भारत में बदल रहा है शीर्ष नेतृत्व का चेहरा, 55% सी-सूट पदों पर अब मिलेनियल्स का दबदबा: लिंक्‍डइन

मुंबईजुलाई 2026 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते इस्तेमाल के साथ भारत में कंपनियों के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचने का रास्ता भी तेजी से बदल रहा है। अब केवल एक ही क्षेत्र या पारंपरिक करियर पथ पर आगे बढ़ने के बजाय अलग-अलग उद्योगों और भूमिकाओं का अनुभव रखने वाले पेशेवर नेतृत्व की दौड़ में आगे निकल रहे हैं।

दुनिया के सबसे बड़े प्रोफेशनल नेटवर्क लिंक्‍डइन के ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत में 55% सी-सूट पदों (कंपनियों के शीर्ष प्रबंधन) पर अब मिलेनियल्स हैं। इसके साथ ही वे देश के वरिष्ठ कॉरपोरेट नेतृत्व का सबसे बड़ा आयु वर्ग बन गए हैं। पिछले सात वर्षों में भारतीय सी-सूट में मिलेनियल्स की हिस्सेदारी 14.5% बढ़ी है, जो नेतृत्व के बदलते स्वरूप की ओर इशारा करती है।

विविध अनुभव बन रहा नेतृत्व की नई ताकतलिंक्‍डइन के आंकड़ों के मुताबिक, अब केवल एक ही उद्योग में लंबे समय तक काम करने का अनुभव नेतृत्व की सबसे बड़ी कसौटी नहीं रह गया है। पहले जहां करीब 80% सी-सूट अधिकारी केवल एक ही उद्योग का अनुभव रखते थे, वहीं अब यह आंकड़ा घटकर 58% रह गया है। इससे साफ है कि अलग-अलग कंपनियों, जिम्मेदारियों और कारोबारी परिस्थितियों में काम करने का अनुभव अब ज्यादा अहम माना जा रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, एआई ने इस बदलाव की रफ्तार और बढ़ा दी है। 84% भारतीय सी-सूट अधिकारियों का मानना है कि एआई उनकी कंपनियों में नई भूमिकाएं और अवसर पैदा कर रहा है। सीएमओ के बीच यह आंकड़ा 94% है। वहीं, 84% वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि एआई टूल्स से मिलने वाले सुझाव अब उनकी निर्णय प्रक्रिया का अहम हिस्सा बन चुके हैं।

लिंक्‍डइन इंडिया के कंट्री मैनेजर और वाइस प्रेसिडेंट (एलएसएस) कुमारेश पट्टाभिरामन ने कहा, “भारत का शीर्ष कॉरपोरेट नेतृत्व ऐसे दौर में प्रवेश कर चुका है, जहां चुनौतियां पहले से कहीं अधिक हैं। एआई के कारण पुराने कामकाजी तरीके तेजी से अप्रासंगिक हो रहे हैं। ऐसे में लीडर्स को बदलते हालात के अनुरूप तेजी से फैसले लेने होंगे, भले ही उनके सामने हर सवाल का स्पष्ट जवाब मौजूद न हो। आने वाले समय में वही लीडर सबसे सफल होंगे, जो एआई को निर्णय लेने में एक प्रभावी सहयोगी के रूप में इस्तेमाल करेंगे, तकनीक, प्रतिभा और कारोबार से जुड़ी टीमों को शुरुआत से साथ लेकर चलेंगे तथा भविष्य में जरूरी कौशलों की कमी को समय रहते पहचान सकेंगे। इतना ही नहीं सबसे बड़ी बढ़त उन्हीं नेतृत्‍वकर्ताओं को मिलेगी जो बाजार की बदलती रफ्तार के साथ लगातार सीखते रहेंगे।‘’

एआई को तेजी से अपनाने का बढ़ता दबावरिपोर्ट के अनुसार, हर पांच में से लगभग चार भारतीय सी-सूट अधिकारी मानते हैं कि उन पर एआई को तेजी से अपनाने का दबाव है, जबकि उसके प्रभाव का सही आकलन करने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। यह दबाव सीएमओ (82%) और सीटीओ (81%) में सबसे अधिक है। एआई ग्राहकों से जुड़ने और नई तकनीकों को अपनाने के तौर-तरीकों को तेजी से बदल रहा है। ऐसे माहौल में 39% भारतीय सी-सूट अधिकारियों ने लगातार बनी अनिश्चितता के बीच तेजी से सही निर्णय लेना अपनी सबसे बड़ी चुनौती बताया। सीएमओ (46%) और सीईओ (43%) के बीच यह चिंता सबसे अधिक है।

भविष्य की जरूरतों को लेकर स्पष्टता का अभावएआई के बढ़ते इस्तेमाल से कंपनियों में भूमिकाएं और जरूरी कौशल तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में 51% भारतीय सी-सूट अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में उनकी कंपनियों को किन कौशलों और भूमिकाओं की जरूरत होगी, इसे लेकर स्पष्टता नहीं है। सीएमओ में यह आंकड़ा 58% है। रिपोर्ट के अनुसार, कर्मचारियों की भविष्य की योजना अब केवल एचआर की जिम्मेदारी नहीं रह गई है, बल्कि कारोबार, तकनीक, ग्राहक रणनीति और संगठनात्मक ढांचे से जुड़ा नेतृत्व का साझा विषय बन गई है।

एआई निवेश से नवाचार की सबसे ज्यादा उम्मीदरिपोर्ट के मुताबिक, हर 10 में से करीब 9 भारतीय सी-सूट अधिकारी मानते हैं कि एआई में निवेश का सबसे बड़ा उद्देश्य नवाचार है। 92% सीएमओ ने इसे सबसे अहम बताया, जबकि 91% सीईओ और 91% सीटीओ भी इससे सहमत हैं। सीएचआरओ के बीच यह आंकड़ा 82% रहा। रिपोर्ट के अनुसार, अब कंपनियां एआई को केवल उत्पादकता बढ़ाने के साधन के रूप में नहीं देख रहीं। उनका ध्यान नए उत्पाद विकसित करने, ग्राहकों के अनुभव को बेहतर बनाने, काम करने के नए तरीके अपनाने और प्रतिस्पर्धा में बढ़त हासिल करने पर भी है।

शीर्ष नेतृत्व में बढ़ रही AI कौशल की अहमियत: एआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ शीर्ष प्रबंधन से अपेक्षित कौशल भी बदल रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सी-सूट स्तर पर सबसे तेजी से उभर रहे पांच प्रमुख कौशलों में से चार एआई से जुड़े हैं। इनमें एआई एजेंट्स, एआई प्रो‍डक्टिविटी, रिट्राइवल ऑगमेंटेड जेनरेशन (आरएजी) और एआई स्‍ट्रैटेजी शामिल हैं। इनमें एआई एजेंट्स सबसे तेजी से उभरने वाला कौशल है, जिसकी मांग में सालाना 18.6% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं, 2020 के बाद से एआई और तकनीकी विशेषज्ञता से जुड़े कौशलों की मांग 10.9% बढ़ी है। इससे स्पष्ट है कि कारोबारी रणनीति में एआई की बढ़ती भूमिका के साथ वरिष्ठ नेतृत्व की जरूरतें भी तेजी से बदल रही हैं।

 

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