प्रदेश के कृषि क्षेत्र में नई तकनीकी क्रांति एआई से सशक्त होंगे किसान और कृषि प्रशासन

13 जिलों के कृषि अधिकारियों को वाधवानी एआईप् के विशेषज्ञों ने दिया प्रशिक्षण- खेत से बाजार तक एआई आधारित सेवाओं को बढ़ावा देने की तैयारी
जयपुर/अजमेर, 14 अक्टूबर। प्रदेश में कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीक, नवाचार और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली से जोड़ने की दिशा में कृषि विभाग द्वारा महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसी क्रम में कृषि अधिकारियों को वाधवानी इंस्टीट्यूट फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (वाधवानी एआई) के विशेषज्ञों द्वारा कृषि क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग, संभावनाओं और व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर पंत कृषि भवन के सभा में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
इस प्रशिक्षण का उद्देश्य कृषि अधिकारियों को एआई की आधुनिक तकनीकों से परिचित कराने के साथ-साथ कृषि प्रशासन, योजना निर्माण, निगरानी, निर्णय प्रक्रिया और किसान सेवाओं में इसके प्रभावी उपयोग की संभावनाओं को समझना है। विभाग का लक्ष्य एआई को केवल तकनीकी प्रयोग तक सीमित न रखकर कृषि व्यवस्था और किसान सेवा वितरण का अभिन्न हिस्सा बनाना है।
किसानों तक पहुंचाया गया आई का लाभ
कृषि आयुक्त श्री नरेश कुमार गोयल ने कहा कि कृषि क्षेत्र में एआई की उपयोगिता विभागीय कार्यों तक सीमित नहीं है। किसानों तक इस तकनीक का प्रभावी हस्तांतरण आने वाले समय में कृषि को अधिक स्मार्ट, लाभकारी, टिकाऊ और जोखिम-रोधी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने कहा कि बुवाई से लेकर कटाई और उपज के विपणन तक कृषि की पूरी वैल्यू चेन में एआई आधारित तकनीकों का उपयोग किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हो सकता है। मौसम आधारित कृषि सलाह, फसल की स्थिति का आकलन, कीट एवं रोगों की पहचान, उत्पादन पूर्वानुमान, सिंचाई एवं संसाधनों का बेहतर प्रबंधन तथा बाजार संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने में एआई की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।
मौसम और फसल संबंधी निर्णय होंगे अधिक सटीक
एआई एवं डाटा एनालिटिक्स के माध्यम से कृषि, मौसम और फसल संबंधी बड़ी मात्रा में उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण कर किसानों को अधिक सटीक, स्थानीय और समयबद्ध सलाह उपलब्ध कराने की संभावनाएं विकसित की जा रही हैं।
मौसम के पूर्वानुमान और खेत में फसल की वास्तविक स्थिति के आधार पर किसानों को बुवाई, सिंचाई, उर्वरक प्रबंधन, कीट नियंत्रण और कटाई जैसे महत्वपूर्ण कृषि कार्यों के संबंध में समय पर निर्णय लेने में सहायता मिल सकेगी। इससे उत्पादन लागत को नियंत्रित करने, जोखिम कम करने और फसल उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

इसी प्रकार, एआई आधारित प्रणालियों के माध्यम से फसल की नियमित निगरानी, कीट एवं रोगों की शुरुआती पहचान तथा संभावित उत्पादन का आकलन अधिक प्रभावी और वैज्ञानिक बनाया जा सकता है।

Leave a Comment

This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

error: Content is protected !!