नई दिल्ली, 9 अक्टूबर, 2026- इंडिया मोबाइल कांग्रेस (आईएमसी) के 10वें संस्करण की ऐतिहासिक शुरुआत के बाद दुनियाभर से उद्योग के दिग्गज, नीति निर्माता, दूरसंचार ऑपरेटर और अकादमिक क्षेत्र के लोग “बिना सीमाओं के विस्तार” थीम को आगे बढ़ाने के लिए एक साथ आए। इस दिन, 6जी टेस्टबेड्स, डायरेक्ट-टु-डिवाइस सैटेलाइट कनेक्टिविटी और एआई-नेटिव डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से आय जैसे विषयों पर गहरी रणनीतिक चर्चा की गई जिससे यह दिन फोरम के सबसे अहम कार्यक्रमों में से एक बन गया।
इंडिया मोबाइल कांग्रेस (आईएमसी) 2026 के 10वें संस्करण का माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आज आधिकारिक रूप से उद्घाटन किया गया। उन्होंने टेक्नोलॉजी, अनुसंधान, उद्योग, निवेश और विचारों को एकजुट करने और मानवता की सेवा के विचारों में एक अहम भूमिका निभाने के लिए आईएमसी की सराहना की। इस बात पर जोर देते हुए कि टेक्नोलॉजी का विस्तार केवल भरोसे से ही होता है, प्रधानमंत्री ने टेक्नोलॉजी के उपभोक्ता से वैश्विक निर्माता के तौर पर भारत के तेजी से हुए विकास को रेखांकित किया।
उद्घाटन सत्र में इस फोरम को संबोधित करते हुए माननीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, “भारत ने यह साबित कर दिया है कि डिजिटल स्तर पर विस्तार के लिए किफायतीपन से समझौता करने की जरूरत नहीं है। यूपीआई, आधार और डिजीलॉकर किफायती कनेक्टिविटी की क्रांतिकारी क्षमता को दर्शाते हैं। मोबाइल फोन, बैंक की शाखाएं बन गए हैं और दूरसंचार नेटवर्क भारत के हाईवे बन गए हैं। डिजिटल प्रणाली में एक अरब लोगों को शामिल करके हम नवप्रवर्तकों और उद्यमियों को जोड़ेंगे। हमारी जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि जगह या आमदनी उनके मौकों या संभावनाओं को सीमित नहीं करें।”
आईएमसी के सीईओ रामकृष्ण पी. ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10वें इंडिया मोबाइल कांग्रेस में अपने संबोधन में इस बात को फिर से दोहराया कि आईएमसी अब सिर्फ टेक्नोलॉजी प्रदर्शित करने का मंच नहीं रह गया है, बल्कि इसका विकास उससे कहीं आगे हो चुका है। उनका यह कहना कि आईएमसी भारत की डिजिटल वृद्धि का आईना रहा है, इस बात को रेखांकित करता है कि देश के डिजिटल रूप में सशक्त राष्ट्र बनने के साथ साथ यह प्लेटफॉर्म भी किस तरह विकसित हुआ है। जैसे ही आईएमसी अपने अगले चरण में प्रवेश कर रहा है, हमारा ध्यान इस बात पर होगा कि इस प्लेटफॉर्म को और अधिक परिणाम उन्मुख बनाया जाए और भारतीय नवप्रवर्तन को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाया जाए।”
केंद्र सरकार के संचार मंत्रालय के अधीन दूरसंचार विभाग और सेलुलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) द्वारा आयोजित आईएमसी के इस ऐतिहासिक 10वें संस्करण में 100 से अधिक देशों से 1.5 लाख से अधिक लोग शामिल हो रहे हैं।
इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 के उद्घाटन के दिन उद्योगपतियों और नीति निर्माताओं के विचार-
सीओएआई के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल डॉक्टर एसपी कोचर ने कहा, “इंडिया मोबाइल कांग्रेस के एक दशक पूरा होने के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का डिजिटल रूप में सशक्त भारत का विजन, परिवर्तन के अगले दशक के लिए दिशा तय करता है। भारत के मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर ने कनेक्टिविटी, एआई, 6जी और उभरती टेक्नोलॉजी से चलने वाले वाले भविष्य के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया है। अगला दशक भारत की डिजिटल यात्रा को बड़े पैमाने से वैश्विक प्रभाव तक ले जाने और देश को दुनिया के लिए एक निर्माता और भरोसेमंद टेक्नोलॉजी लीडर के तौर पर स्थापित करने का है।”
एरिक्सन के सीटीओ (एपीएसी) मैग्नस एवरब्रिंग ने कहा, “नेटवर्क तेजी से उद्देश्य आधारित होते जा रहे हैं जिसमें ऑपरेटर अपनी जरूरत का परिणाम या सेवा बताते हैं और नेटवर्क खुद तय करता है कि उसे सबसे अच्छे तरीके से कैसे दिया जाय। यह तब बहुत जरूरी होगा जब ऑपरेटर ग्राहकों की खास जरूरतों के हिसाब से ऑन डिमांड नेटवर्क क्षमताएं जैसी अलग व्यक्तिगत सेवाएं देने की कोशिश करेंगे। पहले से कॉन्फिगर किए गए नेटवर्क संसाधनों से गतिशील, इंटेलिजेंट कॉन्फिगरेशन की ओर रुख करने के लिए नेटवर्क को डिजाइन और चलाने के तरीके में बुनियादी बदलाव की जरूरत होगी।”
जीएसएमए की स्पेक्ट्रम प्रमुख लुसियाना कैमरगोस ने कहा, “हमें एक ऐसी नियामकीय रूररेखा की जरूरत है जो इस सर्विस को संभव बनाए और साथ ही यह पक्का करे कि टेरेस्ट्रियल नेटवर्क हस्तक्षेप से सुरक्षित रहे। डिवाइस की उपलब्धता एक और महत्वपूर्ण बात है खासकर तब जब सैटेलाइट सेवाएं विशेष स्पेक्ट्रम बैंड पर निर्भर करती हों। इसलिए, सरकारों और उद्योग को मिलकर इसे अपनाने में आ रही रुकावटों जैसे इसे खरीदने की क्षमता और डिजिटल साक्षरता आदि को दूर करने के लिए काम करने की जरूरत है ताकि कनेक्टिविटी उन लोगों तक पहुंच सके जिन्हें इसकी सबसे अधिक जरूरत है।”
भारती एयरटेल के उपाध्यक्ष (नियामकीय) तरुण चित्कारा ने कहा, “सीमावर्ती या पहाड़ी इलाकों जैसे अहम क्षेत्रों में जहां कनेक्टिविटी की असल जरूरत तो है, लेकिन आबादी बहुत कम है, डायरेक्ट-टु-डिवाइस वास्तव में बड़ा बदलाव ला सकता है। वहां के लिए मुझे तीन जरूरतें दिखाई देती हैः सही नियामकीय ढांचा, तकनीकी एकीकरण और अंततः वाणिज्यिक विचार। बुनियादी ढांचा तैयार है और तकनीकी एकीकरण पर काम किया जा सकता है। अब हमें एक ऐसी नियामकीय रूपरेखा की जरूरत है जो इन सेवाओं को संभव बनाए और ऑपरेटर्स के लिए ऐसा माहौल तैयार करे जिससे वे उन जगहों पर कनेक्टिविटी पहुंचा सकें जहां पारंपरिक आधारभूत ढांचा तैयार करना व्यावसायिक रूप से फायदेमंद नहीं है।”