नकारात्मक सोच से छुटकारा पाने के उपयोगी सुझाव—Part 2

डा. जे.के.गर्ग
डा. जे.के.गर्ग
असफल या रिजेक्ट होने पर भी निराश नहीं हो —–
रिजेक्शन या असफलता जीवन का अविभाज्य भाग है, याद रक्खें कि जब एक दरवाजा बंद होता तो दूसरा दरवाजा जरुर खुलता है | असफलता से हमें अपनी कमियों को समझने ओर उन्हें सुधारने का मौका मिलता है | ऐसा कोई भी ऐसा इन्सान नहीं है जिसे जीवन कभी असफलता नहीं मिली हो | इसलिए हमेशा ये सोच रखिये कि इस बार असफल या रिजेक्ट हो गया तो क्या हुआ, मैं अपनी कमियों को दूर करूंगा, सब ठीक है, और मुझे जीवन मैं अनेकों अवसर मिलेगें है।
हमेशा कहें कि””मैं खुश हूँ” मैं सम्पूर्ण हूँ” मैं भी मुझे दिये काम को पूरा कर सकता हूँ “:—–सच्चाई यही है कि हमारी सोच से ज्यादा प्रभावशाली हमारे शब्द होते हैं। जो भी आप बोलते हैं आपका दिमाग वही सुनता है। इसलिए हमेशा अपने लिए और दुसरे के लिये अच्छे, सरल और सुंदर शब्दों का प्रयोग करें आप देखेंगे आपका जीवन एक अलग तरह के प्रकाश से चमक उठेगा। जो जैसा है उसको उसी रूप मैं स्वीकार करें एवं अपना निर्णय और सोच दूसरों पर नहीं थोपें | ऐसा करने से आपको अपने जीवन के लिए जो मार्ग चुना है उसमे आपको अधिक आनंद मिलेगा। याद रखिये कि आपका रवैया आपके कामों को यथा शीघ्र पूरा करने और उसमें प्रशंसा पाने में तेजी से सहायता करता है, इसलिए दैनिक दिनचर्या में सकारात्मक शब्दों का प्रयोग करना प्रारम्भ करें। प्रस्तुतिकरण—-डा. जे. के. गर्ग
सन्दर्भ—– मेरी डायरी के पन्नें, विभिन्न पत्रपत्रिकायें,अभिषेक कांत पाण्डेय, डा. के.वी आनन्द आदि
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