लुप्त होती जा रही है ग्रामीण संस्कृति
-प्रकाशचंद बिश्नोई- रेतीले टिले में बसे राजस्थान अकसर जाना होता है. अतिप्राचीनकाल में उत्तर-पश्चिमी राजस्थान वैसा बीहड़ मरुस्थल नहीं था जैसा वह आज है। इस क्षेत्र से होकर सरस्वती और दृशद्वती जैसी विशाल नदियां बहा करती थीं। इन नदी घाटियों में हड़प्पा, ‘ग्रे-वैयर’ और रंगमहल जैसी संस्कृतियां फली-फूलीं। यह वही ब्रह्मावर्त है जिसकी महती चर्चा मनु … Read more