भक्ति का भौतिक शरीर से संबंध नहीं है
भक्ति का संबंध भाव से है, शरीर से नहीं। शरीर तो हमें भक्ति के लिए जीवित रखे हुए है; बस। इबादत, सुमिरन, भक्ति आदि ईश्वर के भाव से आरंभ होती है और उसी भाव में डूबने तक पहुंचती है। परमात्मा के भाव में डूबना यानि तन्मय हो जाना। फिर उसी भाव में उठना-बैठना, खाना-पीना, काम-धंधा … Read more