देवी रति आते हैं और सभी मेंप्रेम और काम भावना जागृत करते हैं। ऐसा माना जाता है कि बसंत पंचमी के दिन … Read more

तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा

जन जन के नायक महान स्वतन्त्रता सेनानी नेता जी कहते थे कि राष्ट्रवाद मानव जाति के उच्चतम आदर्शों सत्यम, शिवम, सुन्दरम से प्रेरित होना चाहिये | उन्होंने हमें अपने जीवन में सदेव आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा दी थी चाहे हमारा सफर कितना ही भयानक, कष्टदायी दुखी और बदतर हो |  सुभाष बोस  ने हमें … Read more

आयुर्वेद: प्राचीन चिकित्सा पद्धति का वैश्विक उत्थान

हाल ही में जयपुर के एसएमएस और उसके संबद्ध अस्पतालों में की गई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि मनुष्यों में एंटीबायोटिक दवाओं का असर 57% से 90% तक कम हो गया है। कुल 9776 मरीजों पर की गई रिसर्च में पता चला कि इनमें से एक भी मरीज ऐसा नहीं था जिसे … Read more

पढ़ने की लौ एवं किताबों से नाता अटूट है

53वें भारत मंडपम् में 10 से 18 जनवरी 2026 तक नौ दिनों के किताबों के जमावडे ने एक बात स्पष्ट कर दी है कि किताबों से नाता कभी नहीं टूट पायेगा। इस मेले में 35 से अधिक देशों के एक हजार से अधिक प्रकाशक भाग ले रहे हैं। यह भव्य विश्व पुस्तक मेला केवल पुस्तकों … Read more

लोक पर्वों में समता का उत्सव: मकर संक्रांति

बाबूलाल नागा मकर संक्रांति केवल एक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय समाज की सामूहिक चेतना, कृषि संस्कृति और सामाजिक समता का प्रतीक है। यह त्योहार सूर्य के उत्तरायण होने का उत्सव है, जो अंधकार से प्रकाश, ठंड से ऊष्मा और निराशा से आशा की ओर बढ़ने का संकेत देता है। भारत जैसे विविधताओं से भरे देश में मकर संक्रांति अलग-अलग … Read more

मकर संक्रांति

मकर संक्रांति सूर्य संवत्सर का सबसे पावन महत्वपूर्ण  दिन  सूर्य को भारत के ऋषि मुनियों ने निर्विवाद रूप सेजड चेतन की आत्मा माना है | भारतीय काल चक्र सूर्यकी गति के मुताबिक ही  चलता है | सूर्य का संक्रमनलगातार काल प्रवाह का परिचायक है | भारत में सोर संवत्सरको राष्ट्रिय मान्यताप्रदान की गई है  वहीं … Read more

बचत और खर्च का असंतुलनः नये भारत के लिए बड़ी चुनौती

महामारी के बाद की दुनिया केवल स्वास्थ्य के स्तर पर ही नहीं, बल्कि आर्थिक सोच और व्यवहार में भी एक बड़े संक्रमण से गुज़री है। वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं की अस्थिरता, भू-राजनीतिक तनाव, बढ़ती महंगाई, तकनीक-आधारित बाजार और उपभोक्तावादी संस्कृति के तीव्र प्रसार ने लोगों की खर्च करने की प्रवृत्ति को असाधारण रूप से बढ़ा दिया … Read more

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