हंसते—मुस्कराते जीये जिन्दगी Part 4
हास्य में बाधक सामाजिक मर्यादाएँ——- आज के तथाकथित सभ्य समाज में अकारण हँसने वालों को मूर्ख अथवा पागल समझा जाता है। सामाजिक मर्यादाओं के प्रतिकूल होने से बिना बात हँसने से लज्जा आती है। अतः घर में बच्चों के अलावा अन्य परिजन विशेषकर महिलाओं एवं वृद्धों का, धर्म संघ में संतों का, कार्यालय में पदाधिकारियों … Read more