उदयपुर। 10 राज्यों की एकल महिलाओं की बैठक झीलों की नगरी उदयपुर में बेदला स्थित आस्था प्रशिक्षण केन्द्र में संपन्न हुई। 3 दिवसीय बैठक में 10 राज्यों से आई 35 एकल महिला नेतृत्वकर्ताओं ने एकल महिलाओं की समस्याओं, खासकर कोविड लोकडाउन के दौरान आई परेशानियों और अपने अधिकारों के लिये संघर्ष को आगे बढ़ाने की रणनीति को लेकर तीन दिवसीय बैठक में चिंतन-मंथन किया।
पंजाब से आई एकल महिला दलजीत कोर ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में कोविड लोकडाउन में आर्थिक परेशानियों के चलते परिवार के साथ रह रही बुजुर्ग एकल महिलाओं को बहुत सारी परेशानियां झेलनी पड़ी। यह बताते हुये उनकी ऑखों में पानी आ गया कि उनके संगठन के क्षेत्र में 23 बुजुर्ग एकल महिलाओं को पूरा खाना व समय पर ईलाज न मिलने के कारण देहान्त हो गया। लोकडाउन के चलते संगठन भी इन महिलाओं तक नहीं पहुंच पाया, परिवार बहू-बेटे और बच्चों के साथ रहते हुए इस प्रकार की समस्याओं का सामना करते हुए महिलाओं ने अपना दम तोड़ दिया, जिसकी कोई गिनती नहीं हुई है, और इस पर कोई कार्यवाही समाज या सरकार द्वारा नहीं हो पायी।
दिल्ली से हीरावती ने घरेलू कामगार महिलाओं की समस्याओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कोविड लॉकडाउन के दौरान बहुत सी महिलाओं का काम छूट गया और इस बात को अभी दो वर्ष पूर्ण होने को हैं, पर अब तक फिर से काम नहीं मिल पाया। घरेलू कामगार महिलाओं और उनमें भी जो महिलायें एकल हैं, वे अभी बहुत परेशानी में है, आमदनी का कोई जरियो न होने व सरकार द्वारा घरेलू कामगारों की गिनती न होने के कारण उनको किसी भी तरह की सरकारी सुविधा नहीं पहुंच पा रही है।
राजस्थान के उदयपुर जिले से सलूम्बर की पार्वती बहन ने बताया कि आदिवासी क्षेत्र में सुदूर गांवों में रहने वाले लोग संक्रमित हुए हैं, बीमार हुए है लेकिन लॉकडाउन के चलते साधनों के अभाव में वे ईलाज के लिए कस्बों-शहरों तक पहुंच ही नहीं पाये, ऐसे में ना तो जांच हो पाई ना ही ईलाज मिल पाया, इस कारण बहुत से लोगों की मृत्यु हो गई। आज की स्थिति में परेशानी ये भी है कि जो लोग गुज़र गये उनके परिवार को कोई सहारा नहीं मिल पा रहा है। राजस्थान राज्य में कोविड मृत्यु पर सहाय की जो घोषणाएं की गई, वह बिना किसी दस्तावेज़ के ज़रूरतमंद लोगों तक उनको पहुॅचाना बहुत मुश्किल है।
एकल महिलाओं की समस्याओं पर हो रहे मंथन के दौरान एक बात सभी राज्यों से स्पष्ट रूप से सामने आई है कि भोजन का अधिकार केस में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश होने के बावजूद किसी भी राज्य में अन्त्योदय योजना के अन्तर्गत एकल महिलाओं को नहीं जोड़ा जा रहा है, और बहुत संघर्ष से जीवन यापन कर रही एकल महिला मुखिया परिवारों को, पर्याप्त राशन व खाद्य आपूर्ति नहीं हो पा रही है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों और वंचित एकल महिलाओं के अधिकारों के इस उल्लंघन को लेकर सभी एकल महिला नेतृत्वकर्ताओं ने आगे आवाज उठाने के लिए रणनीति बनाई। साथ ही एकल महिलाओं को आवास व आवास के लिए जमीन मुहैय्या करवाई जाये इसके लिए भी आगे कार्य किया जायेगा। कोविड के चलते एकल महिलाओं के सामने आजीविका की समस्या मुह फाड़े खड़ी है। जहॉ युवा वर्ग को आमदानी का ज़रिया न मिल पाना एक चिंता का विषय है, महिला मुखिया परिवारों की आर्थिक स्थिति, पोषण का स्तर वा आजीविका का साधन न होना उनके और उनके बच्चों के लिये जीवन मृत्यु का विषय बना है – ऐसे में केन्द्र की सरकार द्वारा केवल बी.पी.एल. विधवा महिलाओं को मात्र रु. 200 का पेंशन अनुदान अमानवीय है। इस विषय पर भी सभी एकल महिलायें अपनी आवज़ बुलंद करेंगी।
पारूल चौधरी ने बताया कि बैठक में राजस्थान समेत झारखंड, गुजरात, तेलंगाना, पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, दिल्ली व मध्यप्रदेश के एकल महिला संगठनों से नेतृत्वकर्ताओं ने भाग लिया।