अजमेर के पत्रकारों-साहित्यकारों की लेखन विधाएं

भाग सत्रह
स्वर्गीय श्री नवलराय बच्चानी
सिंधी भाषा व साहित्य की सुरक्षा व विकास के लिए अजमेर के पूर्व विधायक स्वर्गीय श्री नवलराय बच्चानी ताजिंदगी काम किया। नब्बे से भी अधिक उम्र तक उन्होंने सिंधी भाषी बच्चों को सिंधी लिपी की शिक्षा देने के लिए विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से कक्षाएं आयोजित कीं। वे सन् 1979 में राजस्थान सिंधी अकादमी की प्रथम सामान्य सभा के सदस्य रहे। सन् 1994 से 97 तक अकादमी के अध्यक्ष रहे। अकादमी ने उन्हें सन् 2005 में टी. एल. वासवाणी पुरस्कार से नवाजा। उन्होंने अनेक पुस्तकें लिखीं, जिनमें झूलेलाल संक्षिप्त जीवन परिचय, सिंधुपति महाराजा दाहरसेन का जीवन चरित्र, डॉ. हेडगेवार का जीवन परिचय, वृहद सिंधु ज्ञान सागर ग्रंथ, गुरुजी गोलवलकर, सिंध, वृहद झूलेलाल पुस्तक आदि प्रमुख हैं। उन्होंने श्रीमती कमला गोकलानी के सहयोग से के. आर. मलकानी की अंग्रेजी पुस्तक सिंध स्टोरी का सिंधी अनुवाद किया। उन्होंने भारतीय सिंधु महासभा की अनेक स्मारिकाओं का संपादन किया। अनगिनत साहित्यिक गोष्ठियों में शिरकत की और आकाशवाणी से उनकी अनेक वार्ताएं प्रसारित हुईं। 7 मार्च 2010 को भारतीय सिंधु सभा व श्री झमटमल तोलाराम वाधवानी चेरिटेबल ट्रस्ट की ओर से मुंबई में अच्छे समाज सेवक के रूप में उन्हें सम्मानित किया गया। इसी प्रकार 10 अप्रैल 2010 को सिंधी शिक्षा विकास समिति की ओर से भी सम्मानित किया गया।

स्वर्गीय श्री नरेन्द्र राजगुरू
वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक रहे स्वर्गीय श्री नरेन्द्र राजगुरू का नाम हालांकि आम जन मानस में अंकित नहीं है, मगर अपने जमाने में पत्रकारिता जगत में जाने-माने हस्ताक्षर थे। उन्होंने देश की कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में अपनी सेवाएं दी हैं और तकरीबन अस्सी वर्ष की उम्र में भी सतत लेखन कार्य जारी रखे हुए थे। उन्होंने जोधपुर में बीए ऑनर्स व मुंबई में पत्रकारिता का डिप्लोमा किया। उन्होंने डॉ. सत्यकामत विद्यालंकार के अभियान सप्ताहिक से लेखन कार्य शुरू किया। खादी ग्रामोद्योग मुम्बई व जयपुर में प्रचार सहायक व प्रचार अधिकारी रहे। इसके बाद डीसीएम की गृह पत्रिका से संपादन का कार्य शुरू किया। हिंद सायंकाल लि., मुम्बई में प्रचार अधिकारी के रूप में काम किया। हिंदी डायजेस्ट नवनीत, मुंबई में उपसंपादक के रूप में काम किया। मुम्बई में ही अनुजा मासिक पत्रिका आरंभ कर उसका संपादन किया। मुम्बई में ही दैनिक सांध्यकालीन समाचार पत्र सायंदीप का संपादन किया। वे टाइम्स ऑफ इंडिया पत्र समूह, मुंबई में प्रशासनिक विभाग सहायक व अधिकारी के रूप में काम किया, लेकिन साथ ही लेखन कार्य भी जारी रखा। उन्हें लेखन की प्रेरणा डॉ. सत्येन्द्र जी व डॉ. धर्मवीर भारती से मिली। देश ही नहीं विदेश में ओमान के एक छोटे पत्र समूह और विश्व प्रसिद्ध संस्था नाफेन में भी काम किया। इस दौरान उन्हें लंदन व रूस जाने का मौका मिला। सन् 1949 से उनकी कहानियां देश की अनेक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं। उनकी प्रकाशित पुस्तकें इस प्रकार हैं:- उपन्यास एक और नीलम, उपन्यास गुलनार, कहानी संग्रह विश्वकर्मा के आंसू, कहानी संग्रह उगते सूरज की लाली, संस्मरण वृतांत दर्द की खुली किताब(मीना कुमारी), दिल तो पागल है, गजल संग्रह (अंग्रेजी में), उपन्यास बीहड़ों की रानी। उन्होंने पत्रकार निदेशिका का भी किया। वे अजयमेरू प्रेस क्लब के अध्यक्ष भी रहे।
-तेजवानी गिरधर
7742067000

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