पण्डित मोती लाल जोशी स्मृति संस्कृत सुधी एवं प्रतिभा सम्मान समारोह सम्पन्न

बीकानेर,9 सितम्बर। पण्डित मोती लाल जोशी स्मृति संस्कृत सुधी एवं प्रतिभा सम्मान समारोह 2018 रविवार को पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के प्रेक्षागृह में सम्पन्न हुआ।
राजस्थान संस्कृत साहित्य सम्मेलन व बीकानेर विचारमंच द्वारा आयोजित इस समारोह में वक्ताओं ने संस्कृत एवं संस्कृति के संरक्षण पर जोर दिया। समारोह की अध्यक्षता करते हुए पूर्व मंत्री डाॅ.बी.डी.कल्ला ने आज संस्कृत शिक्षा पर संकट मंडरा रहा है। सरकार संस्कृत शिक्षा निदेशालय को समाप्त करने की कोशिस कर रहीं है। उन्होंने संस्कृत भाषा की हानि नहीं होने दी जायेगी। उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा देवों की भाषा है। धर्म की हानि होने पर देवता अवतार लेते हैं। संस्कृत भाषा को अगर हानि पहुंचाई जाती है,तो संस्कृत भाषा से जुड़े विद्धवान सहित आमजन इसका विरोध करेंगे। संस्कृत भाषा में ही हमारे 16 संस्कार होते हैं। संस्कृत भाषा शैली में संक्षिप्तीकरण उसकी विशेषता है,जो दुनिया की किसी भी भाषा में नहीं है। उन्होंने भारत में पश्चिमी संस्कृति के प्रचलन पर चिन्ता प्रकट की और कहा कि हमें संस्कृत भाषा के विकास पर चिन्तन करना होगा।
इस अवसर पर राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति व काशी विश्वविद्यालय के प्राध्यापक युगल किशोर मिश्र ने भारतीय संस्कृति और संस्कृत के संरक्षण पर जोर दिया । उन्होंने कहा कि पण्डित मदन मोहन मालवीय द्वारा स्थापित काशी हिन्दू विश्व विद्यालय की स्थापना में बीकानेर राजघराने का सहयोग रहा है। पूर्व महाराजा गंगासिंह ने पंडित मदन मोहन मालवीय का न केवल विचारों से बल्कि हर तरह से सहयोग किया। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय का हर विद्यार्थी महाराजा गंगासिंह के योगदान के बारे में जानता है। उन्होंने बीकानेर राजघराने द्वारा काशी में बनाई गई सम्पतियों पर प्रकाश डाला और कहा कि आजादी के बाद राजस्थान सरकार के आग्रह पर मेरे दादा जी और पिता जी ने 50 सालों तक डूंगरवेश्वर मंदिर और धर्मशाला की जिम्मेदारी ली। इसलिए मेरा बीकानेर से विशेष लगाव है।
उन्होंने पण्डित मोतीलाल जोशी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला और कहा कि उन्होंने संस्कृत शिक्षा जगत के लिए राजस्थान में जो कार्य किए वो अस्मणीय है। उन्होंने कहा कि उत्तर-प्रदेश की काशी संस्कृत जगत के लिए विख्यात है और राजस्थान का जययुर भी छोटी काशी के रूप में विख्यात है। उन्होंने कहा कि मैंने यूपी की सरकार के समक्ष अनेकांे बार कहा कि काशाी संस्कृत की राजधानी जरूर है, लेकिन जो काम राजस्थान ने प्रथम संस्कृत शिक्षा विभाग स्थापित किया,वह काम हम उत्तर-प्रदेश में नहीं कर पाई। उत्तर प्रदेश राजस्थान की तुलना में संस्कृत के विकास के मामले में बहुत पिछड़ा है।
समारोह के विशिष्ठ अतिथि विधायक डाॅ.राजकुमार शर्मा ने देश के बिगड़ते माहौल पर चिन्ता प्रकट की और कहा कि आज भारतीय संस्कृति को बचाने की बहुत जरूरत है। यह संस्कृति तभी बच पायेगी,जब संस्कृत भाषा का विकास होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में संस्कृत विश्व विद्यालय में नाम मात्र छात्र ही रह गए है। उन्होंने कहा कि जब संस्कृत भाषा ही नहीं होगी तो आयुर्वेद की कल्पना ही नहीं की जा सकती है। उत्तर-पश्चिम रेलवे मण्डल बीकानेर के प्रबंधक अनिल दूबे कहा कि संस्कृत शिक्षा से सुसंस्कृत नागरिकों का निर्माण होता है। हमें अपने जीवन को स्वस्थ रखने के लिए स्वच्छता को अपनाना चाहिए।
समारोह के संयोजक बनवारीलाल शर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया और पंडित मोतीलाल का संस्कृत शिक्षा के विकास में योगदान पर विस्तार से जानकारी दी। बीकानेर विचार मंच ने दस साल पहले इसकी शुरूआत की थी। मंच ने बीकानेर की छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास किए। उन्होंने कहा कि इस मंच ने 2010 में पण्डित मोतीलाल जोशी का अभिनन्दन किया था। उन्होेंने कहा कि पण्डित मोतीलाल एक नाम नहीं एक संस्थान था। संस्कृत शिक्षा,संस्कृत भाषा के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उन्हींे के प्रयास से देश का राजस्थान पहला राज्य है,जहां से संस्कृत विभाग अलग से स्थापित है।
इस अवसर पर अतिथियों ने पूर्व कुलपति राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय डाॅ.युगल किशोर को लाईफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा। इसमें उन्हें 21 हजार रूपये का चैक,शाॅल,श्रीफल और स्मृति चिन्ह प्रदान किया। इसके अलावा संस्कृत विकास और अन्य उल्लेखनीय सेवाआंे के लिए 25 प्रतिभाओं को भी सम्मानित किया।
समारोह के विशिष्ठ अतिथि राष्ट्रपतिसे सम्मानित मनीषी बनवारी लाल गौड़, संस्कृत शिक्षा विभाग के पूर्व निदेशक राधेश्याम कलावटिया,पूर्व निदेशक संस्कृत शिक्षा विभाग डाॅ.मण्डन शर्मा,आकाशदीप संस्थान के निदेशक डाॅएमसी भारतीय ने भी विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर कर्मचारी नेता सूर्यप्रकाश टाॅक,पीबीएम अस्पताल के अधीक्षक डाॅ.पी.के.बेरवाल, श्रीमती शर्मिला पंचारिया,राजकुमार जोशी मंचस्थ थे। मंगलाचरण ओम सांखोलिया ने किया तथा संचालन सोनू ने किया।

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