घर फूंक कर तमाशा क्यों देख रहे हैं?

-जब लोकतंत्र में अपनी बात कहने की आजादी है तो फिर क्यों सड़कों पर उतर रहे हैं
-यह देश आपका है, इसकी संपत्ति भी आपकी है, तो फिर क्यों तोड़फोड़ कर रहे हैं और क्यों आग लगा रहे हैं

✍️प्रेम आनन्दकर, अजमेर।
👉वाह रे मेरे शूरवीरों, वाह रे मेरे अग्निवीरों, क्या खूब है। अपना ही घर फूंक कर तमाशा देख रहे हो। अगर सीने में इतनी ही आग है, तो दुश्मन देशों को रौंदने के लिए सीमाओं पर जाइए। देश की संपत्ति को क्यों नुकसान पहुंचा रहे हो। क्या यही आपका ध्येय है। आखिर किसलिए आप सड़कों पर उतरे हो। आखिर क्या चाहते हो। आपका मकसद क्या है। आपकी लड़ाई सरकार से है, ना कि जनता और ना ही देश के सार्वजनिक संपत्ति से। लोकतंत्र में आपको अपनी बात कहने, आवाज उठाने, विरोध-प्रदर्शन करने की आजादी है, लेकिन देश के साथ खिलवाड़ करने की आपको आजादी किसने दी? क्या आप कानून और संविधान से ऊपर हैं? यदि नहीं, तो फिर इस तरह सड़कों पर उतर कर रेलों, बसों और सार्वजनिक संपत्तियों को क्यों नुकसान पहुंचा रहे हो। क्या आपको नहीं पता कि यह देश आपका है। इस देश की सार्वजनिक संपत्ति आपकी है। इस देश के रखवाले आप हैं। इसकी संपत्ति के मालिक आप हैं और इस देश के भावी कर्णधार भी आप ही हैं। यदि आपको सरकार की किसी योजना या नीति से कोई नाराजगी है, आपत्ति है या आप उससे सहमत नहीं हैं, तो अपनी बात सरकार तक पहुंचाइए, सरकार से बात कीजिए। सरकार तक अपनी बात पहुंचाने का सीधा माध्यम आपके अपने क्षेत्र के सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि हैं। उनसे अपने मन की बात कहिए। शासन के अधिकारियों से जाकर मिलिए। अपनी बात को तर्कपूर्ण ढंग से रखिए। यदि आपकी बात शासन-प्रशासन के नुमाइंदों को अच्छी लगेगी तो निश्चित रूप से वे उस पर विचार भी करेंगे। आप खुद सोचिए, शासन-प्रशासन से बात किए बिना इस तरह सड़कों पर उतर कर रेलों, बसों और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाना और फूंकना कितना उचित है।

प्रेम आनंदकर
क्या आपको नहीं लगता कि आप अपना ही घर फूंक कर खुद तमाशा देख रहे हैं। जितनी ताकत आप सार्वजनिक संपत्तियों को आग लगाकर देश को बर्बाद करने में लगा रहे हैं, उतनी ताकत अच्छी सोच के साथ सकारात्मक मुद्दों पर लगाइए। अपना विजन देश के काम लाइए। आपके काम से विकास की रफ्तार बढ़ेगी और देश तरक्की करेगा। अभी तक यह बात समझ में नहीं आ रही कि आपने केंद्र सरकार की अग्निपथ यानी अग्निवीर योजना का अच्छी तरह अध्ययन भी नहीं किया होगा, इसके बावजूद आप क्यों सड़कों पर उतर कर अपना जीवन बर्बाद कर रहे हैं। क्या आपके माता-पिता ने आपको पढ़ा-लिखा कर और पालन पोषण कर इस दिन के काबिल बनाया कि आप अपने ही घर यानी इस देश को आग के हवाले करें? देश के सभी युवाओं से मेरा एक सवाल है, क्या आपके घर में आपकी भावनाओं, सोच और विचारों के विपरीत यदि कोई बात होती है या आपके माता-पिता, भाई-बहन आपकी बातों से सहमत नहीं होते हैं, आपकी बात नहीं मानते हैं या आपकी बात को पूरा करने में थोड़ा विलंब होता है या विचारों में मतैक्य होता है, तो क्या आप अपने परिवार में भी इस तरह का विद्रोह करेंगे या करते हैं? क्या अपने माता-पिता की खून-पसीने की कमाई से बने आशियाने को आग के हवाले कर देंगे? क्या घर की संपत्ति तोड़ेंगे या आग लगा देंगे? यदि आप ऐसा नहीं करते हैं, तो फिर क्यों देश को बर्बादी की आग में झोंक रहे हैं? आप युवा हैं और इस देश के भाग्य निर्माता भी। देश के बारे में सोचने, विचारने और कुछ करने का आपका दायित्व है। आप क्यों अपने दायित्व से विमुख हो रहे हैं। एक बात अच्छी तरह जान लीजिए कि आपकी भावनाओं को भड़का कर आपको सड़क पर उतारने वाले तथाकथित लोग आपके हितैषी नहीं, आपके दुश्मन हैं। वे आपका जीवन बर्बाद करना चाहते हैं। जो तथाकथित लोग अपने कतिपय स्वार्थों की पूर्ति के लिए आपको आगे कर रहे हैं, जरा उनसे सवाल कीजिए कि क्या आप अपने बच्चों को इस तरह सड़कों पर उतरने दे रहे हैं? राजनेताओं से भी आग्रह है, देश की सेवा के लिए अपनी संतानों को भी सेनाओं में भर्ती कराइए। देशभर में उपद्रव के जो हालात उपजे हैं, उसे देखकर ऐसा लगता है कि यह तथाकथित लोगों के कतिपय स्वार्थों का माजरा है। देश के युवाओं को यह माजरा अच्छी तरह समझना होगा। यदि आप देश के बारे में तनिक भी सोचते हैं, तो सड़कों से वापस अपने घरों को लौट जाइए और देश की रक्षा की खातिर सेना में जाने के लिए अपने आपको तैयार कीजिए। यदि आप इस योजना में कोई खामी मानते हैं, तो अपनी बात को बेहतर और तर्कपूर्ण ढंग से शासन-प्रशासन के सामने रखिए। ध्यान रहे आपकी बातों में वजन हो, तर्कपूर्ण हो और देशहित की सोच हो। हर समस्या का समाधान बातचीत से होता है, विद्रोह करने से नहीं। आप तर्क-वितर्क कीजिए, लेकिन कुतर्क से बचिए। यदि आपकी बात उचित लगेगी, तो शासन-प्रशासन उस पर जरूर मंथन कर सकता है। वैसे भी देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सेना प्रमुखों, रक्षा विशेषज्ञों और रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के साथ समीक्षात्मक मंथन भी कर रहे हैं। यह यकीन मानिए कि चाहे सरकार केंद्र की हो या राज्य की, देश के युवाओं के विपरीत कभी नहीं जाती है और ना ही जाएगी। देश में जिस तरह का माहौल उपजा है, उसे देखते हुए केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों ने युवाओं से अपील की है कि वह अपना विरोध-प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से करें। इस देश में लोकतंत्र की यह सबसे बड़ी खूबी है कि सभी को अपनी बात कहने और विरोध-प्रदर्शन करने की आजादी है। याद रखिए, इस देश में संविधान से बड़ा कोई नहीं है। यदि आप इसी तरह उपद्रव करते रहे, तो फिर कानून अपना काम करेगा। कहीं ऐसा नहीं हो कि कानून के डंडे से आपका अमूल्य भविष्य खराब होने का खतरा मंडरा जाए। भले ही कुछ राज्य सरकारें राजनीतिक मजबूरी और वैचारिक मतभेद के कारण केंद्र सरकार इस योजना का विरोध कर रही हैं, लेकिन अपने राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था को वह भी सहन नहीं करेंगी। उपद्रव, हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ करने वालों से राज्य सरकारें भी सख्ती से निपटेंगी। इसलिए यह जीवन भी आपका है और यह देश भी आपका है। इसकी सारी संपत्ति भी आपकी है। देश की सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा कीजिए और देश को बचाइए। यह देश है तो हम हैं। हम इस माटी की संतान हैं और इसके कण-कण का कर्ज चुकाना हमारा फर्ज है। तो आइए आप और हम मिलकर देश को हिंसा, आगजनी, उपद्रव, तोड़फोड़ और दंगों से बचाकर नए भारत का निर्माण करते हैं।

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