पालिकाध्यक्ष मित्तल पर कार्यवाही के संकेतों के बाद कांग्रेस में हलचल तेज

केकड़ी नगर पालिका अध्यक्ष अनिल मित्तल के खिलाफ विभिन्न आरोप प्रथम दृष्टया साबित होने के बाद से राजनीतिक गलियारों में हल-चल शुरू हो गई है। विभागीय स्तर पर जांच में जिस प्रकार उन पर गम्भीर आरोप साबित हुए हैं, उससे यह माना जा रहा है कि मित्तल के खिलाफ निलंबन की कार्यवाही हो सकती है। शायद यही वजह है कि कांग्रेस में नए पालिकाध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर हलचल शुरू हो गई है। सोशल मीडिया पर तो पार्षदों के समर्थकों ने उन्हें भावी पालिकाध्यक्ष के रूप में शुभकामनाएं देना शुरू कर दिया है। हालांकि अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा। वैसे तो जिस प्रकार पालिकाध्यक्ष अनिल मित्तल को विभिन्न मामलों की जांच में आरोपित ठहराया गया है, उससे तो लगता है उन पर कार्यवाही होना तय है। शायद यही वजह है कि कांग्रेस के दो पार्षदों के मन में पालिकाध्यक्ष बनने के लिए लड्डू फूट रहे हैं। ये दोनों पार्षद अपने-अपने हिसाब से खुद की दावेदारी मजबूत मानकर प्रयासों में जुट गए हैं। पालिकाध्यक्ष मित्तल के खिलाफ कथित रूप से कार्यवाही होने के संकेतों से शहर में नए अध्यक्ष को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई है। हालांकि नगरपालिका में कांग्रेस के तीस में से तीन ही पार्षद हैं। लेकिन राज्य में कांग्रेस की सरकार होने की वजह से यह माना जा रहा है कि अगर मित्तल के खिलाफ कोई कार्यवाही होती है तो सम्भवतः कांग्रेस के किसी पार्षद की लॉटरी लग सकती है। ऐसे में कांग्रेस पार्षद पालिका के प्रतिपक्ष नेता आसिफ हुसैन व पूर्व प्रतिपक्ष नेता निर्मल जैन पालिकाध्यक्ष की दौड़ में शामिल हो गए है। हालांकि नगरपालिका के नियमानुसार अगर पालिकाध्यक्ष के खिलाफ निलंबन की कार्यवाही होती है तो पालिका उपाध्याय को कार्यवाहक पालिकाध्यक्ष के रूप में पदभार सौंपा जाता है। लेकिन हमनें केकड़ी सहित अन्य नगर निकायों में देखा है कि पालिकाध्यक्ष के निलंबन के बाद सरकार की मंशा के अनुसार अध्यक्ष पद पर नियुक्तियां हुई है, भले ही वे बाद में न्यायालय द्वारा हटा दिए गए हों। मगर एक बार तो सरकार अपनी मंशा अनुसार नियुक्ति कर सकती है। अगर ऐसा होता है तो फिर कांग्रेस के पार्षदों में से किसी एक कि लॉटरी लग सकती है। यहां क्षेत्रीय विधायक व राज्य के चिकित्सा मंत्री डॉ रघु शर्मा पर निर्भर है कि वे किसे महत्व देते हैं। हालांकि उनके लिए हर कार्यकर्ता महत्वपूर्ण है मगर बनना तो किसी एक को ही है। अब देखना यह है कि किसकी किस्मत व निष्ठा जोर मारती है। वैसे तो दोनों पार्षद डॉ शर्मा के चहेते हैं, दोनों कांग्रेस के लिए ततपरता से काम कर रहे हैं। दोनों की निष्ठा पर संदेह नहीं किया जा सकता। पार्षद आसिफ हुसैन यूथ कांग्रेस के प्रवक्ता, ब्लॉक कांग्रेस के महासचिव रह चुके हैं तथा वर्तमान में कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव व पालिका के प्रतिपक्ष नेता के पद पर कार्यरत हैं। इनकी कार्यकुशलता व मतदाताओं पर पकड़ ही वजह है कि 4 माह पूर्व सम्पन्न हुए विधानसभा चुनाव में इनके वार्ड संख्या 22 के तीन बूथों पर बूथ संख्या 137,138,139 में कांग्रेस को 1106 मतों की बढ़त मिली थी जबकि कांग्रेस पार्षद निर्मल चौधरी के वार्ड संख्या 30 के तीन बूथों पर बूथ संख्या 126,127,128 पर कांग्रेस को सफलता नहीं मिल पाई। उनके वार्ड से कांग्रेस को 96 मतों से पिछड़ना पड़ा था। पार्षद निर्मल चौधरी सेवादल के सचिव, पालिका में प्रतिपक्ष नेता रह चुके हैं, वे वर्तमान में कांग्रेस के नगर अध्यक्ष व जिला सचिव पद पर कार्यरत हैं। खैर जो भी हो अब देखना यह है कि पालिकाध्यक्ष अनिल मित्तल के खिलाफ किस तरह की कार्यवाही होती है, क्या उन पर कार्यवाही के बाद उन्हें न्यायालय से कोई राहत मिल सकती है। ये सभी प्रकार की बातें फैसला करेगी कि पालिकाध्यक्ष की कुर्सी पर मित्तल ही काबिज रहेंगे या फिर कोई नया चेहरा देखने को मिलेगा !

तिलक माथुर
*9251022331*

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