किसी हिंदी फिल्‍मों से कम नहीं है फिल्‍म ‘भेंट’ : अशीष मिश्रा

Bhent (1)यूं तो क्षेत्रीय फिल्‍म इंडस्‍ट्री कामर्सियल का चलन ज्‍यादा है, बावजूद इसके कई फिल्‍म मेकर सामानांतर फिल्‍में भी बनाने की हिम्‍मत करते हैं। ऐसे ही एक फिल्‍म मेकर हैं आशीष मिश्रा, जिन्‍होंने भोजपुरी भाषा में एक बेहतरीन फिल्‍म ‘भेंट’ बनाई है। यह फिल्‍म किसी हिंदी फिल्‍मों से कम नहीं है। इस फिल्‍म को अभी हाल ही छठे दिल्‍ली इंटरनेशनल फिल्‍म फेस्टिवल में बेस्‍ट रीजनल सिनेमा का अवार्ड दिया गया। इससे पहले ‘भेंट’ को शान-ए-अवध : लखनऊ दस्‍तक में भी बेस्‍ट रिजनल फिल्‍म के लिए चुना गया और अब दरभंगा फिल्‍म फेस्टिवल में यह फिल्‍म दस्‍तक देने वाली है।

पेंटिंग के शौकीन आशीष मिश्रा ने इस फिल्‍म को उन युवाओं को ध्‍यान में रखकर बनाया है, जो भोजपुरी संस्‍कृति से आते हैं, मगर कमर्सियल भोजपुरी सिनेमा की फूहड़ता से वे फिल्‍म नहीं देखते हैं। वैसे बोल्‍ड मोंक पिक्‍चर्स के बैनर तले बनी फिल्‍म ‘भेंट’ भोजपुरी सिनेमा में पहली पारलल फिल्‍म है, जो सिरियस और हार्ड कोर मैसेज ओरिएंटेड फिल्‍म है। इस फिल्‍म की एक और खासियत ये है कि फिल्‍म की भाषा भोजपुरी है, मगर पूरी फिल्‍म बैंगलोर में बनी है। जैसा कि अन्‍य इंडस्‍ट्री में होता है कि भाषा वहां की होती है और कहानी कहीं और चल रही होती है। फिल्‍म की कहानी दो यूथ की है, जिसमें वे एक दूसरे से प्‍यार में होते हैं। मगर किसी वजह से स्थिति ऐसी बनती है कि वे एक दूसरे से अलग हो जाते हैं। फिर दोनों की मुलाकात अचानक से बैंगलोर में होती है। फिल्‍म का क्‍लाइमेक्‍स काफी हर्ट टचिंग है। फिल्‍म में नमित तिवारी और रूचि मिश्रा ने जबरदस्‍त काम किया है। रूचि की यह पहली फिल्‍म है।

आशीष मिश्रा बनारस से आते हैं, मगर उनका जन्‍म मुंबई में हुआ। वे अपनी फिल्‍म ‘भेंट’ के बारे में कहते हैं कि उन्‍होंने नए फ्लेवर और नए बैकग्राउंड स्‍कोर के साथ इस फिल्‍म को बनाया है। वे बताते हैं कि भोजपुरी उन्‍हें बचपन से आ‍कर्षित करती है और उनके घर में भोजपुरी भाषा खूब बोली जाती है। तो भोजपुरी से उनका लगाव हो गया। फिर फेसबुक पर भोजपुरी फिल्‍मों के बारे बहुत कुछ पढ़ा लिखा। जिसकी हालत खराब थी। आशीष ने कहा – ‘क्‍योंकि भोजपुरी से मुझे लगाव रहा है और भोजपुरी सिनेमा के बारे में जानकार मुझे बुरा लगा। तो मैंने कोसने की जगह एक ऐसी लकीर खींचने की ठानी, जो लोगों को इंस्‍पायर्ड करे। मैंने खिंचाई करने में अपनी ऊर्जा व्‍यर्थ करने की जगह कुछ ऐसा करने का फैसला किया, जो लोगों की धारना बदल सके।‘

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