भारत को ज्ञान की वैश्विक महाशक्ति में बनाने दिशा में मील का पत्थर साबित होगी नई शिक्षा नीति-देवनानी

प्रो. वासुदेव देवनानी
जयपुर, 30 जुलाई। पूर्व शिक्षा मंत्री एवं अजमेर उत्तर विधायक वासुदेव देवनानी ने देश में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू करने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मानव संसाधन विकास मंत्री डाॅ. रमेश पोखरियाल एवं केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावेडकर का आभार प्रकट किया है। देवनानी ने कहा कि नई शिक्षा नीति 21वीं सदी की जरूरतों के अनुकूल शिक्षा को अधिक समग्र एवं लचीला बनाते हुए भारत का एक ज्ञान आधारित जीवंत समाज और ज्ञान की वैश्विक महाशक्ति बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। 21वीं सदी की यह पहली शिक्षा नीति प्रत्येक छात्र में निहित अद्वितीय क्षमताओं को सामने लाने का काम करेगी।
देवनानी ने कहा कि पिछले लम्बे समय से नई शिक्षा नीति की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इससे पहले 1986 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति बनाई गई थी। तीन दशक से अधिक समय में आए बदलावों को ध्यान में रखते हुए केन्द्र सरकार द्वारा नई शिक्षा नीति तैयार की गई है जिसमें सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने व प्रारम्भिक शिक्षा में सुधार लाने के साथ ही शिक्षा को सर्वसुलभ व सर्वव्यापी बनाने के प्रयास किये गये है जो विद्यार्थी के सुंदर भविष्य के निर्माण में सहायक सिद्ध होंगे।

उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में मातृभाषा में अध्ययन का अवसर प्राप्त हुआ है जिससे भारतीयता का बोध तो होता ही है साथ ही गर्व की अनुभूति भी होती है। अब पांचवी कक्षा तक विद्यार्थी अपनी मातृभाषा में पढ़ाई कर सकेंगे। उन्होेंने कहा कि लम्बे समय से मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम शिक्षा मंत्रालय करने की मांग की जा रही है जिसे नई शिक्षा नीति में स्वीकार कर लिया गया है। यह सरकार का एक अभिनंदनीय कदम है।

शुरू होगी व्यावसायिक शिक्षा
उन्होंने बताया कि नई नीति के तहत 21वीं सदी के प्रमुख कौशल या व्यावहारिक जानकारियों से विद्यार्थियों को लैस करके उनका समग्र विकास किया जाना स्कूल के पाठ्यक्रम और अध्यापन.कला का लक्ष्य होगा। आवश्यक ज्ञान प्राप्ति एवं अपरिहार्य चिंतन को बढ़ाने व अनुभवात्मक शिक्षण पर अधिक फोकस करने के लिए पाठ्यक्रम को कम किया जाएगा। विद्यार्थियों को पसंदीदा विषय चुनने के लिए कई विकल्प दिए जाएंगेण। कला एवं विज्ञान के बीचए पाठ्यक्रम व पाठ्येतर गतिविधियों के बीच और व्यावसायिक एवं शैक्षणिक विषयों के बीच सख्त रूप में कोई भिन्नता नहीं होगीण। स्कूलों में कक्षा 6 से ही व्यावसायिक शिक्षा शुरू हो जाएगी और इसमें इंटर्नशिप शामिल होगी।

बढेगी 3.5 करोड नई सीटें
देवनानी ने कहा कि नई नीति के तहत उच्च शिक्षा को बढावा दिया जाएगा। आंकडों के अनुसार 26.3 प्रतिशत विद्यार्थी ही हायर एज्युकेशन ले पाते थे जिसे बढाकर 50 प्रतिशत तक करने का लक्ष्य है। ऐसा करने के लिए हायर एज्युकेशन में 3.5 करोड नई सीटें बढाई जाएगी। उच्च शिक्षा में चार वर्षीय कोर्स होगा प्रथम वर्ष उत्तीण करने पर सर्टीफिकेट, दूसरा वर्ष में डिप्लोमा, तीसरे वर्ष में स्नातक एवं चोथे वर्ष में स्नातक व शोध योग्य माना जाएगा। बीएड चार वर्ष का होगा। शिक्षा को तकनीक के साथ जोडने के लिए स्वायत्त निकाय राष्ट्रीय शैक्षिक प्रोद्योगिकी मंच बनाया जाएगा।

प्री-स्कूलिंग के साथ 12 साल की स्कूली शिक्षा
उन्होंने कहा कि बचपन की देखभाल और शिक्षा पर ध्यान केन्द्रित करते हुए स्कूली पाठयक्रम के 10+2 ढांचे की जगह 5 +3+3+4 का नया पाठयक्रम संरचना लागू किया जाएगा जिसमें अब तक दूर 3-6 साल के बालकों को स्कूली पाठयक्रम के तहत लाने का प्रावधान है। नई नीति में तीन साल की आंगनवाडी या प्री-स्कूलिंग के साथ 12 साल की स्कूली शिक्षा होगी।

राजस्थान के सुझावों का समावेश
देवनानी ने बताया कि पूर्व में प्रदेश के शिक्षा राज्य मंत्री रहते हुए वे मानव संसाधन विकास मंत्रालय की कई बैठकों में सम्मिलित हुए थे तथा शिक्षा सुधारों को लेकर उनके द्वारा दिये गये सुझावों का भी नई शिक्षा नीति में समावेश किया गया है जिसके लिए उन्होंने शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कक्षा तीन, पांच व आठवीं की परीक्षा अनिवार्य रूप से कराने, प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में होने, आंकनवाडी को प्राइमेरी शिक्षा के साथ जोडने, बीएड विद्यार्थियों की इंटरशिप कराने सहित पांच प्रस्ताव इस नीति में स्वीकार किये है।

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