नोट देव से विनय
नोट देव! तुम कागज के टुकडे हो पर, हो कितने शक्तिशाली। तुम्हारा ही आधिपत्य है दुनिया पर, हो कितने प्रभावशाली। सारी दुनिया की दृष्टि तुम पर, हो कितने गौरवशाली।। गरीबी की आशा, अमीरी की परिभाषा, सपनों की मंजिल, भागा-दौडी की भाषा। समस्त कर्मो के संचालक, तुम हो एकाधिकारी शासक। सर्व दुःख- दारिद्रय विनाशक, साक्षत् लक्ष्मी … Read more