जानिए पौष बड़ा का महत्व है और क्यों मनाया जाता है

dr. j k garg

पौष बड़ा महोत्सव पौष माह (सर्दी के मौसम) में राजस्थान की एक अनोखी परंपरा है, जिसका महत्व धार्मिक, ज्योतिषीय और स्वास्थ्य से जुड़ा है; यह भगवान को मूंग दाल के पौष्टिक बड़े चढ़ाकर, ग्रह दोष शांति और ऊर्जा प्राप्ति के लिए मनाया जाता है, जो सर्दी में शरीर को गर्म रखने के साथ-साथ आस्था और सामाजिक सौहार्द बढ़ाता है। सवाल उतपन्न होता है कि इसको

पौष बड़ा महोत्सव  के रूप क्यों मनाया जाता है  ।
धार्मिक मान्यता के मुताबिक
पौष माह में भगवान विष्णु और सूर्य की पूजा महत्वपूर्ण मानी जाती है ।पौष बड़े का भोग लगाने से शनि, मंगल, बुध और चंद्र से जुड़े ग्रह दोष शांत होते हैं और परिवार के अंदर सुख-समृद्धि आती है। पौष बड़ा स्वास्थ वरधक है ।
पौष बड़ा (मूंग दाल के बड़े) और हलवा जैसे गर्म, पौष्टिक व्यंजन सर्दी में शरीर को ऊर्जा और गर्मी प्रदान करते हैं, मेटाबॉलिज्म बढ़ाते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करते हैं, जो इस ठंडे मौसम के लिए बहुत फायदेमंद हैं.
सांस्कृतिक परंपरा के अनुसार यह महोत्सव सर्दी के स्वागत का एक सुंदर तरीका है, जो सदियों से चला आ रहा है। यह आस्था, परंपरा और सामाजिक जुड़ाव का प्रतीक है, जो स्थानीय संस्कृति को जीवंत रखता है.
दान-पुण्य और दान: इस दौरान तेल, दाल, चीनी और मसाले बांटने की भी परंपरा है, जो दान-पुण्य और दूसरों की मदद करने के महत्व को दर्शाता है।
आध्यात्मिक लाभ: यह भक्तों में भक्ति भाव जगाता है और आध्यात्मिक आनंद प्रदान करता है, क्योंकि इस माह में ब्रह्मांडीय ऊर्जाएं स्थिर होती हैं, जिससे साधना अधिक फलदायी होती है।
पौष माह में मंदिरों और घरों में मूंग दाल के बड़े (पकौड़े) और हलवा बनाए जाते हैं.
इन पकवानों का भगवान को भोग लगाया जाता है.
फिर इन्हें छोटे कागज़ के कटोरों में रखकर प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है.
यह महोत्सव सिर्फ भोजन का उत्सव नहीं, बल्कि श्रद्धा, स्वास्थ्य और सामाजिक समरसता का अनूठा संगम है.
पौष बड़ा महोत्सव : आस्था, परंपरा, सामाजिक सौहार्द का संग पौष माह की कड़ाके की सर्दी में भगवान को विशेष पकवान पौष बड़े का भोग लगाकर श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरण की परंपरा सदियों से चली आ रही है।
जयपुर की स्थापना के साथ शुरू हुआ था पौषबड़ा महोत्सव: एक महीने में एक लाख किलो बड़े बनते हैं।
डाइट- फूड डायटिशियन अर्चना जैन बताती हैं कि पौषबड़ा प्रोटीन से भरा हुआ व्यंजन है। चवला में अच्छी क्वालिटी के अमीनो एसिड्स होते हैं, जो प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूती  देती है।
हिन्दू पंचांग में पौष माह देवताओं की गहन तपस्या और आंतरिक साधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दौरान ब्रह्मांडीय ऊर्जाएं शांत और स्थिर हो जाती है।
  राजस्थान के अंदर   में पौष पकौड़ी या पकौड़े बेसन या दाल से बनाए जाते हैं। ये एक मसालेदार व्यंजन है जिसे बड़ा भी कहते हैं। और हलवा सूजी या दाल से बनता है।
जयपुर का वो पौषबड़ा महोत्सव, जिसमें हजारों किलो हलवा व दाल बड़ा बनाया जाता है। सर्दियों के सीजन में लोगों को गर्म चीजें पंसद रहती हैं, इसलिए सबसे ज्यादा पौष महीने में इस महोत्सव का आयोजन होता है।
कुचामन सिटी के ठाकुरजी मंदिर में पौष बड़ा महोत्स धूम धाम से बनाया जाता है।
पौष माह की अनोखी परंपरा, साल में एक बार लगता है विशेष भोग, बालाजी को अर्पित किया जाता है।
पौष माह में भगवान विष्णु की पूजा का है विशेष महत्व श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर के महंत बाबू गिरीजी महाराज ने बताया कि पौष माह के अंतर्गत पौष बड़ा महोत्सव आयोजित किया जाता है।
इस दिन अपने आराध्य को लगाएं ये खास भोग, पूरी होगी आपकी आराधना।
पौषबड़ा महोत्सव एक ऐसा उत्सव है जो हिंदू पंचांग के पौष महीने में राजस्थान के विभिन्न शहरों और गांवों में बड़े उत्सव के साथ मनाया जाता है.जयपुर और सीकर में पौष बड़ा महोत्सव का आयोजन रियासतकाल से होता आ रह
जयपुर की स्थापना के साथ शुरू हुआ था पौषबड़ा महोत्सव: एक महीने में एक लाख किलो तक खा …
सर्दियों के मौसम में मूंग की दाल में पाए जाने वाले गुण कमजोर इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करती है। वहीं पौषबड़े में उड़द की दाल डायबिटीज कंट्रोल करने में कारगर है। फायदे- डॉक्टर्स के मुताबिक पौषबड़ा व हलवा अन्य गर्म खाद्य पदार्थों से शरीर पुष्ट बनता है।
आपको बता दें, कि पौष बड़ा महोत्सव के दौरान भरतपुर के मंदिरों में भगवान को भोग अर्पित करने के लिए विशेष प्रसाद तैयार किया जाता है।
लेखक ने अपने घर पर पौष बड़ा बनवा कर आत्मीय जन मे प्रसाद बाट्टा था।
डॉ जे के गर्ग
पूर्व संयुक्त निदेशक कालेज शिक्षा जयपुर
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