आदतें खुद-ब-खुद ही सुधर जाएगी ,
कुछ कहोगे तो फिर बात बढ़ जाएगी |
हम दिवाली पे दीपक जलाते रहे ,
उस तरफ वो खड़े थे हवाएँ लिए |
हम जलाते रहे, वो बुझाते रहे ,
अड़चनें हारकर स्वयं ही थक जाएगी |
हैं अनाड़ी वो कितने जरा देखिए ,
शाख को काटते जिस पे बैठे हुए |
गिर पड़ोगे अभी, मत कहो ये कभी,
चोट लगने से भूलें सुधर जाएगी |
चलते रहना मुझे , बस यही सोचिए ,
जाँचना है यदि खुद को ही जाँचिए |
जीत या हार में , तट या मँझदार में ,
धैर्य- संयम रखें, राह मिल जाएगी |
-डॉ. नटवर विद्यार्थी
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