जयपुर, अक्टूबर, 2026 – इंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (आईसीईए) ने केंद्र सरकार से मोबाइल फोन पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी ) की दर 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने की मांग की है। संगठन ने इस प्रस्ताव को आगामी जीएसटी परिषद की बैठक में रखने का आग्रह किया है।
आईसीईए के अनुसार, भारत में डिजिटल समावेशन की राह में मोबाइल फोन की कीमत अभी भी एक बड़ी बाधा है। अनुमानतः 25 करोड़ भारतीय अभी भी फीचर फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। विशेषकर निम्न आय वर्ग और ग्रामीण परिवारों के लिए स्मार्टफोन की कीमत एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, जिसके कारण वे स्मार्टफोन पर स्विच करने का निर्णय टाल सकते हैं।
संगठन ने कहा कि आज स्मार्टफोन केवल एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण नहीं रह गया है, बल्कि यह डिजिटल भुगतान, सरकारी सेवाओं, शिक्षा,स्वास्थ्य सेवाओं, रोजगार, बैंकिंग और संचार तक पहुंच का प्रमुख माध्यम बन चुका है। ऐसे में स्मार्टफोन को अधिक किफायती बनाना देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था में अधिक लोगों की भागीदारी से सीधे जुड़ा है।
आईसीईए के मुताबिक, मोबाइल फोन विनिर्माण ‘मेक इन इंडिया’ और ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ की महत्वपूर्ण सफलताओं में शामिल है। देश में मोबाइल फोन का उत्पादन वित्त वर्ष 2014-15 के 18,900 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 6.27 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसी अवधि में मोबाइल फोन का निर्यात 1,566 करोड़ रुपये से बढ़कर 2.60 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया।
भारत अब मात्रा के आधार पर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता है। वित्त वर्ष 2025-26 में मोबाइल फोन देश का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद भी बन गया।
हालांकि, आईसीईए का कहना है कि घरेलू मांग में विनिर्माण और निर्यात के अनुरूप वृद्धि नहीं हुई है। हैंडसेट की खपत कमजोर हुई है, फोन बदलने की अवधि बढ़ी है और एंट्री-लेवल स्मार्टफोन बाजार पर दबाव बना हुआ है। संगठन के अनुसार, घरेलू बाजार में मांग को मजबूत किए बिना मोबाइल विनिर्माण क्षेत्र के विकास के अगले चरण को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होगा।
आईसीईए ने कहा कि फीचर फोन से स्मार्टफोन पर जाने वाले उपभोक्ताओं के लिए कीमत बेहद महत्वपूर्ण है। हैंडसेट की कीमत में मामूली वृद्धि भी पहली बार स्मार्टफोन खरीदने वाले ग्राहक के निर्णय को प्रभावित कर सकती है।
संगठन के मुताबिक, जीएसटी को 5 प्रतिशत करने से स्मार्टफोन की शुरुआती लागत कम हो सकती है, जिससे पहली बार स्मार्टफोन खरीदने वालों को प्रोत्साहन मिलेगा और फीचर फोन तथा 2G उपयोगकर्ताओं के स्मार्टफोन में संक्रमण को गति मिल सकती है।
आईसीईए ने यह भी कहा कि इससे डिजिटल भुगतान, बैंकिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
आईसीईए ने बताया कि जीएसटी लागू होने के समय जुलाई 2017 में मोबाइल फोन पर जीएसटी की दर 12 प्रतिशत थी, जिसे अप्रैल 2020 में बढ़ाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया था। संगठन का कहना है कि जीएसटी से पहले मोबाइल फोन पर सामान्यतः 1 प्रतिशत एक्साइज ड्यूटी और अधिकांश राज्यों में 5 प्रतिशत या उससे कम VAT लागू था।
आईसीईए ने 2025 में जीएसटी दरों के पुनर्गठन के दौरान भी मोबाइल फोन पर कर घटाने की मांग की थी।
संगठन ने वैश्विक स्तर पर मेमोरी चिप की कीमतों में बढ़ोतरी का भी उल्लेख किया है। आईसीईए के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेटा सेंटरों की बढ़ती मांग के कारण मोबाइल DRAM और NAND फ्लैश मेमोरी की वैश्विक आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है, जिससे हैंडसेट की लागत प्रभावित हो रही है।
आईसीईए ने जीएसटी परिषद से मोबाइल फोन पर जीएसटी को 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने के साथ-साथ मोबाइल फोन के पुर्जों पर भी संबंधित कर दरों को तर्कसंगत बनाने का अनुरोध किया है। संगठन का कहना है कि इससे घरेलू बिक्री बढ़ाने, औपचारिक बाजार को मजबूत करने, उत्पादन क्षमता के बेहतर उपयोग और मोबाइल फोन एवं कंपोनेंट विनिर्माण क्षेत्र में नए निवेश को प्रोत्साहन मिल सकता है।