अमर सिंधु की सिंधी रचना का देवी नागरानी द्वारा हिंदी अनुवाद

मूल सिंधी: अमर सिन्धु

Amar Sindhu
مان…!!

پنهنجي ديس جي اڪيلائپ کي
پنهنجو خواب آڇيان ٿي.
پر، گيت جيڪو ڀڳت ڪنور رام جي ڳلي ۾
ڪٺو ويو
منهنجي جسم جو عنوان
بڻجي نٿو سگهي.
هن جي ڇاتي تي
سر رکي مون روئڻ چاهيو ٿي،
امان ٻڌايو ته
منهنجي لڙڪن ۽ رڙين مان
هوءُ نکيٽي جو لوڪ گيت ٺاهي رهي آهي
۽… پوءِ!!
پنهنجي حصي ۾ آيل
سڀئي سوال
مون پنهنجي جسم ۾
پوکي ڇڏيا.
سمنڊ ڪناري تي
جواني جيڪو گيت گنگنائي ٿي
مون،
اهو گيت ڳائڻ جي ڪوشش ڪئي ته
لفظ مٽي ۽
مٽي منهنجو موت بڻجي ويئي.
هن جي هر سُڏڪي مان
مون هڪ نعرو ٿي جنميو
نعرو، جنهنجي مستقبل ۾ سوين ڪائناتون ۽
حال ۾ گندرف جون گوليون ۽
ڦاهي جا ڦندا لڙڪي رهيا آهن.
ڦاهي ۾ لڙڪيل ڳچين کان
مان، خوابن جي معنيٰ پڇان ٿي.
جن جا پٽ!
گندرف جون گوليو ن ڳيهي وڃن
ان ڳوٺ جي ماڻهن بجاءِ مون
ديوارن کي
( جيڪي گولين جي اوٽ بڻجي نه سگهيون)
روئندي ڏٺو آهي
”انهن جي رت مان مانيون
ڪڏهن ڦٽنديون…..؟؟“
منهنجا خواب

بار بار مونکان پڇن ٿا

Amar Sindhu, Philosophy Department Sindh University, Jamshoro , cell: 0091. 300.3033095

हिंदी अनुवाद: देवी नागरानी

देवी नागरानी
मेरे ख्वाब पूछते हैं

मैं

अपने देश की वीरानिगी को

अपने ख़्वाब अर्पण करती हूँ

पर गीत, जो भगत कँवर राम के गले में

वध कर दिया गया

मेरे जिस्म का उन्वान बन नहीं सकता

उसकी छाती पर सर रखकर

मैंने रोना चाहा था,

अम्माँ ने बताया कि

मेरे आँसुओं और चीख़ों से वह

निकेटी का लोक गीत बना रही है

और फिर….!

अपने हिस्से में आए

सभी सवाल

मैंने अपने जिस्म में बो दिए

समुद्र के किनारे पर

जवानी जो गीत गुनगुनाती है

मैने

वह गीत गाने की कोशिश की तो

लफ्ज़ मिट्टी और

मिट्टी मेरी मौत बन गयी

उसकी हर सिसकी से

एक नारा जन्म ले रहा था

नारा, जिसके मुस्तकबिल में सौ कायनातें और

हाल(वर्तमान) में गंदरफ की गोलियाँ और

फाँसी के फंदे लटक रहे हैं,

फाँसी में लटकती गर्दनों से

मैं, ख़्वाबों का मतलब पूछती हूँ

जिनकी ज़मीन गंदरफ की गोलियाँ निगल जाएँ

उस गाँव के लोगों की बजाय मैंने

दीवारों को

(जो गोलियों का कवच बन न पाई)

रोते देखा है।

“उन के ख़ून से रोटियाँ कब फूटेंगी”

मेरे ख़्वाब

बार बार मुझसे पूछते है.!

Devi Nangrani
09987928358
“चराग़े-दिल” ग़ज़ल-संग्रह का विमोचन
http://sindhacademy.wordpress.com/

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