जैसलमेर लोक भजनो के नायक महेशराम मेघवाल लोकनायक जयप्रकाश राष्ट्रीय
पुरष्कार से सम्मानित होंगे ,लोक नायक जय प्रकाश इंटरनेशनल डेवलोपमेन्ट
सेंटर द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियों में दिए जाने
वाले इन पुरस्कारों की इस वर्ष की सूची में महेशाराम जी के अलावा कला
क्षेत्र में कत्थक कलाकार डॉ रमा दास, निर्देशक सुभाष घई, गीतकार समीर,
लेखक अजित राय जैसी कई हस्तियां शामिल हैं.
राजस्थान के पश्चिमी क्षेत्रो में सिंध प्रान्त की वाणी भजनों की परंपरा
के गायक महेशराम के लोग लोक भजन बड़े चाव और मंत्रमुग्ध होकर सुनते हैं
,कबीर ,मीरा ,दादू पंथ के भजनो में नई जान महेशराम की मिश्रीयुक्त वाणी
,स्थानीय स्तर पर खास मौकों पर होने वाले वाणी कार्यक्रमों में महेशराम
को सुनने दूर दूर पहुँचते ,हैं महेशराम वाणी गायिकी परम्परा के मुख्य
स्तम्भ हे ,स्व दान सरीखे लोक वाणी भजन गायकों के समकक्ष महेशराम को यु
ट्यूब पर लोग खूब पसंद , पाकिस्तान सिंध महेशराम के प्रशसंक हैं ,विगत
सालों से निकल रही कबीर यात्रा महेशराम मुख्य चेहरा होते हैं ,इनकी
वाणी भजन गायकी सुनकर रोम रोम मंत्र मुग्ध हो जायेगा ,वाह क्या संगीत है
जो अंतरात्मा को स्पर्श कर जाता ह यह कलाकर ,राजस्थान के प्रतिष्ठित,
गुणी, गंभीर और सहज ~ भक्ति परंपरा के लोक गायक महेशा राम मेघवाल जी को
कला के क्षेत्र में लोकनायक जयप्रकाश राष्ट्रीय पुरष्कार मिलने जा ,
जैसलमेर से 60 किलोमीटर दूर रेगिस्तान के एक गाँव छतांगढ़ के इस लोक
कलाकार का इस पुरस्कार के लिए चयन होना बहुत मायनों में महत्वपूर्ण है.
कबीर पंथी की लोक संगीत परम्परा के लिए ही नहीं बल्कि यह राजस्थान की
समस्त लोक परम्पराओं की प्रतिष्ठा को एक नयी ऊर्जा एवं चेतना देने वाला
सम्मान है*.
महेशराम के वाणी भजन जो लोग मन्त्र मुग्ध होकर सुनते
लुप्त होती वाणी गायिकी के भजन सम्राट महेशराम बचपन से तंदूरे और वीणा पे
वाणियां करते आ रहे हैं ,अमुमन ग्रामीण अंचलो या शहरी क्षेत्र में किसी
की मृत्यु पर वाणियां कराने की परम्परा हैं ,इन वाणियों में लोक भजन गायक
अपनी इच्छानुरूप शिरकत ,हैं ,ये गायक मंडली में शामिल होकर रातीजोगे पर
रात भर भजन करते हैं ,वाणी करने वाले गायक पैसा नहीं लेते ,मेजबान उन्हें
भजनो पहले खाना जरूर खिलते हैं ,भक्ति मार्ग पर चलने वाले इन लोक
कलाकारों के लिए तथा वाणी भजन गायिकी सरंक्षण को लेकर कोई सरकारी गैर
सरकारी कार्यक्रम संचालित नहीं हो रहा ,आने वाले सालो में वाणी गायिकी
लुप्त जाएगी ,महेशराम की गायिकी में जादू हैं ,लोग उनके भजनों पूरी तरह
डूब जाते हैं ,महेशाराम के गाये ” आवो नी क़ानूडा”.थाने सतगुरु जी समझावे
वारी जाऊं रे बलिहारी जाऊं रे ,कठे लगाई इतरी देर भक्तो रा भीरू ,जैसाण
री कुरजां, ‘भरोसे थारे चाले रे सत गुरू मारी नांव,रुत आई बोलत मोरा
री,’ऐ म्हारी हेली है’ कलयुग देक हियो मती हारो ,बहुत प्रसिद्धि पा चुके
हैं ,