रोचक एवं अनसुनी जानकारीयां

डा. जे.के.गर्ग
गाँधी बाबा सबसे पहिले दरिद्रनारायण की भलाई को केंद्र मे रख कर भाषण दिया करते थे और वैसी ही नितीयां बनाते थे किन्तु आजकल तो राजनेता बात तो गांधीजी की करते हैं किन्तु नीतियाँ और निर्णय पूंजीपतियों और उद्द्योगपतियों के हित साधन के लिये लेते है | क्या आप जानते हैं कि गांधीजी वर्धा आश्रम में बीमारों की सेवा निसंकोच और निस्वार्थ भावना से करते थे,उनके साथ रहते थे वहीं आजकल तो नेता फोटोशूट के लिये ही दलितों, अछूतों के घर पर जाते है और सडकों गलियों में फोटोशूट के लिए हाथ में झाड़ू लेकर वाही वाही लुट रहें है |

किसी जमाने में नेताओं के चारों तरफ साधारण जनमानस होते थे और प्रधानमंत्री भी लाखों आदमीयों की भीड़ में कूद जाते थे किन्तु आज के नेताओं के चारों तरफ उनके बन्दूकधारी कमांडों ही रहते हैं |

किसी जमाने में गांधीजी जैसे जननेताओं के नाम पर कसमे खाई जाती थी किन्तु आज के जमाने में माताएं आज के नेताओं का नाम लेकर अपने बच्चों को डराया करती हैं |

एक जमाने में देश के ग्रहमंत्री और मंत्रीयों के पास पहनने को एक भी सूट नहीं होता था याद करें जब तत्कालीन ग्रह मंत्री लालबहादुर शास्त्री हजरतबल के मामले में कश्मीर जा रहे थे उस वक्त सर्दी के बचाव के लिये अपनी कोइ ड्रेस नहीं थी उस वक्त नेहरुजी ने उन्हें अपना कोट दिया था जबकि आज के नेताओं के पास कितने कोट होगें यह आप लोगों से छुपा हुवा नहीं है |किसी जमाने में सिद्धांतों पर राजनीती की जाती थी, राजनेता जीवन पर्यन्त अपने अपने सिद्धांतो पर अटल रहते थे किन्तु आज तोअपने तुच्छ निजस्वार्थों के खातिर नेताओं में अपने सिद्धांतों को छोड़ कर येंन केन सत्ता प्राप्ती के खातिर पार्टी बदल कर कल तक वें जिस पार्टी की सोच और सिद्धांतो का खुले आम विरोध करते थे उसी पार्टी में शामिल होकर अपने नये आकाओं का गुणगान करते नहीं थकते हैं| ऐसे लोग पार्टियाँ बदल कर मंत्री बनते | जो लोग कल तक भ्रष्ट कहलाते थे आज उन्हीं को इमानदारी का प्रमाणपत्र मिल जाता है| ऐसे कई नेता कोई समय था जब समाजविरोधी तत्व अपराधियों का घर जेल ही होता था किन्तु आज का वोटर उन्हेंससम्मान चुनावों में जीता कर लोकसभा/ विधानसभा/ नगरनिगम आदि मे भेजते हैं |

किसी जमाने में पंचोंको परमेश्वर माना जाता था किन्तु आज वे न्याय से कोसों दूर रहते हैं और सिर्फ अपने स्वार्थ के लिये न्याय का खुले आम कत्ल करते हैं | कोर्ट में आम तोर पर फरियादियों का खून चूसा जाता है और उन्हें समय पर न्याय भी नहीं मिलता है |

किसी जमाने में सिद्धांतों पर राजनीती की जाती थी, राजनेता जीवन पर्यन्त अपने अपने सिद्धांतो पर अटल रहते थे किन्तु आज तोअपने तुच्छ निजस्वार्थों के खातिर नेताओं में अपने सिद्धांतों को छोड़ कर येंन केन सत्ता प्राप्ती के खातिर पार्टी बदल कर कल तक वें जिस पार्टी की सोच और सिद्धांतो का खुले आम विरोध करते थे उसी पार्टी में शामिल होकर अपने नये आकाओं का गुणगान करते नहीं थकते हैं| ऐसे लोग पार्टियाँ बदल कर मंत्री बनते जो लोग कल तक भ्रष्ट कहलाते थे आज और उन्हें नई पार्टी इमानदारी का सर्टिफिकेट भी हाथोंहाथ दे देती है |

एक समय था जब अख़बारों कीप्रसारण निती का निर्धारण अख़बार के संपादक सर्वहित में निस्वार्थ भावना से करते थे | अख़बार में सही एवं सच्ची खबरें ही प्रकाशित हुआ करती थी किन्तु आज की सच्चाई तो यही है कि अब व्यापारिक घरानों और पूंजीपतियों ने अधिकाश समाचार पत्रों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को अपना गुलाम बना के रक्खा हुआ है उनका काम अपने आकाओं और कतिपय राजनेताओं को महिमामंडित करने और कुछ के विरुद्ध अनर्गल प्रचार कर उनकी छवी को धूमिल करने में ही लगा है | पेड न्यूज़ एवं फेग न्यूज के जरिये सत्ता प्राप्त की जाती है | अमेरिका के पिछले चुनाव में इसका सफलतापूर्वक प्रयोग किया गया था |

आज से कुछ दशक पहिले डाक्टर एवं प्राध्यापक का काम नोबल और आदरणीय होता था वो निस्वार्थ रूप अपना काम करते थे किन्तु आज वो मात्र पैसा कमाने की मशीन बन गये है | स्कुल और कालेज में न तो पढाई होती है और ना ही उन्हें पढ़ाया जाता है वहीं अस्पतालों में प्रोपर इलाज नहीं होता है निजी होस्पिटल मे मरीजों को लुटा जा रहा है | कोचिग संस्थान मालामाल हो रहे है |

एक वक्त्त जनसंख्या एक बड़ी और विकराल समस्या बन गयी थी किन्तु आज वही एक उभरता प्रोफिटेबिल बाज़ार बन चुका है |एक जमाने में गोल्डन रूल से शासन चला करते थे किन्तु आज अगर आप के पास गोल्ड चांदी और रुपया हो तभी आप शासन कर सकते है |

विगत जमाने में सिद्धांतों और आदर्शों के माध्यम से सफलता और यश हासिल किया जाता था किन्तु आज सफलता के लिए आमतोर पर झूठ फरेब तथा साम दाम दंड और मार्केटिग से सफलता यश प्राप्त किया जाता है |

एक जमाने में आदमी अपनी आत्मा के कल्याण हेतु सच कहना, सच सुनना और सच देखना आवश्यक मानता था किन्तु आज सफलताप्राप्त करनेया आगे बढने के लिये इन को तिलांजली देकर ,खुद की स्वार्थ पूर्ति के लिये ही झूठ बोलना,झूठ सुनना और झूठ को सच बना करप्रचार करना जायज बन चुका है | झूठ को सो बार बोलकर उसे सही बनाकर पेश किया जा रहा है और जो कोई इसे नहीं माने उसे प्रताड़ित कर अपमानित करके | मारा पीटा जाता है

कभी गांधीजी के तीन बन्दर अपनी आखें दोनों हाथों से बंद करके सन्देश देते थे कि बुरा नहीं देखो बुरा नहीं सुनो और बुरा नहीं कहो किन्तु वर्तमान में इन बंदरों की खुली आँखे कह रही है कि सफलता अर्जन एवं सत्ता प्राप्ती के लिये बुरा कहना बुरा सुनना और बुरा देखने में कोइ नुकसान नहीं है |

एक जमाने में धार्मिक सहिष्णुता हमारी सनातन संस्क्रति का अभिन्न अंग होता था किन्तु आज तो धार्मिक उन्माद का बोलबाला है |

कभी हम लोगों को बापू का प्रिय भजन रघुपति राघव राजा राम पतित पावन सीता राम ईश्वर अल्लाह एक ही नाम सबको सन्मति दे भगवान की गूंज देश के हर गलीयों में सुनाई देती थी | वहीं आज छोटी मोटी कहा सूनी की वजहों से विभिन्न धर्मावलम्बियों समुदायों और जातियों के बीच तलवारें खींच जाती है और अविश्वास की दीवारें ऊँची होती जा रही है |

किसी जमाने में नारी कासमाज में सही मायनों में सम्मान होता था किन्तु आज के वक्त में बलात्कार,अपहरण एवं योनाचार की घटनायें आम हो गई है, रोज कहीं न कहीं बहन बेटियों की अस्मत को लुट कर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है इन अमानवीय शर्मशार घटनाओं का भी राजनीतिकरण कर अपनी स्वार्थ पूर्ति की जा रही है,बजारीकरण के जमाने में नारी एक उत्पाद बन कर रह गई है | आत्मसंतोष के स्थान पर येनकेन प्रकारेण धन कमाने की प्रवर्ती दिन दूनी रात चोगुणी बड रही है | राजनेतिक पार्टिया लम्बी चोडी बाते गरीबों के हितों की करते हैं किन्तु उनकी नीतियों से फायदा धन्नासेठों को हो रहा है वहीं अनेको दरिद्र नारायण को दो वक्त की रोटी भी बड़ी मुश्किल से मिल पाती है |

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