स्वामी विवेकानंदजी के 156 वें जन्म दिन पर मनन करें उनके अनमोल मन्त्रों पर

डा. जे.के.गर्ग
उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक आपको अपना लक्ष्य प्राप्त ना हो जाये।
जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करते तब तक आप भगवान पर भी विश्वास नहीं कर सकते।
दिल और दिमाग के टकराव में हमेशा अपने दिल की सुनो।
बंधन की त्रिमूर्तियां हैं (1) आकांक्षा (2) अज्ञानता और (3) असमानता |
जब लोग तुम्हे गाली दें तो तुम उन्हें आशीर्वाद दो। सोचो, तुम्हारे झूठे दंभ को बाहर निकालकर वो तुम्हारी कितनी मदद कर रहे हैं।
सच्चाई तो यही है कि जो तुम सोचते हो वो हो जाओगे। यदि तुम खुद को कमजोर सोचते हो , तुम कमजोर हो जाओगे ; अगर खुद को ताकतवर सोचते हो , तुम ताकतवर हो जाओगे। याद रक्खों सबसे बड़ा पाप खुद को कमजोर समझना ही है |
पढ़ने के लिए एकाग्रता जरूरी है वहीं एकाग्रता के लिए ध्यान जरूरी है । ध्यान से ही हम इन्द्रियों पर संयम रखकर एकाग्रता प्राप्त कर सकते है।
स्वयं में बहुत सी कमियों के बावजूद अगर में खुद स्वयं से प्रेम कर सकता हूं तो दुसरो में थोड़ी बहुत कमियों की वजह से उनसे घृणा कैसे कर सकता हूँ ?\
बूरे संस्कारो को दबाने के लिए एकमात्र समाधान यही है कि लगातार पवित्र विचार करते रहे ।
सही मायनों में उस आदमी ने अमरत्त्व प्राप्त कर लिया है जो आदमी किसी सांसारिक वस्तु से व्याकुल नहीं होता है |
वही जीते हैं,जो दूसरों के लिए जीते हैं।
अगर धन दूसरों की भलाई करने में मदद करे या उनके काम आए तो इसका कुछ मूल्य है, अन्यथा यह धन सिर्फ बुराई का एक ढेर और कूड़ा ही है और इससे जितना जल्दी छुटकारा मिल जाये उतना बेहतर है |
एक समय में एक काम करो, और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमे डाल दो और बाकी सब कुछ भूल जाओ।

Leave a Comment