13 मंत्रियों व संसदीय सचिवों सहित 87 विधायकों के टिकट काटने का लिया निर्णय

अजमेर जिले से मंत्री अनिता भदेल, संसदीय सचिव सुरेश रावत व शत्रुघ्न गौतम तथा विधायक सुशील कंवर का कट सकता है टिकट

तिलक माथुर
राजस्थान में सत्ता विरोधी लहर के चलते भाजपा 87 विधायकों के टिकट काटने का मानस बना चुकी है जिसमें 13 मंत्री व संसदीय सचिव भी शामिल हैं। भाजपा राज्य में चल रही विरोधी लहर का जिम्मेदार अपने इन विधायकों व मंत्रियों को मान रही है, यही वजह है कि उसने अपने 13 मंत्रियों, संसदीय सचिवों सहित 87 विधायकों की छुट्टी करने का मानस बना लिया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि सर्वे में जिन विधायकों व मंत्रियों की परफॉर्मेंस अच्छी नहीं आई है उनके टिकट काटे जा रहे हैं। इन नेताओं का कहना है कि जिन विधायकों के क्षेत्र में भाजपा की हालत पतली है उन क्षेत्रों में अब नए चेहरों को मौका दिया जाएगा। ऐसे नए चेहरों की तलाश शुरू कर दी गई है, इनमे कुछ उम्मीदवारों को चिन्हित भी कर लिया गया है। इन नए चेहरों में स्वच्छ छवि व भाजपा की रीति नीति में आस्था रखने वाले जीताऊ लोगों को ही टिकट दिया जाएगा, इनमें से कुछ ऐसे चेहरे भी शामिल किए जा सकते हैं जिन्होंने राजनैतिक क्षेत्र में कभी काम किया ही नहीं। वहीं इस बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पसन्द का भी ख्याल रखा जा रहा है, उम्मीदवारों की चयन प्रक्रिया में संघ के पदाधिकारियों से भी चर्चा की जा रही है। कुल मिलाकर भाजपा पुनः सत्ता में आने के हर सम्भव प्रयास कर रही है। अति विशिष्ट सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अजमेर जिले में भी चार विधायकों के टिकट कटने की प्रबल सम्भावना है, जिनमें मंत्री अनिता भदेल, संसदीय सचिव सुरेश रावत व शत्रुघ्न गौतम व विधायक सुशील कंवर पलाड़ा का नाम बताया जा रहा है। भाजपा सूत्रों के अनुसार सर्वे में इन नेताओं की रिपोर्ट कमजोर बताई गई है। हालांकि भाजपा इस बार टिकट वितरण में फूंक फूंककर कदम उठा रही है। जिसके तहत जातिगत समीकरणों को भी ध्यान में रखा जा रहा है। इस बार अजमेर जिले में रावत, ब्राह्मण, राजपूत, जाट, मुसलमान, अनुसूचित जाति, सिंधी व महाजन को टिकट देने की कवायद चल रही है। उधर राजनैतिक पंडितों का मानना है कि भाजपा चाहे कुछ भी करले मगर इस बार उसका सत्ता में आना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन दिखाई दे रहा है। जनमानस सत्ता बदलने के मूड में है इसका संकेत वह गत उपचुनावों में दे चुका है। वहीं तीसरे मोर्चे के मैदान में आ जाने से भाजपा के पुनः सत्ता में आने की सम्भावनाएं और कम हो गई है। उल्लेखनीय है कि राजपूत समाज पहले से ही भाजपा से नाराज चल रहा है वहीं हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के गठन के साथ युवा जाट मतदाता बेनीवाल की ओर आकर्षित हो रहे हैं जिसके चलते जाट युवा भी भाजपा से खिसकते नजर आ रहे हैं। अगर ऐसा होता है तो भाजपा की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी। ऐसी स्थिति में भाजपा के लिए सम्मान जनक सीटें हासिल करना बड़ी चुनौती है। खैर जो भी हो ये वक्त की नजाकत है जो बोया है वही काटना है !
तिलक माथुर
*केकड़ी_अजमेर*
*9251022331*

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