नई दिल्ली, 10 जून, 2022: अवार्ड्स फॉर एक्सीलेंस इन डिस्ट्रिक्ट स्किल डेवलपमेंट प्लानिंग का दूसरा संस्करण आज नई दिल्ली के डॉ. अम्बेडकर इंटरनेशनल सेंटर में बड़े धूमधाम से आयोजित किया गया, जहां शीर्ष 30 जिलों को कौशल विकास में उनके इनोवेटिव बेस्ट प्रैक्टिसिस के लिए सम्मानित किया गया। गुजरात का राजकोट, असम का कछार और महाराष्ट्र का सतारा क्रमशः सभी भाग लेने वाले जिलों में शीर्ष तीन में रहे।
30 राज्यों के जिला कलेक्टरों, जिलाधिकारियों और अन्य प्रतिनिधियों ने अवार्ड सेरेमनी में भाग लिया और अपने विचारों एवं अनुभवों को साझा किया। उन्होंने अपने जिलों में जमीनी स्तर पर किए गए कौशल विकास कार्यों का लेखा-जोखा दिया। अवार्ड के लिए तीस जिलों का चयन किया गया था।
बाद में एक इन्टरेक्टिव सेशन में, माननीय शिक्षा और कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्री, श्री धर्मेंद्र प्रधान, और कौशल विकास एवं उद्यमशीलता और इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी के माननीय राज्य मंत्री श्री राजीव चंद्रशेखर से अधिकारियों ने मुलाकात की अपने क्षेत्र में की गई बेस्ट प्रैक्टिसिस और कार्यों को साझा किया।
श्री धर्मेंद्र प्रधान ने जिला कलेक्टरों, जिलाधिकारियों और अन्य अधिकारियों को कुशल कार्यबल की डिमांड-मैपिंग करने और स्थानीय स्तर पर कौशल विकास पहल के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि स्किलिंग एक आजीवन प्रक्रिया है और DCs को कौशल विकास की निरंतरता को आगे बढ़ाना चाहिए और जिला स्तर पर इनोवेटिव प्लानिंग के द्वारा स्किल डेवलपमेंट ईकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में काम करना चाहिए।
हाल ही में टेक्नोलॉजी द्वारा आए व्यवधानों के कारण जिलों को दोनों मंत्रियों से कौशल विकास की दिशा में एक बॉटम-अप एप्रोच अपनाने की सलाह दी गई।
माइक्रो इम्पलीमेंटेशन के लिए मैक्रो-प्लानिंग के प्रधानमंत्री के विजन से मार्गदर्शित, DSDP अवार्ड्स राज्य और राष्ट्रीय स्तर के कौशल विकास योजना के साथ जिला योजनाओं को एकीकृत करने में DSCs के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में कार्य करते हैं।
सभी प्रतिभागियों को बधाई देते हुए शिक्षा और कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि कौशल विकास के लिए सभी योजनाओं को स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का रास्ता आत्मनिर्भर जिलों के निर्माण से होकर जाता है। कौशल विकास एवं उद्यमशीलता, और इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी के माननीय राज्य मंत्री श्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि ये अवार्ड्स एक सहायक स्किल ईकोसिस्टम बनाने के केंद्र के इरादे को दर्शाते हैं जहां मल्टी स्किलिंग के अवसरों ने ‘विलेज इंजीनियर्स’ को जन्म दिया है और आजीविका की संभावना में वृद्धि की है। उन्होंने कहा कि कौशल नियोजन के पीछे के विज्ञान और पद्धति का उद्देश्य कौशल और मल्टीपल जॉबरोल्स के कई रास्ते बनाकर स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना होना चाहिए।
राष्ट्रीय कौशल विकास निगम के चीफ़ ऑपरेटिंग ऑफिसर एंड ऑफ़िशिएटिंग चीफ़ एग़्जीक्यूटिव ऑफ़िसर श्री वेद मणि तिवारी ने भी स्किल इंडिया डिजिटल रोडमैप प्रस्तुत किया, जिसमें स्थानीय प्रशासन द्वारा स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए अपना ध्यान केंद्रित करने के लिए भविष्य के कौशल और अवसरों पर प्रकाश डाला गया।
जिलों द्वारा किए गए कार्यों की सराहना करते हुए, कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय के सचिव श्री राजेश अग्रवाल, ने कहा, “अपने यूनीक डेमोग्राफिक डिविडेंड के माध्यम से, भारत माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी के भारत के विश्व की कौशल राजधानी के विज़न को पूरा करने की राह पर है। उम्रदराज़ आबादी वाले कई देश स्किल्ड वर्कर्स के लिए भारत पर निर्भर हैं और वैश्विक कंपनियां भारत में कारोबार शुरू करने की इच्छुक हैं। देश के युवाओं को स्किल, रीस्किल और अपस्किल करने की तत्काल आवश्यकता है और जिले इस मिशन को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। मैं सभी जिलाधिकारियों को वैश्विक परिदृश्य पर नजर रखने और उसके अनुसार अपने कौशल विकास कार्यक्रमों को अवाइन करने के लिए प्रोत्साहित करता हूं।
हाई वैल्यु एडिशन इकोनॉमी के निर्माण के लिए, जिलों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रशिक्षित युवाओं को भी इस प्रक्रिया में व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हो। मैं DSDP अवार्ड्स के सभी विजेताओं को बधाई देता हूं और फन्क्शनल एंड इनोवेटिव प्लान्स बनाने में उनके उत्कृष्ट प्रयास की सराहना करता हूं। मुझे विश्वास है कि जिला स्तर के संसाधनों और संस्थानों के अधिकतम उपयोग से हम स्किल इंडिया बनाने के सपने को पूरा करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेंगे
जीतने वाले जिलों में, राजकोट DSC ने जिले में कौशल विकास को बढ़ाने के लिए कई परियोजनाओं को लागू किया है। विकलांग व्यक्तियों को कुशल बनाने पर एक मजबूत ध्यान देने के साथ, जिले ने सीखने की अक्षमता और डिस्लेक्सिया वाले लोगों को बढ़ावा दिया है।
शॉर्ट सेल्फ लाइफ और उच्च परिवहन लागत असम के कछार जिले के अनानास किसानों के लिए सप्लाई चेन चुनौती पेश कर रही थी, जिससे उन्हें बड़ी मात्रा में फलों का डिस्पोज़ करने और उन्हें बाजार भाव से कम मूल्य पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा। स्थानीय स्तर पर अनानास उत्पादों के निर्माण के लिए एक प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करके, कछार DSC समस्या का समाधान करने के हेतु एक त्वरित समाधान लेकर आया है। इससे किसानों को अनानास को एक बार फिर से अच्छे मुनाफे पर बेचने और मोल-तौल करने की सहलूयित मिलेगी।
महाराष्ट्र के सतारा में, DSC ने आपदा प्रबंधन के लिए कौशल को मजबूत करने और कार्यबल को प्रशिक्षित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों को लागू किया। जिले के पास कौशल प्रशिक्षण के साथ कोविड के दौरान प्रभावित महिलाओं को सशक्त बनाने की जिम्मेदारी भी है।
DSDP अवार्ड्स जून 2018 में एमएसडीई द्वारा स्किल एक्यूजेशन एंड नॉलेज अवेयरनेस फॉर लाइवलीहुड प्रमोशन (SANKALP) योजना के तहत विकेंद्रीकृत योजना को बढ़ावा देने, कौशल विकास के क्षेत्र में जिलों द्वारा किए गए असाधारण और अभिनव कार्यों को स्वीकार करने और पुरस्कृत करने के लिए स्थापित किए गए थे। पहला DSDP अवॉर्ड्स 2018-19 में आयोजित किया गया था, जिसमें 19 राज्यों के 228 जिलों ने इस पहल में भाग लिया था। कौशल विकास पहल के साथ इनोवेशन को बढ़ावा देने और स्थानीय आजीविका को सक्षम करने की योजना वाले जिलों को अवार्ड्स के लिए चुना गया था।
एमएसडीई की परिकल्पना है कि ये अवार्ड्स सभी जिला कौशल समितियों (DSCs) को प्रोत्साहित करेंगे और जिला स्तर पर लक्षित परियोजनाओं को लागू करने के लिए क्षमताओं का उपयोग करके DSDP के बारे में बेहतर समझ को बढ़ावा देंगे। परियोजना का उद्देश्य SANKALP’s की प्राथमिक पहल के प्रभाव को बढ़ावा देकर राज्य और जिला स्तर पर कौशल विकास के लिए संस्थागत मैकेनिज्म को मजबूत करना है।
अवार्ड एंट्रीज़ का मूल्यांकन करने के लिए आईआईटी दिल्ली और आईआईटी खड़गपुर को मूल्यांकन भागीदार के रूप में चुना गया था।