

-सुमित सारस्वत की रिपोर्ट- ब्यावर। अन्तरराष्ट्रीय कथावाचक संत मोरारी बापू आज अल्पप्रवास के दौरान जगद्गुरु शंकराचार्य निरंजनदेव तीर्थ की नगरी ब्यावर पधारे। वे यहां चरखी गली में अपनी मुंहबोली बहन के परिवार से मुलाकात करने आए थे। करीब 65 मिनट की मुलाकात के दौरान बापू ने अपनी दिवंगत बहन के चित्र पर पुष्प अर्पित किए। इसके बाद परिवार के सदस्यों से आत्मीयता के साथ चर्चा करते हुए सात्विक भोजन किया।
पहली बार ब्यावर आए बापू का दीदार करने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। बापू की एक झलक पाने के लिए भक्त बेताब दिखाई दिए। बापू ने घर की खिड़की से हाथ हिलाकर सभी को आशीर्वाद दिया। सभी ने जयकारे लगाकर बापू का अभिवादन किया। बापू के चरण छूने के लिए भक्तों को धक्का-मुक्की का शिकार भी होना पड़ा। इस दौरान बापू के सुरक्षागार्ड ने कुछ भक्तों से अभद्रता भी की। गौरतलब है कि इन दिनों मीरा की नगरी मेड़ता में बापू की कथा का आयोजन हो रहा है। इसी के तहत बापू राजस्थान प्रवास पर हैं।
कुछ इन संवादों से जुटी भीड़…
1. ‘अरे कहां है? जल्दी चरखी गली आ जा, बापू आ रहे हैं।’
2. ‘मोरारी बापू ब्यावर आए हैं। दर्शन करने हो तो आ जा।’
3. ‘भाई सब काम छोड़कर चरखी गली आ। बापू आए हुए हैं।’
4. ‘बापू के दर्शन करने हो तो फटाफट आजा। कपड़े चेंज करेगा तब तक तो चले जाएंगे।’
5. ‘भैया, मम्मी-पापा को लेकर राठीजी की हवेली के सामने आ, बापू आए हैं।’
6. ‘दादी मोरारी बापू ब्यावर आया है। दर्शन करना हो तो आजा।’
7. ‘अरे, दुकान कई कर्यो है। अटे आर देख भीड़ लाग री है बापू ने देखबा नें।’
8. ‘तू मेड़ता जार्यो होनीं। बापू खुद ब्यावर आग्या। अटे आर देख।’
बापू के दौरे की खास झलकियां…
1. मेरा वार्ड धन्य हो गया : बापू के आगमन के दौरान वहां मौजूद पार्षद अशोक गौड़ ने साथियों से कहा, ‘मेरा वार्ड तो आज धन्य हो गया।’ इस पर साथी ने जवाब दिया कि ‘आपका वार्ड ही नहीं, बापू के आने से पूरा ब्यावर धन्य हो गया है।’
2. किस्या बापू आया : प्रवास के दौरान लोग एक-दूसरे को फोन लगाकर बापू के ब्यावर आगमन की सूचना देते रहे। इस दौरान सनातन स्कूल मार्ग से गुजर रहे एक राहगीर ने वहां मौजूद शख्स से पूछा, ‘इत्ती भीड़ क्यूं लाग री है। कुण आयो?’ शख्स ने कहा, ‘बापू आए हैं।’ जवाब सुनकर राहगीर तपाक से बोला, किस्या बापू आया, आसाराम जी।’
3. अब तो घर जाओ : बापू के आने से चरखी गली में भीड़ हो गई। जिस घर में बापू ने प्रवेश किया उसके बाहर आवागमन प्रभावित हो गया। बापू भीड़ का सामना कर घर तक पहुंचे। इसके बाद बापू ने इंतजार किया कि भीड़ कम हो तो लौटे। भीड़ के उत्साह को देखकर बापू ने दो बार घर की खिड़की से झांककर दर्शन दिया और हाथ हिलाकर अभिवादन स्वीकारा। इसके बाद मेजबान परिवार के सदस्य से खिड़की से बार-बार बोलते रहे, ‘आप लोगों ने दर्शन कर लिए, अब तो घर जाओ।’

4. फोटो लेने की होड़ : दर्शन करने पहुंचे अधिकांश लोग अपने स्मार्टफोन में बापू के फोटो लेने की जद्दोजहद में दिखाई दिए। कई लोग तो बापू से ध्यान हटाकर इन फोटोज को हाथोंहाथ वॉट्सएप पर अपलोड भी कर रहे थे।
5. मैंने तो दर्शन कर लिए : भीड़ के बीच मोरारी बापू के दर्शन करना मुश्किल हो रहा था। ऐसे में यह जुमला खासा चर्चित रहा कि ‘मैंने तो दर्शन कर लिए।’ एक शख्स बोला, मैंने तो फाटक पर गाड़ी रूकी तभी दर्शन कर लिए थे। वहीं दूसरा बोला, मैं तो बापू की गाड़ी के साथ ही चल रहा था। तीसरे ने जवाब दिया, मैंने बापू को राम-राम किया तो बापू ने कार का शीशा उतारकर आशीर्वाद दिया। चौथे का जवाब भी आश्चर्यजनक था। वह बोला, ‘बापू ने मेरे सिर पर हाथ रखा और साथ में फोटो खींचवाया।’
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