आपकी जन्म कुण्डली के ग्रहो द्वारा आपका वास्तु निर्धारण

तकदीरे बना नहीं करती सिर्फ दिषाओं से । जब तक सितारे ना हो बुलन्द हमारे विचारों से ।। सिर्फ दिषायें बदलने से दषा नहीं बदल सकती । जिन्दगी बिना सितारों के सुधर नहीं सकती ।। केवल दिषाये बुलन्द नहीं करती तकदीरो को । तकदीरे बुलन्द होती है सितारों के मिजाजों से ।। आज के इस … Read more

पूजा कक्ष में क्या करें क्या ना करें

1 घर में पूजा करने वाला एक ही मूर्ति की पूजा नहीं करें। अनेक देवी-देवताओं की पूजा करें। घर में दो शिवलिंग की पूजा ना करें तथा पूजा स्थान पर तीन गणेश नहीं रखें। 2 शालिग्राम की मूर्ति जितनी छोटी हो वह ज्यादाफलदायक है। 3 कुशा पवित्री के अभाव में स्वर्ण की अंगूठी धारण करके … Read more

विभिन्न शिक्षाओं के योग

इंजीनियरिंग शिक्षा के कुछ योग – 1 जन्म, नवांश या चन्द्रलग्न से मंगल चतुर्थ स्थान में हो या चतुर्थेश मंगल की राशि में स्थित हो। 2 मंगल की चर्तुथ भाव या चतुर्थेश पर दृष्टि हो अथवा चतुर्थेश के साथ युति हो। 3 मंगल और बुध का पारस्परिक परिवर्तन योग हो अर्थात मंगल बुध की राशि … Read more

ईद, रोजा और रमजान

-फखरे आलम- इस्लामी इतिहास में सर्वप्रथम ईद जंग-ए-बदर के विजय के उपरान्त आठ दिनों के पश्चात् एक शव्वाल दो हिजरी को अर्थात् 27 मार्च 624 ई. को ईद मनाया गया था। रमजान के एक महीने रोजा के समाप्ती पर एक श्वाल को ईद का त्योहार मनाया जाता है। ईद की नमाज से पूर्व प्रत्येक मुसलमान महिला … Read more

क्या पूजा स्थल ईशान कोण में होना जरूरी हैं, उत्तम स्वास्थ्य के लिए?

पूजा स्थल का अपना एक महत्वपूर्ण स्थान हैं। यदि यह शुभ स्थान में स्थापित होता हैं तो जातक व राष्ट्र के लिए शुभ होता हैं। उनके लिए विभिन्न प्रकार के सौभाग्य जैसे स्वास्थ्य , धन , कीर्ति , यश , मान , दीर्घायु आदि प्रदान करता हैं तथा उन पर ईश्वर की असीम कृपा रहती … Read more

सौभाग्य का प्रतीक है स्वस्तिक

स्वस्तिक को हिन्दू धर्म ने ही नहीं, अपितु विष्व के सभी धर्मों ने परमपवित्र माना है। स्वस्तिक षब्द ‘सू’ $ उपसर्ग अस् धातु से बना है। सु अर्थात अच्छा, श्रेष्ठ, मंगल एवं अस् अर्थात सत्ता। यानी कल्याण की सत्ता, मांगल्य का अस्तित्व। स्वस्तिक मानव मात्र के विकास हेतु सौभाग्य का प्रतीक है। यह चिह्न अत्यन्त … Read more

विज्ञान एवं आध्यात्म

संसार वास्तव में ईश्वर का आभास हैं और यह आभास इस कारण उत्पन्न होता हैं कि हमने अज्ञानता वश संसार को सत्य समझ लिया हैं जो क्षण भंगुर है और प्रत्येक क्षण परिवर्तनीय हैं। यह कदापि सत्य नहीं हो सकता। सत्य होने की एक मात्र शर्त यह हैं कि मनुष्य माया में लिप्त न हो। … Read more

मोबाइल से हो रहा है रोजेदारों का रोजा

जिंदगी की बढ़ती आपाधापी और निरंतर व्यस्त हो रही दुनिया में धर्म और रोज-ब-रोज के रिवाजों का ध्यान रखना कोई आसान काम नहीं रह गया है। मुस्लिमों के लिए पवित्र रमजान कामहीना शुरू हो चुका है और इस बार रोजेदारों के लिए समय का ध्यान रखना आसान हो गया है।रोजा शुरू करने से लेकर इफ्तारी … Read more

गुरु वही जो हरिहिं मिलावै

हिन्दू पंचांग के अनुसार आषाढ़ पूर्णिमा के दिन गुरु की पूजा करने की परंपरा को गुरु पूर्णिमा पर्व के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व आत्मस्वरूप का ज्ञान पाने के अपने कर्तव्य की याद दिलाने वाला, मन में दैवी गुणों से विभूषित करनेवाला, सद्गुरु के प्रेम और ज्ञान की गंगा में बारम्बार डूबकी लगाने … Read more

क्या हैं महामृत्युञ्जय कवच ? कैसे करें प्रयोग और उठायें लाभ?

अपने स्‍वयं तथा परिवार की कुशलता के लिए महामृत्युञ्जय का कवच जरूरी है, और सावन में महामृत्युञ्जय मानो सोने पर सुहागा है, भगवान शिव महामृत्युञ्जय कहलाते हैं, शिव की शक्तियां जितनी अनंत, अपार व विराट हैं, उतना ही सरल है उनका स्वरूप व स्वभाव। इसी वजह से शिव भक्तों के मन में समाया शिव उपासना के … Read more

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