हिंदू धर्म में धन की देवी लक्ष्मी, तो अन्य धर्मों में कौन-कौन?

हिंदू धर्म में जिस प्रकार माता लक्ष्मी को धन, वैभव, समृद्धि और ऐश्वर्य की देवी माना जाता है, दीपावली पर विशेष पूजा होती है। उसी प्रकार दुनिया के दूसरे धर्मों और प्राचीन सभ्यताओं में भी धन-संपत्ति, व्यापार, सौभाग्य और समृद्धि से जुड़े देवी-देवताओं की मान्यताएं रही हैं। अव्वल तो दुनिया की अलग-अलग सभ्यताओं में धन को केवल मुद्रा या सोने-चांदी तक सीमित नहीं माना गया। कहीं धन का अर्थ अच्छी फसल था, कहीं व्यापार में सफलता, कहीं संतान और परिवार की खुशहाली तो कहीं सौभाग्य। इस्लाम में अल्लाह ही रिज्क है यानि जीविका देने वाला है। धन का कोई अलग देवी-देवता नहीं। ईसाई धर्म में ईश्वर को जीवन और सभी अच्छी वस्तुओं का दाता माना जाता है। धन की कोई अलग देवी नहीं। सिख धर्म में वाहेगुरु को सब कुछ देने वाला माना जाता है। मेहनत, ईमानदारी और बांटकर खाने पर जोर है। यहूदी धर्म में ईश्वर को आशीर्वाद और आजीविका का स्रोत माना जाता है। धन की कोई अलग देवी नहीं। बौद्ध धर्म में कोई सर्वमान्य धन-देवता नहीं, लेकिन कुछ बौद्ध परंपराओं में जम्बल धन और समृद्धि से जुड़े हैं।
चीनी लोकधर्म में चाई षेन को धन और व्यापार में सफलता का देवता माना जाता है। चीनी नववर्ष पर इनकी विशेष पूजा की जाती है। हालांकि चाई शेन कोई एक निश्चित ऐतिहासिक व्यक्ति नहीं हैं। चीनी परंपरा में उनके कई रूप हैं। झाओ गोंगमिंग युद्धवीर स्वरूप में धन के देवता हैं। बी गण ईमानदारी और न्यायपूर्ण धन के देवता हैं। फान ली व्यापार, कारोबार और आर्थिक बुद्धिमत्ता के प्रतीक हैं। गुआन यू व्यापारियों में विश्वास, निष्ठा और कारोबार की सुरक्षा के लिए पूजनीय हैं।
यूनानी (ग्रीक) परंपरा में प्लूटस धन और भौतिक संपन्नता के देवता के रूप में प्रतिष्ठित हैं। रोमन परंपरा में फॉर्चुना भाग्य, सौभाग्य, समृद्धि और खुशहाली की देवी है। जापानी परंपरा में दाइको कुटेन धन, भोजन, कृषि और खुशहाली से जुड़े देवता हैं। प्राचीन मिस्र में हापी कृषि की उर्वरता और प्रचुरता के प्रतीक रहे हैं। पश्चिमी अफ्रीका की योरूबा परंपरा में अजे धन, व्यापार और समृद्धि से जुड़ी आध्यात्मिक शक्ति है।

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