मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ को नोकिया ने ‘नो’ किया

nokiaकमोबेश सारी परिस्थितियां फेवरेबल हैं। फिर भी बात बनने की बजाय बिगड़ गई। नोकिया ने ऐलान कर दिया है कि वह अपना चेन्नई का मोबाइल प्लांट 1 नवंबर से बंद कर देगी। नोकिया का यह कारखाना नोकिया के उन दस बड़े कारखानों में शामिल था जहां नोकिया मोबाइल निर्माण करता था। लेकिन इन दस में अब नौ ही रह जाएंगे। भारत सरकार के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मेक इन इंडिया का नारा हो कि माइक्रोसाफ्ट के भारतीय मूल के सीईओ सत्य नडेला होंं या फिर खुद नोकिया कंपनी हो, सब इस कारखाने को बचाने में नाकाफी साबित हुए हैं।

बात अप्रैल 2005 की है जब भारत में मोबाइल कारोबार का नंबर वन ब्रांड फिनलैंड की नोकिया कंपनी ने ऐलान किया था कि वे भारत में अपना मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाएंगे। बहुत खोजबीन के बाद उन्होंंने चेन्नई के श्रीपेरेम्बदूर में अपना प्लांट लगाने का निश्चय किया। उस समय नोकिया कंपनी के सीईओ ने कहा था कि भारत में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाना उनके वैश्विक विस्तार का हिस्सा है। प्लांट लगा और नोकिया ने इस फैक्ट्री का इस्तेमाल बेसिक फोन बनाने के लिए शुरू भी कर दिया लेकिन एक दशक के भीतर जिस तरह से मोबाइल की दुनिया बदली उसमें नोकिया पिछड़ता चला गया। स्मार्टफोन के जमाने में जब तक नोकिया माइक्रोसाफ्ट से हाथ मिलाकर विन्डोज फोन की सीरिज लांच करता एन्डराइड स्मार्टफोन ने भारतीय बाजार पर एकछत्र राज कायम कर लिया था।

इस बीच अप्रैल 2014 में नोकिया ने अपना मोबाइल कारोबार माइक्रोसाफ्ट के हाथोंं बेच दिया। नोकिया और माइक्रोसाफ्ट के बीच हुए इस समझौते में चेन्नई का यह मोबाइल प्लांट शामिल नहीं था। इसलिए यह नोकिया की जिम्मेदारी थी कि वह इस प्लांट में काम करनेवाले कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित करती। माइक्रोसाफ्ट से समझौते के बाद मई 2014 में नोकिया ने ऐलान किया कि उसने अपने कर्मचारियों को वीआरएस स्कीम आफर किया है और नये सिरे से नौकरी खोजने में मदद करने के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाने का निश्चय किया है। मीडिया की खबरों पर यकीन करें तो बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने वीआरएस ले भी लिया फिर भी अभी कम से कम हजार बारह सौ के करीब ऐसे कर्मचारी हैं जिनका भविष्य अधर में हैं। खबर है कि उनमें से करीब आठ सौ कर्मचारियों ने अदालत जाने का निर्णय लिया है।

कर्मचारियों का भविष्य तो बिगड़ा ही लेकिन सत्य नडेला के सीईओ बनने के बाद भी माइक्रोसाफ्ट के साथ हुए समझौते में चेन्नई कारखाने को समझौते में शामिल नहीं किया गया। कारण, माइक्रोसाफ्ट बेसिक फोन की बजाय स्मार्टफोन मार्केट पर जोर देना चाहती है। इसका असर यह हुआ कि माइक्रोसाफ्ट ने नोकिया को ऐसे फोन का आर्डर देना ही बंद कर दिया जिसे चेन्नई कारखाने में बनाया जा रहा था। जाहिर है, इसके बाद नोकिया के लिए चेन्नई कारखाना सफेद हाथी बनकर रह जाता इसलिए उन्होंने पहली नवंबर से कारखाने को बंद करने का ऐलान कर दिया।

लेकिन सिर्फ माइक्रोसाफ्ट से आर्डर न मिलना ही इस फैक्ट्री के बंद होने का एकमात्र कारण नहीं है। नोकिया कंपनी पर तमिलनाडु सरकार ने टैक्स चोरी का आरोप लगाया और स्थानीय अदालत में यह साबित भी हो गया कि नोकिया ने टैक्स चोरी की है। तमिलनाडु सरकार ने नोकिया पर 2,404 करोड़ की टैक्स चोरी का मामला पकड़ा और अदालत ने कंपनी को आदेश दिया कि वह तत्काल 10 प्रतिशत रकम सरकार को जमा कराये। नोकिया ने रकम तो सरकार को जमा नहीं करवाई बल्कि मद्रास हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अपील करके कहा कि एक सदस्यीय जज के आर्डर को ही निरस्त कर दिया जाए। नोकिया पर टैक्स चोरी का यह मामला ऊपरी अदालतोंं में पेंडिग है।

इस बीच नोकिया ने भारत सरकार के नवनियुक्त प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यालय को भी संपर्क किया और उनसे अपील किया कि वे भारत फिनलैण्ड के बीच बाइलेटरल इन्वेस्टमेन्ट प्रमोशन एण्ड प्रोटेक्शन के आधार पर नोकिया को संरक्षण दे लेकिन भारत सरकार ने नोकिया को जवाब दिया कि दोनों देशों के बीच जो समझौता है उसमें कर चोरी माफ करने का कोई प्रावधान नहीं है। लिहाजा, नोकिया ने आखिरी निर्णय लेते हुए कारखाने को बंद करने का ऐलान कर दिया।

निश्चित रूप से भारत में तेजी से बढ़ते मोबाइल उपयोग के दौर में जरूरी है कि भारत में मोबाइल निर्माण की प्रक्रिया तेज हो। अभी भारत का कमोबेश समूचा मोबाइल फोन बाजार चीन और दूसरे देशों से आयात पर टिका है। ऐसे में नोकिया द्वारा अपने मोबाइल निर्माण को समेटने का ऐलान न सिर्फ मेक इन इंडिया नारे को झटका है बल्कि भारत में मोबाइल निर्माण उद्योग के रास्ते को भी अवरुद्ध करता है। हम उपभोक्ता तो हैं लेकिन उत्पादन के लिहाज से भारत कमोबेश शून्य ही है। नोकिया के इस कारखाने के बंद होने के बाद जो थोड़ी बहुत हिस्सेदारी थी वह भी खत्म हो जाएगी।
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