
आदरणीय पंकज सिंह जी ने जितने आत्म विश्वास से इस सारे प्रकरण को बताया और समझाया वो अपनेआप में अद्भुत है ऐसा न तो पूर्व में कभी हुआ कि पुलिस मुख्यालय ने इतने विस्तारपूर्वक किसी घटना का उल्लेख किया हो और अपनी वाक्पटुता एवं विधि के ज्ञान एवं अनुभव के आधार पर जिस तरह ईश्वर की कृपा मानकर घटना का समस्त वृतान्त लोगों को बताया और अपनी बात लोगों के दिल में उतारने में कामयाब रहे। समाज के प्रत्येक वर्ग ने उसको सराहा है और लोगों को असलीयत का ज्ञान हुआ कि किस तरह एक अपराधी जो 40 केसों में लिप्त है और भारतीय दण्ड संहिता की लूट, डकैती, कत्ल, फिरौती की आदि धाराओं में अभियुक्त है और कई निर्दोष लोगों की हत्याएं कर चुका है और अमानवीय कृत्यों में लिप्त है जिसने अपने टॉर्चर सैल अपने किलेनुमा फॉर्म हाउस में बना रखे थे जहां लोगों को अनेक तरह की यातनाएं देकर उनसे पैसे, जमीन-जायदाद जबरदस्ती बलपूर्वक छीनी जाती थी और उन्हें मारकर उनकी हड्डियों का चूरा बनाकर तेजाब में डालकर सड़कों पर साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से बहा दिया जाता था, ऐसे हार्ड कोर अपराधी को भी समाज मान्यता दे और उसे रोबिन हुड, लोक देवता, मसीहा बनाए तो यह देश का और समाज का दुर्भाग्य ही होगा। असलियत जानने के बाद लोगों ने जो विचार सरकार के प्रति, पुलिस के प्रति बना रखे थे वे सब दूर हुए और सच्चाई सबके सामने आई कि क्यों अब तक इन लोगों ने किसी भी न्यायालय में एनकाउन्टर की सी.बी.आई. जांच की मांग क्यों नहीं की, ना ही मानवाधिकार या किसी अन्य एजेन्सी के पास गए जबकि पुलिस ने तो माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा जो 16 सूत्रीय मार्ग निर्देशिका बना रखी थी, पुलिस ने उसका अक्षरतः पालना की है। काश पुलिस मुख्यालय उपरोक्त तीनों ब्रम्हा, विष्णु, महेश से यह प्रैस कांफ्रैन्स पहले ही करा लेता तो यह स्थिति पैदा ही नहीं होती जो आनंदपाल की मृत्यु के बाद राजस्थान की जनता को जो त्रासदी 17 दिन तक झेलनी पड़ी, तीनों अधिकारीयों एवं परम आदरणीय मनोज भट्ट साहब, महानिदेशक, राजस्थान पुलिस का बहुत बहुत साधूवाद व धन्यवाद।
आपका अपना राजेश टंडन, वकील, अजमेर।