4- ताड़ासन
ताड़ का सामान्य अर्थ खजूर का पेड़ होता है। इसे करने के लिए पैरो में 2 इंच की दूरी रखकर खड़ा होना होता है। यह खड़े होकर किए जाने वाले समस्त आसनों का आधार माना गया है। हाथों की अंगुलियों को आपस में एक दूसरे से मिलाकर हथेलियों को बाहर की ओर रखते हुए श्वास को अन्दर ग्रहण करें। भुजाओं को ऊपर की ओरकरके कंधों को एक सीध में ले आएं। पैर की एड़ियों को ऊपर उठाकर अंगुलियों पर संतुलन साधने का प्रयास करें। इस स्थिति में सामथ्र्य के अनुसार रूकने का प्रयास करें। श्वास को बाहर छोड़ते हुए प्रारम्भिक स्थिति में आ जाएं।
इस आसन को करने से स्थायित्व एवं शारीरिक सुदृढता प्राप्त होती है। इससे मैरूदण्ड से संबंधित अवयवों में रक्त संचार सुचारू हो जाता है। बालकों में दाढ़ी मूंछ आने तक एवं बालिकाओं में मासिक धर्म शुरू होने तक इस आसन के द्वारा लम्बाई में पर्याप्त वृद्धि की जा सकती है।
यह आसन हृदय एवं नसों से संबंधित मरीजों को नहीं करना चाहिए। कई बार चक्कर आने की स्थिति बने तो अंगुलियों पर खड़े होने के अलावा अन्य पद किए जा सकते है।
संतोष प्रजापति
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