पिता इश्वर का रूप है और माँ प्रक्रति का वरदान है . दोनों ही सम्मान के पात्र हैं. जिस प्रकार पुत्र द्वारा पिता का सम्मान किया जाना जरूरी है उसी प्रकार पिता द्वारा भी पुत्र का सम्मान किया जाना चाहिए, पिता को अपने पिता से मिले संकार अपने पुत्र को भी प्रदान करने चाहिए.घर का अच्छा और आध्यात्मिक माहोल संतान के सर्वांगीण विकास में सहायक होता है. ये उदगार आज बीकानेर के कादम्बिनी क्लब द्वारा फादर्स डे के अवसर पर स्थानीय होटल मरुधर हेरिटेज के विनायक सभागार में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में उत्तर पश्चिम रेलवे के वरिष्ठ मंडल इंजीनीयर श्री निर्मल शर्मा ने व्यक्त किये .उन्होंने अपने एक राजस्थानी गीत के माध्यम से भी पिता की महिमा को बताया. कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. उषा किरण सोनी ने कहा कि पिता बीज तत्व है और इस संसार के विकास का आधार है पिता द्वारा दी गई शिक्षा आजीवन पुत्र का मार्गदर्शन करती है.हमारे शास्त्रों में जिन पांच ऋणों का जिक्र किया गया है उनमे पितृ ऋण सबसे महत्वपूर्ण है व्यक्ति को इस ऋण से जुड़े कर्तव्यों का जरूर निर्वाह करना चाहिए.
कार्यक्रम के प्रारम्भ में क्लब के संयोजक डॉ. अजय जोशी ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि आज के दौर में पिता और संतान के बीच संवादहीनता बहुत तेजी से बढ़ रही है इस कारण एक साथ रहते हुए भी पिता पुत्र के बीच दूरियां बढ़ रही है यह स्थिति समाज और देश के लिए घातक है इसको समाप्त करने कि दिशा में प्रभावी कदम उठाये जाने जरुरी हैं .क्लब के सह संयोजक डॉ. नरसिंह बिन्नानी ने कहा कि आज के दौर में पिता पुत्रों के संबंधों को नये सिरे से परिभाषित किया जाना जरूरी है.क्लब के समन्वयक कवि और कथाकार राजाराम स्वर्णकार ने कहा कि पिता एक अनुभवी बुनकर होता है जो अपनी संतान की जिन्दगी बुनता है.उन्होंने अपनी एक कविता के माध्यम से पिता पुत्र के संबंधों को प्रकट किया. हास्य कवि बाबू लाल छंगानी ने एक कविता के माध्यम से बताया कि यदि पिता यदि बुरी आदतों का शिकार हो तो उसके घर परिवार पर कितना बुरा प्रभाव पड़ता है.शिक्षाविद मोहन लाल जांगिड ने कहा कि पिता को कठोर और माँ को ममता की मूरत मन जाता है जबकि पिता भी मन से उतना ही कोमल होता है जितनी कि माँ. लेकिन वह अपनी भावनाएं खुलकर व्यक्त नही करता इसलिए उसको कठोर माना जाता है. डॉ संजू श्रीमाली ने कहा कि संतान के लिए माता और पिता दोनों की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है उन्होंने इसी भूमिका को अपनी कविता के माधाम से भी व्यक्त किया.इस अवसर पर डॉ. प्रकाश चन्द्र वर्मा ने अपना गीत प्रस्तुत किया. डॉ. कृष्णा आचार्य, श्री नरसिंह भाटी, डॉ. महेंद्र चाडा, श्रीमती कांता चाडा, कवि अजीत राज, श्री बी.डी. हर्ष,श्री गिरिराज पारीक, असद अली असद,डॉ. ज़िया उल हसन कादरी, व्यवसायी हेमचंद बांठिया, कमल आचार्य आदि कई वक्ताओं और कवियों तथा समाज के प्रबुद्ध लोगों ने अपने विचारों और कविताओं के माध्यम से परिवार में पिता की बुमिका के विविध आयामों पर चर्चा की. कार्यक्रम का संचालन हास्य कवि श्री बाबूलाल छंगानी ने किया और आभार ज्ञापन कर्मचारी नेता गिरिराज पारीक ने किया.
डॉ. अजय जोशी
संयोजक
कादम्बिनी क्लब,बीकानेर -334001
मोबाइल 09424968900