श्राद्ध_में__खीर_क्यों__??

जानिये “खीर” का वैज्ञानिक कारण और महत्व…… #हमारी_हर_प्राचीन_परंपरा_में_वैज्ञानिकता_का_दर्शन होता हैं । #अज्ञानता का नहीं…… हम सब जानते है की मच्छर काटने से मलेरिया होता है वर्ष में प्रत्येक मनुष्य को कम से कम 700-800 बार तो मच्छर काटते ही होंगे अर्थात 70 वर्ष की आयु तक पहुंचते-पहुंचते लाख बार मच्छर काट लेते होंगे । लेकिन … Read more

पितृपक्ष में नवीन कार्य और खरीददारी से होते हैं हमारे पितृ प्रसन्न

श्राद्घ पक्ष को लेकर लोगों में यह गलत धारणा बनी हुई कि यह अशुभ समय होता है। इस दौरान कोई नई चीज नहीं खरीदनी चाहिए। इन दिनों नई चीज खरीदने से पितर नाराज होते हैं। ऐसी भी मान्यता है कि पितर पक्ष में खरीदी गयी चीजें पितरों को समर्पित होता है जिसका उपयोग करना अनुचित … Read more

पितृ पक्ष में क्यों है काले तिल और जौ का इतना महत्व?

पितरों को प्रसन्न करने के लिए और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पितृ पक्ष का पालन किया जाता है. पितरों के खुश और सुखी रहने से परिवार में हमेशा सुख-समृद्धि बनी रहती है। श्राद्ध और तर्पण क्रिया में काले तिल का बड़ा महत्व है। श्राद्ध करने वालों को पितृकर्म में काले तिल का इस्तेमाल … Read more

पितृपक्ष में होता हैं कौओं का विशेष महत्व

कौओं को पितरों का रूप माना जाता है। मान्यता है कि श्राद्ध ग्रहण करने के लिए हमारे पितृ कौए का रूप धारण करके आते हैं। गरुड़ पुराण में बताया है कि कौवे यमराज के संदेश वाहक होते हैं। श्राद्ध पक्ष में कौएं घर-घर जाकर खाना ग्रहण करते हैं, इससे यमलोक में स्थित पितर देवताओं को … Read more

पित्तर कौन होते है? पित्तरों का महत्व

संसार के समस्त धर्मों में कहा गया है कि मरने के बाद भी जीवात्मा का अस्तित्व समाप्त नहीं होता है वरन वह किसी ना किसी रूप में बना ही रहता हे। जैसे मनुष्य कपड़ों को समय समय पर बदलते रहते है उसी तरह जीव को भी शरीर बदलने पड़ते है जिस प्रकार तमाम जीवन भर … Read more

श्राद्ध कर्म

श्राद्ध एक पवित्र कर्म है । जिसे निभाने से हमारे पूर्वजों के आशीष हमें प्राप्त होते हैं । भारतीय संस्कृति की एक बड़ी विशेषता है कि जीते-जी तो विभिन्न संस्कारों के द्वारा, धर्मपालन के द्वारा मानव को समुन्नत करने के उपाय बताती ही है लेकिन मरने के बाद भी, अंत्येष्टि संस्कार के बाद भी जीव … Read more

हिंदी दिवस : 14 सितम्बर का इतिहास

संतोष गंगेले कर्मयोगी -संकलन कर्ता हिन्दी दिवस प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को मनाया जाता है। 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने एक मत से यह निर्णय लिया कि हिन्दी ही भारत की राजभाषा होगी। इसी महत्वपूर्ण निर्णय के महत्व को प्रतिपादित करने तथा हिन्दी को हर क्षेत्र में प्रसारित करने के लिये राजभाषा प्रचार … Read more

श्राद्ध में ब्राह्मण भोजन क्यों हैं आवश्यक ?

जाने और समझें श्राद्ध पक्ष(महालय/कनागत/पितृपक्ष) में ब्राह्मण भोजन क्यों हैं आवश्यक ?? धर्म ग्रंथों के अनुसार, ब्राह्मणों के साथ वायु रूप में पितृ भी भोजन करते हैं। ऐसी मान्यता है कि ब्राह्मणों द्वारा किया गया भोजन सीधे पितरों तक पहुंचता है। श्राद्ध में ब्राह्मणों को भोजन करवाना एक जरूरी परंपरा है। पितृ पक्ष में श्राद्ध … Read more

हिंदी बिना हिन्दुस्तान अधूरा

(14 सितंबर 2019 हिंदी दिवस पर विशेष आलेख) हिंदी शब्द है हमारी आवाज का हमारे बोलने का जो कि हिन्दुस्तान में बोली जाती है। आज देश में जितनी भी क्षेत्रीय भाषाएँ हैं, उन सबकी जननी हिंदी है। और हिंदी को जन्म देने वाली भाषा का नाम संस्कृत है। जो कि आज देश में सिर्फ प्रतीकात्मक … Read more

पितृपक्ष में पितरों के लिए पिण्डदान और श्राद्ध कैसे करें??

शास्त्रों में मनुष्य के लिए तीन ऋण कहे गये हैं- देव ऋण, ऋषि ऋण व पितृ ऋण। इनमें से पितृ ऋण को श्राद्ध करके उतारना आवश्यक है। क्योंकि जिन माता-पिता ने हमारी आयु, आरोग्यता तथा सुख सौभाग्य की अभिवृद्धि के लिए अनेक प्रयास किये, उनके ऋण से मुक्त न होने पर हमारा जन्म लेना निरर्थक … Read more

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