आजादी के 70 सालो बाद भी पुरानी बिल्डिंग में ही चल रहा है पुष्कर का सरकारी हॉस्पिटल

◆ *ना डिजिटल एक्सरे , ना सोनोग्राफी , ना ब्लड बैंक , ना ट्रेंड स्टाफ , ना पर्याप्त डॉक्टर , ना पर्याप्त जगह । मरीज को सिर्फ अजमेर रेफर करने का जरिया बन चुका है हॉस्पिटल••••*

राकेश भट्ट
17 नवंबर 1942 यह वो तारीख है जब केकड़ी के एक सेठ लाभचंद राजगढ़िया ने उस जमाने मे चौदह हजार दो सौ रुपयों की लागत से एक हॉस्पिटल बनाकर दान किया था। धार्मिक नगरी पुष्कर और यहां आने वाले श्रद्धालु तीर्थ यात्रियों का अच्छे से अच्छा इलाज हो इस उद्देश्य से आज से 76 साल पहले यहां पर सरकारी हॉस्पिटल की स्थापना की गई थी । परंतु इसे दुर्भाग्य ही माना जायेगा कि पुष्कर भले ही आज देश और दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बना चुका हो , दुनियाभर के लोग हमेशा यहां आने के लिए लालायित रहते हो , पूरे साल यहां देश के राष्ट्रपति से लेकर केंद्रीय मंत्रियों , मुख्यमंत्रियों और बड़ी बड़ी हस्तियों का आना जाना लगा रहता हो परंतु इतना कुछ होने के बावजूद यहां का हॉस्पिटल आज भी उसी 76 साल पुरानी बिल्डिंग में चल रहा है । भले ही आजादी के बाद से पुष्कर की जनसंख्या और यहां आने वाले श्रद्धालुओं की तादात में हजारो गुणा बढ़ोतरी हुई है लेकिन इन सबके बावजूद आज तक किसी भी नेता ने इस हॉस्पिटल को अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त बनाने की दिशा में कोशिश नही की ।

खास बात यह है कि भले ही हमारे वर्तमान विधायक और संसदीय सचिव सुरेश सिंह रावत बीते पांच सालों में करवाये गए विकास कार्यो के नाम पर पुष्कर क्षेत्र में 2600 करोड़ रुपये खर्च कर देने के दावे करते हो परंतु दुर्भाग्य है कि उनके द्वारा बहाई गई गंगा भी इस हॉस्पिटल का जीर्णोद्धार करने नही पहुंची । तभी तो आज भी यहां हाल बेहाल है । स्थिति यह है कि सरकार ने डॉक्टरों की नियुक्ति तो कर रखी है लेकिन उनके बैठने के लिए यहां जगह ही नही है । यही वजह है कि एक एक कमरे में तीन तीन डॉक्टर बैठकर मरीजो का इलाज कर रहे है । यहां पर एक कमरे में ही इमरजेंसी सेवाओ का कार्य चल रहा है । जहां आने वाले मरीजो की ड्रेसिंग और इंजेक्शन लगाए जाते है । उसमें भी आधी से ज्यादा जगह स्टाफ के बैठने और मरीजो की एंट्री करने के काम आ रही है । आप यकीन नही करेंगे कि स्थितियां इतनी बदतर है कि यदि किसी एक्सीडेंट में एक साथ आठ दस लोग घायल होकर यहां आ जाये तो उनका इलाज करना तो दूर उन्हें एक साथ लिटाने के लिए भी इमरजेंसी वार्ड में जगह तक नही है ।

यह हॉस्पिटल समूचे विधानसभा क्षेत्र का सबसे बड़ा हॉस्पिटल है । यहां हर रोज लगभग 700 मरीज इलाज करवाने आते है । परंतु फिर भी यहां के लोगो को इलाज के लिए पर्याप्त सुविधाएं नही मिल रही है । और तो और पुष्कर के हॉस्पिटल में डिजिटल एक्सरे और सोनोग्राफी जैसी बेहद जरूरी जांच मशीनें तक नही है । छोटी से छोटी बीमारी का पता लगाने के लिए डॉक्टर जो जांच लिखते है उसे करवाने के लिए मरीज अजमेर के चक्कर काटने को मजबूर है । पुष्कर सहित आसपास के ग्रामीण इलाके में आये दिन एक्सीडेंट होते रहते है । जिनमे कई तो गंभीर रूप से घायल होते है जिन्हें खून की आवश्यकता होती है । परंतु यहां ब्लड बैंक तक नही है । आपको यकीन नही होगा कि पूरे साल में यहां मरीजो पर केवल पंद्रह यूनिट खून ही काम आ सका है । इसका एक बड़ा कारण यह भी है इस हॉस्पिटल में आने वाले अस्सी फीसदी मरीजो को तो आते ही अजमेर के लिए रेफर कर दिया जाता है । ना वो यहां इलाज करवाने के लिए रुकते है और ना ही खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती है ।

कुल मिलाकर यदि हम कहे तो चिकित्सा के मामले में आजादी के बाद से लेकर आज दिन तक जितने भी स्थानीय जनप्रतिनिधी के रूप में निर्वाचित हुए उनकी नजर में चिकित्सा व्यवस्था में सुधार करना कभी मुद्दा रहा है नही । नेताओ की लापरवाही ही इसके बदहाल होने की सबसे बड़ी वजह है । आज तक किसी भी नेता ने इस पुराने हॉस्पिटल की जगह आज की जरूरत के हिसाब से एक नया हॉस्पिटल बनाने और उसमे तमाम सुविधाएं मुहैया करवाने के प्रति सकारात्मक सोच और मजबूत इच्छा शक्ति नही दिखाई है । जब कि यहां केवल पुष्कर शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों के लोग ही नही बल्कि देश और दुनियाभर से घूमने आने वाले देशी विदेशी पर्यटक भी इलाज करवाने आते है । यह लापरवाही का ही परिणाम है कि यहां के लोगो को आज भी इलाज के नाम पर केवल अजमेर रेफर करने का पर्चा थमाया जा रहा है । जो बेहद शर्मनाक है ••••

*शेष अगले अंक में ••••*

*राकेश भट्ट*
*प्रधान संपादक*
*पॉवर ऑफ नेशन*
*मो 9828171060*

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